गोरखपुर एम्स: छह हफ्ते का इंतजार नहीं, अब करीब 2 घंटे में मिल सकती है अहम जानकारी

एम्स गोरखपुर के शोध में ऐसी जांच तकनीक की उपयोगिता सामने आई है, जो टीबी और कई दवाओं के प्रतिरोध की जानकारी करीब दो घंटे में दे सकती है।

4पीएम न्यूज नेटवर्कः टीबी के मरीजों के लिए जांच और इलाज की राह आसान करने की दिशा में एम्स गोरखपुर के माइक्रोबायोलॉजी विभाग का शोध महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों ने एक ऐसी जांच तकनीक की उपयोगिता का अध्ययन किया है, जिससे टीबी के साथ-साथ कई प्रमुख दवाओं के प्रति जीवाणु में मौजूद प्रतिरोध की जानकारी करीब दो घंटे में मिल सकती है। शोध के नतीजे National Medical Journal of India में प्रकाशित हुए हैं।

100 नमूनों पर हुआ अध्ययन

एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरूप मोहंती के नेतृत्व में हुए अध्ययन में एक्सपर्ट एमटीबी/एक्सडीआर जांच तकनीक का मूल्यांकन किया गया। शोध में टीबी से संक्रमित 100 नमूनों को शामिल किया गया, जिनमें से 89 नमूने नई तकनीक से भी पॉजिटिव पाए गए।

तकनीक का उद्देश्य केवल टीबी की मौजूदगी पता करना नहीं, बल्कि उपचार के लिए महत्वपूर्ण दवा प्रतिरोध की पहचान भी जल्द करना है।

कई दवाओं के प्रतिरोध की एक साथ जानकारी

अध्ययन के अनुसार, इस जांच से रिफैम्पिसिन के अलावा आइसोनियाजिड, फ्लोरोक्विनोलोन, एथियोनामाइड और कुछ दूसरी पंक्ति की एंटी-टीबी दवाओं के प्रति प्रतिरोध का पता लगाया जा सकता है।

दवा-प्रतिरोधी टीबी में सही दवा का समय पर चयन बेहद अहम होता है। जांच में प्रतिरोध सामने आने पर मरीज के लिए उपचार रणनीति उसी अनुसार तय की जा सकती है।

समय पर पहचान से बेहतर इलाज की उम्मीद

एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता के अनुसार, दवा प्रतिरोधी टीबी की जल्द पहचान बेहतर उपचार में मददगार है। जांच का समय कम होने से सही उपचार जल्दी शुरू करने की संभावना बढ़ सकती है और राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम को भी मजबूती मिल सकती है।

डॉक्टरों के मुताबिक दो सप्ताह से ज्यादा खांसी, लगातार बुखार, वजन घटना, भूख कम होना, सीने में दर्द, बलगम में खून या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

रिपोर्ट – अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर

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