अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में लेने पर बवाल
कांग्रेस ने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया

- नेता प्रतिपक्ष राहुल व प्रियंका गांधी ने दिया समर्थन, इंडिया गेट पर मिलने पहुंचे
- भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने का भी विरोध
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की गुहार लगा रहे उनके माता-पिता को दिल्ली में हिरासत में लिए जाने के बाद राजनीति गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने इंडिया गेट पहुंचकर अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की तथा न्याय की उनकी मांग के प्रति समर्थन जताया।
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित रूप से जुड़े एक ‘वीआईपी’ की भूमिका को लेकर सवाल उठाते रहे पीडि़ता के माता-पिता ने दिल्ली में इंडिया गेट पर धरना दिया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने का विरोध किया है। उनका दावा है कि इस पूरे प्रकरण में जिस वीआईपी की बात सामने आई थी, वह गौतम जी हैं।
अंकिता की हत्या के समय गौतम भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी थे
सितंबर, 2022 में अंकिता की हत्या के समय गौतम भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी थे। राहुल और प्रियंका बुधवार देर शाम करीब साढ़े सात बजे इंडिया गेट पहुंचे और अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की। उन्होंने न्याय की लड़ाई में पूरे सहयोग का भरोसा दिया। इस मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि चार साल बीतने के बावजूद परिवार को न्याय नहीं मिला है।
कायरता और संवेदनहीनता की पराकाष्ठा : खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस घटना को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और इसे मोदी सरकार की कायरता और संवेदनहीनता की पराकाष्ठा करार दिया। खरगे का यह बयान उस समय आया जब अंकिता के माता-पिता सिक्किम के नए राज्यपाल के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति के विरोध में इंडिया गेट के पास शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। खरगे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में यह भी कहा कि न्याय की गुहार लगाने वाले अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में लिया गया, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े एक ‘वीआईपी’ को राज्यपाल का पद दिया गया। कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि यह ‘‘दमन’’ सरकार की ताकत नहीं, बल्कि सवालों से भागने का प्रमाण है। खरगे ने कहा, ‘‘एक बेटी को खो चुके माता-पिता के साथ ऐसा व्यवहार अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय है।’’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी।
चार साल से भंडारी परिवार को न्याय नहीं मिला, आरोपी को पद मिला : राहुल
नेता प्रतिपक्ष राहु गांधी ने ‘एक्स’ पर हिंदी में एक पोस्ट में भाजपा पर निशाना साधते हुए लिखा कि चार साल से भंडारी परिवार को न्याय नहीं मिला, लेकिन एक वीआईपी आरोपी को संरक्षण और संवैधानिक पद का इनाम जरूर मिल गया। उन्होंने कहा, जहां बलात्कारियों और हत्यारों का फूल-मालाओं से स्वागत होता है और अपराधियों को सत्ता की ताकत से नवाजा जाता है – उस महिला-विरोधी भाजपा से कोई उम्मीद की भी नहीं जा सकती। उन्होंने कहा, ‘‘आज अंकिता के माता-पिता अपनी बच्ची के लिए न्याय की गुहार लेकर अपने घर से मीलों दूर इंडिया गेट पर बैठे हैं। मैं और कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़े हैं, उनके दुख में भी और इंसाफ की इस लड़ाई में भी।’’ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने इससे पहले अगस्त में भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की थी और कहा था कि चार साल बीत चुके हैं और वे अब भी अपनी बेटी के साथ हुए अक्षम्य अपराध के लिए न्याय का इंतजार कर रहे हैं। उधर, कांग्रेस ने एक पोस्ट में दावा किया है कि वर्ष 2022 के अंकिता भंडारी हत्याकांड के सिलसिले में भाजपा के तत्कालीन उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम पर आरोप लगे थे। पार्टी ने गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्र सरकार पर उन्हें बचाने का आरोप लगाया है।

महिला पत्रकारों पर हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली में हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों पर कथित हमलों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। इस मामले में मंगलवार को सीजेआई सूर्यकांत की बेंच में हुई सुनवाई में दिल्ली पुलिस को तलब किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीर बताते हुए संकेत दिया है कि वह विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की तरफ महिला पत्रकारों पर किए गए हमले के आरोपों की सुनवाई और जांच के लिए एक समिति का गठन करेगा। दिल्ली पुलिस के सीनियर अधिकारी को सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने के लिए कहा गया है बता दें कि विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों से मारपीट के आरोप लगे थे।
दीपके-सौरव व आशुतोष पर एससी-एसटी एक्ट में केस
- एफआईआर में आरोप- एसीपी के लिए अपमानजनक और जातिसूचक शब्दों का किया गया इस्तेमाल
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली पुलिस ने बुधवार को पार्टी के इन नेताओं और कुछ स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। एफआईआर में स्वतंत्र पत्रकार रोजी और गजेंद्र सिंह के साथ ही सीजेपी के अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह को नामजद किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के कनॉट प्लेस सब-डिवीजन के एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर में आरोप है कि एसीपी के लिए अपमानजनक और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, ये आरोप हैं और मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस की जांच के आधार पर होगी। इस बीच, आशुतोष रांका और सौरव दास को जंतर-मंतर में प्रतिबंध के बावजूद प्रवेश करने और सुरक्षा घेरा तोडऩे के मामले में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। दोनों को तिहाड़ जेल ले जाया गया है।
