Badaun: जरीफनगर थाने से जुड़ा चौंकाने वाला मामला, मोबाइल चोरी की FIR में पुलिसकर्मी भी आरोपी

पुलिस के मुताबिक मामले की जांच शुरू कर दी गई है और एफआईआर में लगाए गए आरोपों की पड़ताल की जा रही है। पुलिसकर्मी पर आरोप है कि वह कथित तौर पर थाने से जुड़ी गोपनीय पुलिस जानकारी बाहरी लोगों तक उपलब्ध कराता था।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बदायूं जिले के जरीफनगर थाना क्षेत्र में मोबाइल चोरी के मामलों से जुड़ी एक एफआईआर के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। मामले में जरीफनगर थाने में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में तैनात बताए जा रहे जावेद का नाम भी आरोपी के तौर पर सामने आया है। एफआईआर में जावेद समेत प्रेमपाल उर्फ बंटी और रंजीत को आरोपी बनाया गया है।

पुलिस के मुताबिक मामले की जांच शुरू कर दी गई है और एफआईआर में लगाए गए आरोपों की पड़ताल की जा रही है। पुलिसकर्मी पर आरोप है कि वह कथित तौर पर थाने से जुड़ी गोपनीय पुलिस जानकारी बाहरी लोगों तक उपलब्ध कराता था। आरोपों में यह भी कहा गया है कि चोरी हुए मोबाइल फोन से संबंधित जानकारी के आधार पर आरोपियों को मदद पहुंचाई जाती थी। हालांकि, एफआईआर में नाम सामने आना आरोप साबित होना नहीं है। मामले में पुलिस जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

मोबाइल चोरी के मामलों से जुड़ा है मामला

जानकारी के मुताबिक जरीफनगर थाना क्षेत्र में मोबाइल चोरी से संबंधित मामलों की जांच के दौरान पुलिस के सामने कुछ ऐसे तथ्य आए, जिनके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई। इसी एफआईआर में थाने में कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर तैनात जावेद का नाम भी आरोपी के रूप में दर्ज किया गया है।

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि चोरी हुए मोबाइल फोन और उनसे संबंधित पुलिस रिकॉर्ड या जानकारी का कथित तौर पर गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि पुलिस से जुड़ी गोपनीय जानकारी आरोपियों तक पहुंचने से उन्हें चोरी के मोबाइलों से जुड़े मामलों में मदद मिल सकती थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित जानकारी किस माध्यम से आरोपियों तक पहुंची और इसमें नामजद लोगों की क्या भूमिका रही।

थाने की गोपनीय जानकारी बाहर पहुंचाने का आरोप

मामले का सबसे गंभीर पहलू पुलिस थाने की गोपनीय जानकारी से जुड़ा आरोप है। एफआईआर के मुताबिक जावेद पर कथित तौर पर पुलिस से संबंधित संवेदनशील जानकारी उपलब्ध कराने का आरोप लगाया गया है।

पुलिस विभाग में दर्ज सूचनाओं और जांच से संबंधित जानकारियों की गोपनीयता महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में यदि जांच के दौरान आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल मोबाइल चोरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पुलिस की आंतरिक कार्यप्रणाली और गोपनीयता से भी जुड़ जाएगा। फिलहाल पुलिस की ओर से पूरे मामले की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।

प्रेमपाल उर्फ बंटी और रंजीत समेत तीन आरोपी

मामले में प्रेमपाल उर्फ बंटी, रंजीत और जावेद को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर सभी आरोपों की जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि मोबाइल चोरी की घटनाओं में नामजद आरोपियों की क्या भूमिका थी और पुलिसकर्मी पर लगाए गए आरोपों का इन घटनाओं से क्या संबंध है।

इसके साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि यदि पुलिस की किसी आंतरिक जानकारी का इस्तेमाल हुआ, तो वह जानकारी किस स्तर से और किस तरीके से बाहर पहुंची।

पुलिस ने शुरू की जांच

जरीफनगर पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मामले से जुड़े सभी तथ्यों और साक्ष्यों की जांच की जाएगी।

जांच में एफआईआर में लगाए गए आरोपों के अलावा मोबाइल चोरी से संबंधित घटनाओं, आरोपियों के बीच संभावित संपर्क और पुलिस रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारियों की भी पड़ताल की जा सकती है। पुलिस की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

दोषी पाए जाने पर होगी कार्रवाई

पुलिस की ओर से स्पष्ट किया गया है कि थाने की गोपनीयता भंग करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। विभागीय स्तर पर भी मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जा सकती है। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी पुलिसकर्मी की भूमिका जांच में सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर

फिलहाल यह मामला एफआईआर में लगाए गए आरोपों और पुलिस जांच के स्तर पर है। जावेद समेत अन्य नामजद आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

मोबाइल चोरी के मामलों से शुरू हुई यह जांच अब पुलिस थाने की गोपनीय जानकारी के कथित इस्तेमाल तक पहुंच गई है। ऐसे में पुलिस के सामने न सिर्फ चोरी के मामलों की तह तक पहुंचने की चुनौती है, बल्कि यह पता लगाने की जिम्मेदारी भी है कि आखिर पुलिस से जुड़ी संवेदनशील जानकारी कथित तौर पर बाहर कैसे पहुंची। जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही मामले में आगे की कानूनी और विभागीय कार्रवाई तय होगी।

रिपोर्ट:- संतुलित पाठक,बदायूं

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