पत्रकारिता की एबीसीडी किसी अच्छे स्कूल से सीख लीजिए!

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। पत्रकारिता की एबीसीडी किसी अच्छे स्कूल से सीख लीजिए। लगता है आपके संस्थान इंडिया टुडे /आजतक ने आपको यह बुनियादी बात नहीं सिखाई कि पत्रकारिता सिर्फ व्यूज़, लाइक्स और वायरल वीडियो का खेल नहीं है। खबर में जरूरी तथ्य जानबूझकर छोड़ देना भी उतना ही गंभीर सवाल खड़ा करता है जितना गलत तथ्य देना।
4 पीएम की पत्रकार शाहीन के साथ हुई घटना पर आपने एक के बाद एक कई वीडियो बनाए। शाहीन के इंटरव्यू किए। करीब 44 मिनट का डेडिकेटेड वीडियो तक बनाया। शाहीन का नाम लिया, उसकी कहानी बताई, घटना बताई, वीडियो से व्यूज़ लिए। लेकिन एक छोटी-सी जानकारी आपके गले से नहीं उतरी कि शाहीन आखिर पत्रकार किस संस्थान की है? वह 4पीएम की पत्रकार है। यह कोई मामूली या गैर-जरूरी तथ्य नहीं था। जिस पत्रकार के साथ हुई घटना आपकी पूरी स्टोरी का केंद्र थी, उसके संस्थान का नाम बताना पत्रकारिता की सामान्य और स्वाभाविक प्रक्रिया थी। दुनिया भर और देश के तमाम मीडिया संस्थानों को 4क्करू का नाम लिखने में कोई परेशानी नहीं हुई, लेकिन लल्लनटॉप को आखिर क्या परेशानी थी?

सवाल इसलिए और गंभीर है
सवाल इसलिए और गंभीर है क्योंकि यह चूक किसी एक छोटे वीडियो में नहीं हुई। आपके शाहीन पर किए गए कई वीडियो में 4PM का उल्लेख नहीं किया गया। फिर जब सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू किए, India Today Group और उसके वरिष्ठ लोगों को टैग किया जाने लगा और यह मुद्दा जोर पकडऩे लगा कि आखिर 4PM का नाम क्यों छिपाया जा रहा है, तब लल्लनटॉप के संपादक कुलदीप मिश्रा के एक बुलेटिन में कुछ सेकेंड के लिए 4PM का नाम आया। अब उसी चंद सेकेंड के उल्लेख को ढाल बनाकर आप ट्वीट कर रहे हैं कि देखिए, हमने तो 4PM का नाम लिया था।रजत जी, सवाल यह नहीं है कि पूरे संस्थान के किसी एक बुलेटिन के किसी कोने में कभी 4PM शब्द बोला गया या नहीं। सवाल आपसे है। आपके शाहीन पर बनाए गए वीडियो में 4PM का नाम क्यों नहीं था? आपके डेडिकेटेड वीडियो में क्यों नहीं था?
