परिसीमन विधेयक के लिए विशेष सत्र बुलाने की तैयारी? मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं हुआ
मानसून सत्र 13 अगस्त को स्थगित हुआ, पर सत्रावसान नहीं हुआ है. सरकार ने परिसीमन विधेयक पर विशेष सत्र बुलाने का विकल्प खुला रखा है, जिसके लिए जरूरी समर्थन जुटाया जा रहा है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मानसून सत्र 13 अगस्त को स्थगित हुआ, पर सत्रावसान नहीं हुआ है. सरकार ने परिसीमन विधेयक पर विशेष सत्र बुलाने का विकल्प खुला रखा है, जिसके लिए जरूरी समर्थन जुटाया जा रहा है.
संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को दोनों सदनों में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था. लेकिन अभी तक सत्रावसान नहीं किया गया है. ऐसे में सरकार ने क्या परिसीमन विधेयक पर सरकार ने विशेष सत्र का विकल्प खुला रखा है?
13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए गए दोनों सदन के सत्रावसान तुरंत करने की बाध्यता नहीं थी. दो सत्र के बीच 6 महीने से ज्यादा का अंतर नहीं हो सकता. अगर दोनों सदन Prorogue नहीं होते हैं तो पीठासीन अधिकारी फिर से सत्र बुला सकते हैं.
इसे मॉनसून सत्र का continuation या स्पेशल सेशन कहा जा सकता है. इस बारे में सरकार को अभी फैसला करना है. सूत्रों के अनुसार परिसीमन विधेयक पर आवश्यक समर्थन मिलने और माहौल अनुकूल होने पर विशेष सत्र बुलाने का विकल्प खुला रखा गया है. इस बारे में जल्दी ही स्थिति स्पष्ट होगी.
पंद्रह दिन पहले कब शुरू करनी होगी प्रक्रिया?
अगर सरकार को लगता है कि परिसीमन विधेयक के लिए आवश्यक माहौल नहीं बन पा रहा है तो फिर सत्रावसान किया जा सकता है. जबकि राष्ट्रपति के Prorogue करने पर संसद का सत्र बुलाने की प्रक्रिया आरंभ करनी होती है. उदाहरण के लिए अगर अभी सत्रावसान किया जाता है तो शीतकालीन सत्र के लिए सत्र के पहले दिन से पंद्रह दिन पहले प्रक्रिया शुरू करनी होती है.
इसके लिए कैबिनेट की संसदीय मामलों की समिति की बैठक होती है और वो सत्र की तारीख तय कर राष्ट्रपति को सिफारिश करती है, जिसके बाद राष्ट्रपति शीतकालीन सत्र को आहूत करेंगी. सत्रावसान होने पर ही सरकार अध्यादेश जारी कर सकती है. जब तक सत्रावसान नहीं होता, तब तक संसद का सत्र चालू माना जाता है और तब सरकार कोई अध्यादेश नहीं ला सकती.
कांग्रेस का रुख क्या?
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा, “लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन को लेकर तमिलनाडु विधानसभा और कांग्रेस कार्य समिति द्वारा पारित प्रस्ताव एक ही रुख दिखाते हैं. लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या या तमिलनाडु के लिए तय 39 निर्वाचन क्षेत्रों में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए. कांग्रेस पार्टी का रुख ये है कि सीटों का मौजूदा आवंटन अगले 25 सालों तक बनाए रखा जाना चाहिए.”



