एक ही छत के नीचे 50 शानदार कलाकृतियां, गोरखपुर में ‘ललितार्चन’ प्रदर्शनी शुरू
गोरखपुर के राजकीय बौद्ध संग्रहालय में ‘ललितार्चन’ अंतरराष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी शुरू हुई। 50 कलाकृतियों वाली प्रदर्शनी में देश-विदेश के कलाकार शामिल हैं, जिसे 23 अगस्त तक निशुल्क देख सकेंगे।

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गोरखपुर में कला प्रेमियों के लिए शुक्रवार को एक खास अवसर आया। राजकीय बौद्ध संग्रहालय परिसर में अंतरराष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी ‘ललितार्चन’ का शुभारंभ हुआ। यहां देश-विदेश के कलाकारों की 50 कलाकृतियां एक साथ प्रदर्शित की गई हैं। प्रदर्शनी भारतीय कला परंपरा से लेकर समकालीन संवेदनाओं तक की विविध तस्वीर पेश कर रही है।
नौ राज्यों और पांच देशों के कलाकारों की कलाकृतियां
ललिता ट्रस्ट और राजकीय बौद्ध संग्रहालय के संयुक्त आयोजन में लगी प्रदर्शनी का उद्घाटन दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन और मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने किया। इस दौरान प्रदर्शनी के 36 पृष्ठीय कैटलॉग का भी विमोचन हुआ।
प्रदर्शनी में उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश और दिल्ली समेत कई क्षेत्रों के कलाकारों की रचनाएं शामिल हैं। वहीं बांग्लादेश, नेपाल, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और मॉरीशस के कलाकार भी इसमें भागीदार हैं।
प्रकृति से समकालीन जीवन तक, अलग-अलग रंगों की कहानी
प्रदर्शनी में कलाकारों ने प्रकृति, मानवीय संवेदनाओं, भारतीय संस्कृति, सामाजिक सरोकारों और समकालीन जीवन के विभिन्न पहलुओं को अपनी-अपनी शैली और तकनीक में उकेरा है।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि कला संवेदनाओं और विचारों की प्रभावी अभिव्यक्ति है। वहीं मंडलायुक्त ने संग्रहालय की दीर्घाओं का अवलोकन कर पुरावशेषों और कलाकृतियों की जानकारी ली तथा कला-संस्कृति संरक्षण के प्रयासों की सराहना की।
23 अगस्त तक निशुल्क देख सकेंगे प्रदर्शनी
ललिता ट्रस्ट के अध्यक्ष भारत भूषण ने अतिथियों को प्रदर्शित चित्रों की विषय-वस्तु और कला तकनीकों की जानकारी दी। राजकीय बौद्ध संग्रहालय के उप निदेशक यशवंत सिंह राठौर ने इसे सांस्कृतिक विविधता और अंतरराष्ट्रीय कला संवाद को बढ़ावा देने वाली पहल बताया।
‘ललितार्चन’ प्रदर्शनी 22 और 23 अगस्त को सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक दर्शकों के लिए निशुल्क खुली रहेगी। साहित्यकार, विद्यार्थी, शोधार्थी और कला प्रेमी इसका अवलोकन कर सकेंगे।
रिपोर्ट – अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर
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