शाहीन की कहानी आपको चाहिए, शाहीन का इंटरव्यू आपको चाहिए, शाहीन के नाम पर व्यूज़ आपको चाहिए
शाहीन के वीडियो से engagement आपको चाहिए। लेकिन शाहीन जिस 4PM की पत्रकार है, उसका नाम लेने में परेशानी क्यों? यही सवाल है। पत्रकारिता में प्रतिस्पर्धा होती है, दुश्मनी नहीं। अगर कोई पत्रकार दूसरे संस्थान में काम करता है तो उसका संस्थान बताने से आपका कद छोटा नहीं हो जाता। उल्टा, तथ्य छिपाने से आपकी अपनी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। और जहां तक गोदी मीडिया शब्द से परेशानी की बात है, तो किसी मीडिया संस्थान की विश्वसनीयता उसके बड़े स्टूडियो, कैमरों, करोड़ों subscribers या views से तय नहीं होती। वह इस बात से तय होती है कि जब तथ्य उसके व्यावसायिक या संपादकीय हितों के अनुकूल न हों, तब भी वह उन्हें दर्शकों के सामने पूरी ईमानदारी से रखता है या नहीं। हम आपसे सिर्फ इतना चाहते हैं कि शाहीन पर बनाए गए अपने वीडियो दोबारा देखिए और सार्वजनिक रूप से बताइए कि उनमें 4PM का नाम क्यों नहीं बताया गया। और कृपया जवाब में किसी दूसरे बुलेटिन के कुछ सेकेंड मत दिखाइएगा। अपने वीडियो का जवाब अपने वीडियो से दीजिए। बाकी फैसला दर्शक करेंगे कि यह पत्रकारिता थी, संपादकीय चूक थी या जानबूझकर 4PM की पहचान को कहानी से बाहर रखने की कोशिश। और हां रजत जी, अगली बार किसी पत्रकार की कहानी पर 40-45 मिनट का वीडियो बनाने से पहले उसका नाम और वह किस संस्थान के लिए काम करती है, ये दो तथ्य जरूर जांच लीजिएगा।व्यूज़ पत्रकारिता का परिणाम हो सकते हैं। व्यूज़ पत्रकारिता का विकल्प नहीं हो सकते।
अगर आप जवाब देना चाहते हैं तो सीधा जवाब दीजिए
और एक बात और। आप अपनी पोस्ट में नफीसा का नाम तक गलत लिखकर नफीशा कर देते हैं। जिस पत्रकार की कहानी पर आप रिपोर्टिंग कर रहे हैं, कम से कम उसका नाम तो ठीक से लिखिए। पत्रकारिता की शुरुआत तथ्यों और नामों की शुद्धता से ही होती है। इस पूरे घटनाक्रम से एक गंभीर सवाल पैदा होता है। क्या 4PM का नाम न लेना महज बार-बार हुई संपादकीय चूक थी, कोई संपादकीय नीति थी, या इसके पीछे कोई और वजह थी? हम बिना प्रमाण इसे साजिश घोषित नहीं कर रहे, लेकिन लगातार एक ही जरूरी तथ्य का गायब रहना सवाल पूछने का पूरा आधार जरूर देता है। अगर कोई और कारण है तो सार्वजनिक रूप से बताइए।
85 करोड़ के बैंक फ्रॉड केस में ईडी ने किया बड़ा एक्शन
बिहार से लेकर दिल्ली-गुरुग्राम तक 9 ठिकानों पर छापेमारी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। बैंक धोखाधड़ी और कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में प्रवर्तन निदेशालय ने शुक्रवार को कई राज्यों में एक साथ बड़ी कार्रवाई शुरू की। पटना स्थित ईडी की टीम गया की रामनंदी होटल्स एंड रिसॉट्र्स लिमिटेड से जुड़े मामले में बिहार, दिल्ली और गुरुग्राम में नौ ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चला रही है। जांच में बैंकों से लिए गए करोड़ों रुपये के लोन को कथित रूप से दूसरी जगह डायवर्ट करने और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप सामने आए हैं।
वहीं कोलकाता जोनल कार्यालय की टीम एसअसरईआई समूह से जुड़े कथित लोन घोटाले मेंएआरएसएस व एएमआर समूह के परिसरों की भी तलाशी ले रही है। प्रवर्तन निदेशालय की पटना इकाई ने धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 17 के तहत बिहार के गया जिले से जुड़े बैंक फ्रॉड मामले में छापेमारी शुरू की है। कार्रवाई रामनंदी होटल्स एंड रिसॉट्र्स लिमिटेड और उससे जुड़े लोगों के परिसरों पर की जा रही है। ईडी के मुताबिक, कंपनी का नियंत्रण अखौरी गोपाल और उनके पुत्र निशांत तथा नितेश के पास था। जांच