वायरल फीवर की चपेट में गोरखपुर, OPD में मरीजों की लंबी कतार

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में  मौसम में बदलाव के साथ गोरखपुर जिले में वायरल फीवर का प्रकोप तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। जिला अस्पताल समेत शहर के विभिन्न निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की ओपीडी में बुखार, सर्दी-खांसी, बदन दर्द और कमजोरी की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में  मौसम में बदलाव के साथ गोरखपुर जिले में वायरल फीवर का प्रकोप तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। जिला अस्पताल समेत शहर के विभिन्न निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की ओपीडी में बुखार, सर्दी-खांसी, बदन दर्द और कमजोरी की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

चिकित्सकों के मुताबिक बड़ी संख्या में मरीज वायरल फीवर से पीड़ित मिल रहे हैं, वहीं कुछ मरीजों में मलेरिया और टायफाइड की भी पुष्टि हो रही है। इसके अलावा ऐसे मरीज भी सामने आ रहे हैं जिनमें तेज बुखार के बावजूद शुरुआती जांच में बुखार का स्पष्ट कारण सामने नहीं आ रहा है।

रोजाना 300 से 400 मरीज पहुंच रहे ओपीडी

जिला अस्पताल की ओपीडी में वायरल फीवर से संबंधित मरीजों की संख्या में अचानक तेजी आई है। डॉक्टर बीके सुमन और सीनियर फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार के मुताबिक इन दिनों प्रतिदिन करीब 300 से 400 मरीज केवल बुखार और वायरल संक्रमण से संबंधित लक्षणों के साथ ओपीडी में पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि मरीजों में तेज बुखार के साथ सिरदर्द, बदन दर्द, गले में खराश, खांसी, सर्दी, ठंड लगना, भूख कम लगना और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। कई मरीजों में बुखार दो से तीन दिन तक बना रहने के बाद भी कमजोरी लंबे समय तक महसूस हो रही है।

मलेरिया और टायफाइड के मरीज भी सामने आए

वायरल फीवर के साथ-साथ मलेरिया और टायफाइड के मरीज भी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर मरीजों को केवल सामान्य वायरल समझकर खुद से दवा लेने से बचने की सलाह दे रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार तेज बुखार कई अलग-अलग संक्रमणों का लक्षण हो सकता है। इसलिए बुखार लगातार बना रहने, बहुत अधिक कमजोरी होने, ठंड लगने, उल्टी-दस्त, सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

रहस्यमयी बुखार ने बढ़ाई चिंता

इन दिनों कुछ ऐसे मरीज भी अस्पताल पहुंच रहे हैं जिन्हें तेज बुखार है, लेकिन शुरुआती स्तर पर बुखार का स्पष्ट कारण पता नहीं चल पा रहा है। ऐसे मामलों में डॉक्टरों द्वारा मरीज की स्थिति के अनुसार ब्लड सैंपल सहित आवश्यक जांच कराई जा रही है। ब्लड जांच की रिपोर्ट के आधार पर ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मरीज वायरल संक्रमण, मलेरिया, टायफाइड या किसी अन्य संक्रमण से प्रभावित है। डॉक्टरों का कहना है कि हर तेज बुखार को वायरल मानकर उपचार शुरू करना उचित नहीं है। जरूरत पड़ने पर जांच के बाद ही सही उपचार किया जाना चाहिए।

क्यों बढ़ रहे हैं वायरल फीवर के मामले?

मौसम में बदलाव के दौरान तापमान और वातावरण में नमी में उतार-चढ़ाव के कारण वायरल संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा भीड़भाड़ वाली जगहों पर रहना, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना, हाथों की स्वच्छता का ध्यान न रखना और दूषित पानी या भोजन का सेवन भी कई बीमारियों का कारण बन सकता है। बारिश के बाद जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या बढ़ने की स्थिति में मलेरिया और अन्य मच्छरजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

चिकित्सकों ने लोगों से मौसम को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। घर से बाहर निकलते समय भीड़भाड़ वाले स्थानों पर आवश्यक सावधानी बरतें और हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोएं। घर के आसपास पानी जमा न होने दें और मच्छरों से बचाव के उपाय करें। बुखार आने पर पर्याप्त आराम करें और शरीर में पानी की कमी न होने दें। लेकिन बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का सेवन करने से बचना चाहिए।

क्या खाएं?

बुखार के दौरान शरीर को पर्याप्त पानी और ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इस दौरान हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लेना बेहतर माना जाता है।

इन चीजों का सेवन किया जा सकता है—

– पर्याप्त मात्रा में पानी और चिकित्सक की सलाह के अनुसार ओआरएस/इलेक्ट्रोलाइट युक्त तरल
– नारियल पानी
– दाल या हल्का सूप
– खिचड़ी
– दलिया
– मौसमी और अच्छी तरह धोए गए फल
– हरी सब्जियां
– हल्का घर का बना भोजन
– पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ

भूख कम होने पर एक बार में अधिक खाना खाने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन लेना बेहतर रहता है।

क्या न खाएं?

बुखार के दौरान शरीर की पाचन क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए बहुत अधिक तला-भुना, मसालेदार और भारी भोजन करने से बचना चाहिए।

इन चीजों से दूरी रखना बेहतर है—

– बहुत अधिक तला-भुना भोजन
– अत्यधिक मसालेदार खाना
– बासी भोजन
– खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ
– अस्वच्छ पानी
– बहुत अधिक मीठे और पैकेज्ड पेय
– डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं

बच्चों और बुजुर्गों पर रखें विशेष नजर

बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में बुखार के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। लगातार तेज बुखार, अत्यधिक सुस्ती, पानी न पी पाना, बार-बार उल्टी, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी, दौरा या शरीर में पानी की कमी जैसे लक्षण दिखाई दें तो मरीज को तत्काल चिकित्सकीय सहायता दिलानी चाहिए।

खुद से दवा लेना पड़ सकता है भारी

वायरल फीवर के बढ़ते मामलों के बीच चिकित्सकों ने लोगों को सबसे महत्वपूर्ण सलाह यही दी है कि बुखार को हल्के में न लें और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा शुरू न करें। वायरल, मलेरिया और टायफाइड के लक्षणों में कई बार समानता हो सकती है, लेकिन इनका उपचार अलग-अलग होता है। ऐसे में लगातार बुखार रहने पर चिकित्सक से संपर्क कर आवश्यक जांच कराना ही सुरक्षित रास्ता है। फिलहाल गोरखपुर में बढ़ते बुखार के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों की ओपीडी पर मरीजों का दबाव बढ़ा है। लोगों से साफ-सफाई, सुरक्षित पानी, संतुलित खान-पान और मच्छरों से बचाव के साथ समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की जा रही है।

रिपोर्ट- अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर

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