विमल इलायची का विज्ञापन कर फंस गये शाहरूख, अजय, टाइगर
दिल्ली हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत, चलेगा मुकदमा

- इलायची के बहाने जुबां केसरी का खेल नहीं चलेगा
- विसिल ब्लोअर संजय शर्मा ने नॉक किया था मुद्दा
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। जोर का झटका हाय धीरे से लगा, जी हां इलायची के नाम पर जुंबा केसरी का झोल देकर पान मसाले का रास्ता बताने वाले बालीवुड के तीन कलाकार बाजीगर शाहरूख खान, सिंघम अजय देवगन और टाइगर यानी कि टाइगर श्रॉफ फंस गये हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने विमल इलायची के सेरोगेट विज्ञापन पर राहत देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने शो कॉज नोटिस पर दायर याचिका पर सनुवाई से इंकार कर तीखी टिप्पणी भी की है।
यह याचिका पीबी एग्रो एलएलपी ने दाखिल की थी और महाराष्ट्र खाद्य एंव औषधि प्रशासन ने चमकते सितारों को नोटिस जारी किया था। शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ तीन बड़े नाम करोड़ों की फैन फॉलोइंग विज्ञापन बाजार में जबरदस्त कीमत और चेहरे पर भरोसा। यही वजह है कि जब यह तीनों जब किसी प्रोडक्ट को कैमरे के सामने पेश करते हैं तो वह सिर्फ प्रोडक्ट नहीं रहता वह एक संदेश बन जाता है। अब उसी संदेश पर महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने गंभीर सवाल उठाये हैं और तीनों को नोटिस जारी किया है। इन पर आरोप है कि विमल इलायची का विज्ञापन अपने ब्रांड नाम प्रस्तुति और पहचान के जरिए उस विमल पान मसाला ब्रांड का अप्रत्यक्ष प्रचार कर सकता है जिस पर महाराष्ट्र में प्रतिबंध है।
महाराष्ट्र की अदालत उपयुक्त मंच है
दिल्ली हाईकोर्ट ने 14 सितंबर को पीबी एग्रो एलएलपी की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें महाराष्ट्र एफडीए द्वारा शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को जारी शो कॉज नोटिस को चुनौती दी गयी थी। अदालत ने साफ कह दिया है कि केवल कंपनी का दिल्ली से कारोबार करना या संबंधित पक्षों का दिल्ली में होना इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का क्षेत्राधिकार तय नहीं करता। कार्रवाई महाराष्ट्र के नियामक ने की है और विवाद का केंद्र महाराष्ट्र है इसलिए महाराष्ट्र की अदालत अधिक उपयुक्त मंच है। इस फैसले से शाहरूख, अजय और टाइगर को झटका लगा है क्योंकि सवालों के जवाब देने से बचने का जो रास्ता उन्होंने अख्तियार किया था वह बंद हो गया। अब वह सवाल वहीं खड़े हैं जहां से निकले थे यानि कि महाराष्ट्र में।
दिल्ली से महाराष्ट्र तक
पीबी एग्रो एलएलपी ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा इसलिए खटखटाया था क्योंकि वह महाराष्ट्र एफडीए के नोटिस को चुनौती देना चाहता था। कंपनी की दलील थी कि संबंधित केंद्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था और उसका मुख्यालय दिल्ली में है और इसलिए दिल्ली हाईकोर्ट इस मामले को सुन सकता है। लेकिन न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि सिर्फ कंपनी का दिल्ली में कारोबार होना या ब्रांड एंबेसडरों का दिल्ली में होना क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र तय करने के लिए पर्याप्त नहीं है। कार्रवाई महाराष्ट्र एफडीए की है और उसका मूल कारण भी महाराष्ट्र में है। इसलिए महाराष्ट्र की अदालत इस विवाद के लिए अधिक उपयुक्त मंच है।
शाहरूख-अजय-टाइगर जवाब दो
क्या करोड़ों रुपये की फीस लेकर किसी ब्रांड का चेहरा बन जाना उस चेहरे की सामाजिक जिम्मेदारी को खत्म कर देता है? क्या सेलिब्रिटी सिर्फ कैमरे के सामने संवाद बोलने वाला व्यक्ति है या उसके पास उस उत्पाद की छवि और उसके संभावित असर की जांच करने की भी कोई नैतिक जिम्मेदारी है? और सबसे बड़ा सवाल कि अगर किसी उत्पाद का विज्ञापन तकनीकी रूप से इलायची का हो लेकिन ब्रांड की पहचान उपभोक्ता के दिमाग में किसी दूसरे प्रतिबंधित उत्पाद से जुड़ी हो तो क्या सिर्फ पैकेट पर इलायची भर लिख देने से कहानी बदल जाती है? इस झोल को तकनीकी भाषा में सरोगेट विज्ञापन कहा जाता है। और यहीं से विमल इलायची की कहानी एक साधारण विज्ञापन विवाद से निकलकर पैसा, स्टारडम, ब्रांड और सार्वजनिक स्वास्थ्य के टकराव की कहानी बन जाती है।
मामूली नहीं हैं सवाल
11 अगस्त को जारी नौ पन्नों के नोटिस में एफडीए ने कहा है कि विज्ञापन में इस्तेमाल विमल नाम और उसकी प्रस्तुति उपभोक्ता के मन में पान मसाला ब्रांड से संबंध पैदा कर सकती है। तीनों अभिनेताओं से उनकी भूमिका स्पष्ट करने प्रचार अभियान से हटने और संबंधित प्रचार सामग्री हटाने को कहा गया था। विमल मामले में एफडीए का मूल सवाल यही है कि विज्ञापन में इलायची है लेकिन नाम वही विमल है, चेहरे वही शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ वाले हैं और जिस ब्रांड पहचान से उपभोक्ता पहले से परिचित है उसके साथ पान मसाला भी जुड़ा हुआ है। महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के तहत तंबाकू या निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला पर प्रतिबंध है जोकि 13 जुलाई 2026 से वर्तमान प्रतिबंध आदेश तक प्रभावी है। इसलिए मामला सिर्फ यह नहीं है कि विज्ञापन में पान मसाला का पैकेट दिखा या नहीं दिखा। मामला यह है कि क्या एक ऐसे ब्रांड की चमक को बनाए रखने के लिए दूसरे उत्पाद का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसकी पहचान प्रतिबंधित उत्पाद से गहराई से जुड़ी है?
कंपनी का दागदार इतिहास बेपरवाह वर्तमान
2018 में भी विमल इलायची को लेकर अप्रत्यक्ष तंबाकू विज्ञापन के आरोपों पर डीजीएचएस की कार्रवाई सामने आयी थी। बाद में उस विवाद में कानूनी लड़ाई चली और जनवरी 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट ने डीजीएचएस की अपीलें खारिज की थीं। उस मामले में अदालत ने तंबाकू रहित पान मसाला के कारोबार के संवैधानिक अधिकार का भी उल्लेख किया था। इसलिए मौजूदा विवाद को बिल्कुल शून्य से शुरू हुई कहानी कहना भी गलत होगा।




