BJP के खिलाफ किसानों ने खोला मोर्चा, गांव में बैनर ‘वोट मांगने मत आना’

जामनगर में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर BJP के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है... गांव में ‘वोट मांगने मत आना’ जैसे बैनर लगाए गए हैं...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के जामनगर जिले में प्राइवेट बिजली ट्रांसमिशन लाइन को लेकर किसानों.. और ग्रामीणों का विरोध अब राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है.. जामनगर जिले के जोडिया तालुका के लेबिंडा गांव में किसानों ने भारतीय जनता पार्टी यानी BJP के खिलाफ कई जगहों पर बैनर लगाए हैं.. इन बैनरों के जरिए किसानों ने BJP नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं को साफ तौर पर चेतावनी दी है कि.. जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं.. तब तक वे गांव में प्रचार करने या वोट मांगने के लिए न आएं..

गांव में लगाए गए इन बैनरों ने इलाके की सियासत में हलचल पैदा कर दी है.. किसानों का कहना है कि यह फैसला किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध के लिए नहीं.. बल्कि उनकी जमीन और खेती से जुड़े एक गंभीर मुद्दे को लेकर किया गया है.. ग्रामीणों के मुताबिक उनके खेतों से होकर गुजरने वाली पावर ट्रांसमिशन लाइनों.. और इससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण उनकी खेती प्रभावित हो रही है.. उनका आरोप है कि इस समस्या को लेकर वे लंबे समय से सरकार.. और स्थानीय प्रशासन से समाधान की मांग करते आ रहे हैं.. लेकिन उन्हें अब तक ऐसा समाधान नहीं मिला है, जिससे वे संतुष्ट हो सकें..

किसानों का कहना है कि खेती की जमीन उनके लिए सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा नहीं है.. बल्कि उनकी आजीविका का मुख्य आधार है.. ऐसे में जब किसी प्रोजेक्ट के कारण उनकी जमीन के इस्तेमाल पर असर पड़ता है.. या खेती करने में दिक्कतें सामने आती हैं.. तो इसका सीधा असर उनके परिवारों की आय और भविष्य पर पड़ता है.. ग्रामीणों के मुताबिक  ट्रांसमिशन लाइन के कारण उनकी जमीन की उपयोगिता कम हुई है.. और खेती से जुड़े कामों पर भी इसका असर पड़ा है..

लेबिंडा गांव के किसानों की सबसे बड़ी मांग उचित और पर्याप्त मुआवजे को लेकर है.. किसानों का कहना है कि जिस जमीन से पावर ट्रांसमिशन लाइन गुजर रही है.. उस जमीन के मालिकों को उनकी वास्तविक परेशानी.. और जमीन पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए उचित मुआवजा मिलना चाहिए.. किसानों की दूसरी बड़ी मांग उनकी खेती की जमीन की सुरक्षा से जुड़ी है.. उनका कहना है कि बिजली ट्रांसमिशन से जुड़े प्रोजेक्ट्स के कारण खेती योग्य जमीन का इस्तेमाल प्रभावित नहीं होना चाहिए.. अगर किसी परियोजना के कारण किसानों की जमीन पर स्थायी या लंबे समय तक असर पड़ता है.. तो उसके लिए ऐसा समाधान होना चाहिए.. जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े..

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि केवल मुआवजे की घोषणा कर देना पर्याप्त नहीं है.. उनके मुताबिक, सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निजी पावर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण किसानों की खेती.. और जमीन की उपयोगिता पर कम से कम असर पड़े.. किसानों का कहना है कि उन्हें ऐसा स्थायी समाधान चाहिए.. जिससे भविष्य में इस तरह की समस्याएं दोबारा सामने न आएं.. लेबिंडा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि.. उन्होंने अपनी समस्या को लेकर सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने कई बार अपनी बात रखी है.. किसानों के अनुसार उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात की, अपनी समस्याएं बताईं.. और समाधान की मांग की.. लेकिन अब तक उन्हें ऐसा कदम दिखाई नहीं दिया.. जिससे उनकी नाराजगी खत्म हो सके..

ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी शिकायतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया.. इसी वजह से अब उन्होंने विरोध का रास्ता अपनाया है.. गांव में लगाए गए BJP-विरोधी बैनरों को किसान अपने आंदोलन का एक हिस्सा बता रहे हैं.. किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती.. तब तक वे अपने विरोध को जारी रखेंगे.. इसी के तहत उन्होंने BJP नेताओं और कार्यकर्ताओं से गांव में प्रचार करने.. और वोट मांगने से दूर रहने की अपील की है..

गांव में BJP के खिलाफ लगाए गए बैनरों का राजनीतिक संदेश भी साफ दिखाई देता है.. ग्रामीणों ने सीधे तौर पर पार्टी नेताओं.. और कार्यकर्ताओं को गांव में प्रचार नहीं करने की चेतावनी दी है.. इससे आने वाले समय में इस मुद्दे का स्थानीय राजनीति पर असर पड़ने की चर्चा भी तेज हो गई है.. हालांकि किसानों का कहना है कि उनका मुख्य मुद्दा राजनीतिक नहीं.. बल्कि जमीन और मुआवजे से जुड़ा है.. उनका कहना है कि यदि उनकी मांगें पूरी कर दी जाती हैं.. और किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकलता है.. तो विरोध की स्थिति भी खत्म हो सकती है..

लेकिन फिलहाल ग्रामीणों के तेवर सख्त दिखाई दे रहे हैं.. उनका कहना है कि जब तक उनकी जमीन, खेती.. और मुआवजे से जुड़े सवालों का समाधान नहीं होता.. तब तक वे अपने विरोध से पीछे नहीं हटेंगे.. जामनगर के लेबिंडा गांव में चल रहे इस विरोध के बीच मोरबी जिले के जेटपार गांव का किसान आंदोलन भी चर्चा में है.. यहां भी किसान प्राइवेट पावर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स का विरोध कर रहे हैं.. और बेहतर मुआवजे की मांग को लेकर सत्याग्रह कर रहे हैं..

किसान आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह विरोध सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है.. उनके मुताबिक, गुजरात के अलग-अलग इलाकों में ऐसे कई गांव हैं.. जहां किसान निजी बिजली ट्रांसमिशन परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं.. जेटपार गांव में चल रहे सत्याग्रह को भी ग्रामीणों का समर्थन मिलने की बात सामने आई है.. आंदोलन से जुड़े किसानों का कहना है कि जमीन से जुड़े इस मुद्दे को लेकर कई गांवों के लोग एक-दूसरे के संपर्क में हैं.. और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं..

 

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