गिरफ्तारी के विरोध में 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च
सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में सीजेपी ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च निकालने का ऐलान किया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसकी जानकारी दी।
नेहा बोरा के बांग्लादेश ने रास्ता दिखाया बयान पर घमासान
- भाजपा बोली- राहुल गांधी का मकसद रिजिम चेंज करना
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। बीजेपी की ओर से राहुल गांधी की पोस्टर गर्ल कही जा रहीं आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा के एक बयान को लेकर नया सियासी बवाल खड़ा हो गया है। बीजेपी ने बांग्लादेश के जेनजी आंदोलन पर नेहा के बयान को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। दरअसल नेहा बोरा के एक इंटरव्यू का वीडियो सामने आया है, जिसमें वह कह रही हैं कि बांग्लादेश में हुए जेनजी आंदोलन ने भारत के नौजवानों को भी रास्ता दिखाया है। नेहा ने बांग्लादेश के आंदोलन को लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकार से जोड़ते हुए कहा कि आज भारत में भी यही मुद्दे सामने हैं।
इसी बयान के आधार पर बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनका पूरापॉलिटिकल इको सिस्टम राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि भारत में रिजिम चेंज चाहता है। वायरल वीडियो में नेहा बोरा बांग्लादेश में हुए जेनजेड आंदोलन का जिक्र करती नजर आ रही हैं. नेहा कहती हैं, हम सब जानते हैं कि जो जेन जेड मूवमेंट आपको देश में दिखाई दे रहा है, वो पहले बांग्लादेश में शुरू हुआ था। मैं उन्हें बधाई देती हूं कि आपने हमें रास्ता और हमारे देश के नौजवानों को रास्ता दिखाया है.नेहा बोरा आगे बांग्लादेश के आंदोलन को लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकार से जोड़ती हैं. उनका कहना है कि बांग्लादेश में आंदोलन इन्हीं मुद्दों को लेकर शुरू हुआ था और आज भारत में भी ऐसी ही बातें सामने आ रही है।
निर्वाचन आयोग को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
- सुप्रीम कोर्ट बोला- कोई भी न्यायपालिका को धौंस नहीं दिखा सकता
- राहुल के धरने का उल्लेख होने पर सीजेआई की टिप्पणी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को निर्वाचन आयोग और अन्य को एक नोटिस जारी किया है। यह नोटिस लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं द्वारा दायर एक याचिका पर दिया गया है, जिसमें चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने इस याचिका पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी से जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान राहुल गांधी और अन्य नेताओं के कथित एसआईआर अनियमितताओं के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का जिक्र होने पर सीजेआई ने कहा, कोई भी न्यायपालिका को दबाव में नहीं डाल सकता। वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत में राजनीतिक जुलूस और उसके घटनाक्रम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि करीब 200 वकीलों ने इस तरह के दबाव बनाने के प्रयास पर चिंता जताते हुए ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ऐसी घटनाओं से अनजान नहीं है और वह एकांतवास में नहीं है, हमें पता है कि बाहर क्या हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कमजोर प्रयासों पर कोई ध्यान नहीं देता, जबकि अदालत बाहर दिए जा रहे बयानों से भी अवगत है। ?
पुलिस कमिश्नर ने सुप्रीम कोर्ट में रखी अपनी बात
10 अक्टूबर को इजाजत देते तो दिल्ली में 20 जुलाई से बुरे हालात होते… दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर कॉकरोज जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी गई? उन्होंने कहा कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर हुई हिंसा, अभिजीत दीपके और सौरभ दास समेत अन्य सीजेपी नेता अपने समर्थकों को नियंत्रित करने में विफलता और 6 से 8 अक्टूबर के लगातार प्रदर्शनों के कारण मध्य दिल्ली में पैदा हुई गंभीर यातायात समस्या को देखते हुए अनुमति देने से इनकार किया गया था। ऐसी आशंका थी कि अगर 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन की इजाजत दे देते, तो हालात 20 जुलाई से भी खराब हो सकते थे। पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने कहा कि राष्ट्रपति भवन, संसद, सुप्रीम कोर्ट, विभिन्न दूतावासों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों की मौजूदगी के कारण मध्य दिल्ली अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है. यहां सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम करने पड़ते हैं और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है।
अदालत के सामने हर आवाज कीमती
एसआई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में हो रहे विरोध प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर भी टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इस अदालत के सामने हर आवाज कीमती है और सबकी बात सुनी जाएगी। इसके साथ ही अदालत ने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की तय जगह के रूप में हटाए जाने (डी-नोटिफिकेशन) को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता के आचरण पर कोर्ट ने जताई आपत्ति
कोर्ट ने 13 याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। इन याचिकाकर्ताओं ने उस तरीके को चुनौती दी है, जिससे आयोग मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कर रहा है। विपक्षी नेताओं की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए, सीजेआई ने कहा, हम याचिकाकर्ताओं में से एक से उसके आचरण के बारे में पूछना चाहेंगे।