में सामने आया है कि कंपनी को विभिन्न बैंकों के कंसोर्टियम की ओर से करीब 85 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि लोन की राशि में से लगभग 58 करोड़ रुपये को निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य जगहों पर भेज दिया गया। ईडी के अनुसार यह धन कथित तौर पर फर्जी और जाली प्रोजेक्ट कंप्लीशन रिपोर्ट के आधार पर हासिल किया गया था। बताया जा रहा है कि परियोजना पूर्ण होने से संबंधित रिपोर्ट कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रस्तुत की गई थी, जिसके आधार पर ऋण वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
जांच में यह भी सामने आया है कि लोन के बदले कई संपत्तियां गिरवी रखी गई थीं। इनमें से पांच संपत्तियां टाटा मोटर्स लिमिटेड के पक्ष में मॉर्टगेज बताई गई थीं। ईडी का आरोप है कि गिरवी रखी गई इन संपत्तियों को बाद में बेच दिया गया। एजेंसी को संदेह है कि बिक्री के दौरान वास्तविक बाजार मूल्य से काफी कम कीमत दिखाई गई और दस्तावेजों में रकम को नकद प्राप्ति के रूप में दर्शाया गया। कुछ खरीदार भी जांच एजेंसी के रडार पर हैं। ईडी का मानना है कि इनमें से कुछ लोगों की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि वे करोड़ों रुपये की संपत्ति खरीद सकें। ऐसे में उन्हें बेनामी या प्रॉक्सी खरीदार होने की आशंका जताई जा रही है।
ट्रक से भिड़ी बोलेरो तीन बच्चों समेत आठ लोगों की मौत
महाराष्ट्र के भंडारा में हुई दर्दनाक घटना
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। महाराष्ट्र के भंडारा जिले में आज शुक्रवार तडक़े भयानक सडक़ हादसा हुआ। ट्रक और स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल बोलेरो के बीच जोरदार टक्कर हुई। इस हादसे में तीन बच्चों समेत आठ लोगों की मौत हो गई।
पुलिस ने बताया कि यह हादसा आज शुक्रवार, 11 सितंबर की सुबह 4 बजे लखनी तालुका में मानेगांव और पिंपलगांव के बीच हुआ। मौके पर मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने कहा, एक बोलेरो गाड़ी आइशर ट्रक से टकरा गई। हादसे में बोलेरो में सवार आठ लोगों- पांच वयस्क और तीन बच्चों की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि बोलेरो में सवार लोग छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से नेशनल हाईवे 53 के जरिए नागपुर आ रहे थे। सुबह 4 बजे करीब लखनी तालुका में मानेगांव और पिंपलगांव के बीच गाड़ी की टक्कर ट्रक से हो गई। पुलिस ने बोलेरो में सवार आठ लोगों की मौत की पुष्टि की है। इस मामले में आगे की जांच जारी है।
विस पुरकाजी में सत्ता के खिलाफ फूटा गुस्सा
मुस्लिम, मजदूर और युवा एक स्वर में बोले-27 में लेंगे हिसाब
हिंदू-मुस्लिम पर टिकी सरकार, मजदूर ठगा गया युवा का पहला वोट पेपर लीक के खिलाफ
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पुरकाजी, मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर की पुरकाजी विधानसभा में सरकार के खिलाफ जबरदस्त नाराजगी दिख रही है। मुस्लिम समाज, मजदूर वर्ग और पहली बार वोट डालने वाले युवाओं ने एक साथ मोर्चा खोल दिया है। लोगों का कहना है – वादे जुमले निकले, अब वोट की चोट से जवाब देंगे।
भाजपा राज में किसान बर्बाद और आम मुसलमान परेशान है : साजिद अली
