विधानसभा का विशेषाधिकार बड़ा या मौलिक अधिकार? 7 जजों की बेंच करेगी सुनवाई

तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर की याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की बेंच इस सवाल पर विचार करेगा कि विधानसभा को मिले विशेषाधिकार ज्यादा अहम हैं या मौलिक अधिकार?

4पीएम न्यूज नेटवर्क: तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर की याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की बेंच इस सवाल पर विचार करेगा कि विधानसभा को मिले विशेषाधिकार ज्यादा अहम हैं या मौलिक अधिकार?

अभियक्ति की आजादी और मौलिक अधिकार ज्यादा अहम या संसद-विधानसभा का विशेषाधिकार? सुप्रीम कोर्ट में 7 जजों की बेंच इस सवाल पर विचार करेगा. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इसके लिए संवैधानिक बेंच बनाने की घोषणा की है. 6 अक्तूबर को इस पर पहली सुनवाई होगी.

तमिलनाडु स्पीकर से जुड़े 2003 के मामले में यह सुनवाई होगी. दरअसल, 2003 में तमिलनाडु के स्पीकर के आदेश पर अंग्रेजी अखबार द हिंदू के संपादक और पत्रकारों को तमिलनाडु पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. उस वक्त स्पीकर का कहना था कि द हिंदू ने विशेषाधिकार का हनन करके एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. वहीं अखबार का कहना था कि तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री के बयान को प्रकाशित किया गया था, जो गलत नहीं है. उस वक्त जयललिता तमिलनाडु की मुख्यमंत्री थीं.

पत्रकारों की गिरफ्तारी का दिया गया था आदेश
अप्रैल 2003 में द हिंदू अखबार ने मुख्यमंत्री के भाषण के हवाले से एक रिपोर्ट की. इसका शीर्षक था- बढ़ती असहिष्णुता. इस रिपोर्ट पर पहले तमिलनाडु विधानसभा ने सवाल उठाया और फिर पत्रकारों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया. विधानसभा के स्पीकर ने अनुच्छेद-194 के तहत यह आदेश दिया. इस अनुच्छेद में विधानसभा के स्पीकर और सदस्यों को विशेषाधिकार प्राप्त है.

बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी. इसके बाद से यह केस सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है. बुधवार को CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने इस मामले में 7 जजों की बेंच के साथ सुनवाई 6 अक्टूबर से शुरू करने का फैसला किया है.

सुप्रीम कोर्ट किन सवालों पर विचार करेगा?
सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि अनुच्छेद 194 के तहत विधायकों के विशेषाधिकार अनुच्छेद 19 में मिले मौलिक अधिकारों पर किस हद तक लागू हो सकते हैं? यानी विधायकों के विशेषाधिकार और नागरिकों के मौलिक अधिकारों में टकराव होने पर किसे प्राथमिकता मिलेगी? इसके अलावा क्या विशेषाधिकार के नाम पर पुलिस मौलिक अधिकार के दायरे में रहने वाले नागरिकों को गिरफ्तार कर सकती है? दिलचस्प बात है कि इस केस में एक पक्षकार तत्कालीन विधानसभा के स्पीकर के कलीमूठू का निधन 2006 में हो चुका है. इसी तरह मुख्यमंत्री जयललिता का भी निधन हो चुका है.

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