बहन का नाम हटने पर बिफरे सिब्बल

  • कहा- चुनाव आयोग पीएम को बता रहा है एसआईआर में नाम हटा या बढ़ा रहा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सीनियर एडवोकेट और नेता कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे एसआईआर की आलोचना की है। सिब्बल ने कहा कि उनकी बहन का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था। सिब्बल ने कहा कि इसी तरह, जजों और विदेशी राजनयिकों के नाम भी हटाए गए लोगों की लिस्ट में पाए गए हैं। केरल के कोच्चि में ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन की ओर से शनिवार को आयोजित हॉर्स-ट्रेडिंग और लोकतंत्र पर कार्यक्रम में कपिल सिब्बल सवालों के जवाब दे रहे थे।
उन्होंने बताया कि बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं, लेकिन बहुत कम लोगों ने ही अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए फॉर्म भरा है, क्योंकि उन्हें डर है कि उन्हें परेशान किया जाएगा। बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं, लेकिन बहुत कम लोगों ने ही अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए फॉर्म भरा है, क्योंकि उन्हें डर है कि उन्हें परेशान किया जाएगा। सिब्बल ने कहा- हमें जमीनी हकीकत पता है। हमें पता है कि बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं। यह पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के अपने तौर-तरीकों के खिलाफ है। 195० के बाद से कभी किसी को फॉर्म भरने की जरूरत नहीं पड़ी थी। अब एक स्कूल टीचर, जो बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) होता है, वोटर लिस्ट में किसी के नाम के आगे डी यानी डाउटफुल (संदिग्ध) लिख देता है, और वह वोटर वोट नहीं डाल पाता।

फॉर्म भरने की हिम्मत नहीं जुटा पाते लोग

सिब्बल ने आगे कहा कि एसआईआर किसी को संदिग्ध वोटर बताना न तो किसी आधार पर होता है और न ही वोटर को यह बताया जाता है कि उसे संदिग्ध वोटर क्यों माना गया है। उन्होंने कहा-विदेश सेवा में काम करने वाले लोग भी संदिग्ध वोटर की श्रेणी में हैं, ऐसे जज हैं जिनके नाम लिस्ट में नहीं हैं, आम लोग हैं, सेना के जवान हैं और मेरी अपनी बहन का नाम भी लिस्ट में नहीं है। ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके नाम लिस्ट में नहीं हैं। अब उन्हें फॉर्म भरना होगा। भारत में जिस तरह की सामाजिक असमानता है, लोग फॉर्म भरने की हिम्मत नहीं जुटा पाते क्योंकि उन्हें डर होता है कि उन्हें परेशान किया जाएगा। सिब्बल ने कहा-कई मामलों में, खास समुदायों के लोगों के नाम बड़े पैमाने पर हटा दिए जाते हैं, तो ऐसे में वे कहां जाएं? इस समस्या को सुलझाने के लिए कोई तेज प्रक्रिया नहीं है। हर कोई सुप्रीम कोर्ट आकर यह नहीं कह सकता कि हमारे मामले का फैसला करें, उनके पास इसके लिए जरूरी साधन नहीं हैं।

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