साजिद अली ने कहा, गन्ना किसान पारंपरिक खेती छोडक़र टिंबर-पॉपुलर लगाने को मजबूर है। गन्ने का सही दाम नहीं मिल रहा। इथेनॉल से उद्योगपति कमा रहे हैं, चीनी 30-35 रुपये से 70 रुपये किलो हो गई, किसान को कुछ नहीं मिला। स्मृति ईरानी का 13 रुपये चीनी वाला वादा जुमला निकला। उन्होंने कहा, सपा सरकार में 11-12 हजार में निजी नलकूप कनेक्शन लगता था, अब 60-70 हजार लगते हैं, बिना रिश्वत कोई काम नहीं। खाद के कट्टे से 5 किलो खाद कम कर दी, दाम बढ़ा दिया। आय दोगुनी करने की बात झूठी निकली। आरोप लगाते हुए कहा, मुस्लिम अगर चौराहे से वाहन लेकर गुजरता है तो बार-बार चेकिंग कर परेशान किया जाता है। अधिकारी की मानसिकता मुसलमान को परेशान करने की रहती है। अंत में कहा, यह सरकार हिंदू-मुस्लिम पर चल रही है। अब मोहभंग हो चुका है, जनता जाग रही है। इस बार सपा सरकार तय है।
मेरा पहला वोट पेपर लीक के खिलाफ : हाशिम
हाईस्कूल छात्र हाशिम ने कहा कि उसका पहला वोट बेरोजगारी और पेपर लीक के खिलाफ होगा। हाशिम ने कहा, मेरी उम्र 18 साल है, पहली बार वोट डालूंगा। जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन में लाठीचार्ज हुआ, किसी की आंख फूट गई, कई घायल हुए। साल भर तैयारी करो और पेपर लीक हो जाए, यह छात्रों की मनोदशा पर सबसे बड़ा प्रहार है। हमें सिर्फ पारदर्शी परीक्षा और नौकरी चाहिए। सरकार 2 करोड़ रोजगार का जुमला देकर आई थी, जो आज तक पूरा नहीं हुआ। किसी नौजवान को यह सरकार समझ नहीं आई। मेरा पहला वोट पेपर लीक के खिलाफ होगा।
खेती-मजदूरी खत्म, देंगे करारा जवाब : उस्मान
मजदूर उस्मान ने कहा, हम मजदूर हैं और खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। सरकार वादा कुछ करती है, देती कुछ है। रोजगार खत्म, खेती-किसानी खत्म, मजदूर-गरीब बर्बाद हो गया। इस सरकार को हम करारा जवाब देंगे। सपा सरकार में 11 हजार का नलकूप कनेक्शन, भाजपा में 7० हजार, मुस्लिम देखकर रोकते हैं।
नफरत फैलाने वालों को मिली है सरकारी छूट : कयूम अंसारी
पुरकाजी निवासी कयूम अंसारी ने सरकार पर मुसलमानों को टारगेट करने का आरोप लगाया। अंसारी ने कहा, यह सरकार सिर्फ हिंदू-मुस्लिम पर टिकी है। मुसलमान को हर विभाग में परेशान किया जा रहा है, बिना रिश्वत कोई काम नहीं होता। नफरत फैलाने वाले धर्म के ठेकेदारों को सरकार का संरक्षण है, उनकी FIR तक नहीं लिखी जाती। वहीं मुस्लिम आवाज उठाए तो तुरंत FIR, ताकि हिंदू वोट एकजुट हो जाए। उन्होंने कहा, हमें बीजेपी से नहीं, उसकी नीतियों से नफरत है। आधार-पैन से सबको जोड़ दिया पर नागरिकता साबित नहीं होती। चीनी 7० रुपये किलो और गन्ना 4०० रुपये क्विंटल, बाकी पैसा किसकी जेब में जा रहा है? 2027 में 36 बिरादरी और सेक्युलर हिंदू मिलकर जवाब देंगे।
पुरकाज़ी विस एक नजर
पुरकाज़ी विधानसभा क्षेत्र भारत के उत्तर प्रदेश विधानसभा के 4०3 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है । यह मुजफ्फरनगर जिले का हिस्सा है और बिजनौर लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है । इस विधानसभा क्षेत्र में पहला चुनाव 12 में संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन आदेश, 2००8 के पारित होने के बाद हुआ था और यह निर्वाचन क्षेत्र 2008 में अस्तित्व में आया था। पुरकाजी विधानसभा क्षेत्र का विस्तार मुजफ्फरनगर, शेरपुर, छपार, बागोवाली , सिसोना, बढेड़ी, बिजोपरा, खुड्डा, खामपुर, बरला और मुजफ्फरनगर तहसील की पुरकाजी नगर पंचायत है।
विधान सभा के सदस्य
पुरकाजी विधानसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण और अनुसूचित जाति (एसी) के लिए आरक्षित विधानसभा सीट है। यह बिजनौर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। 2०22 के विधानसभा चुनाव में आरएलडी उम्मीदवार अनिल कुमार ने जीत दर्ज की थी, उन्होंने भाजपा के प्रमोद उटवाल को हराया था। वर्तमान में अनिल कुमार उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं। 17 के चुनाव में भाजपा के प्रमोद उटवाल यहाँ से विधायक चुने गए थे, जबकि 12 में इस सीट से बीएसपी के टिकट पर अनिल कुमार जीते थे।



