नवमी के दिन व्रत पारण में न करें जल्दबाजी, जानिए सही समय
शारदीय नवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: शारदीय नवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त माता रानी की कृपा पाने के लिए पूरे नौ दिनों तक व्रत रखते हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।
नवरात्रि के दौरान मंदिरों से लेकर घरों तक भक्तिमय माहौल बना रहता है। हर तरफ मां दुर्गा के जयकारे सुनाई देते हैं। इन नौ दिनों में भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार उपवास, पूजा-पाठ, मंत्र जाप और साधना करते हैं।
नवरात्रि के नौ दिनों की पूजा और साधना पूरी होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल होता है कि व्रत का पारण कब करना चाहिए? व्रत खोलने का सही समय क्या है? क्या नवमी तिथि पर ही व्रत खोलना चाहिए या दशमी के दिन पारण करना उचित होता है? इसके अलावा व्रत खोलते समय किन नियमों का ध्यान रखना चाहिए?
अगर आप भी शारदीय नवरात्रि का व्रत रखते हैं, तो आइए सरल शब्दों में जानते हैं व्रत पारण का महत्व, सही समय, पूजा की विधि और इससे जुड़े जरूरी नियम।
शारदीय नवरात्रि 2026 में व्रत पारण की सही तारीख और समय
शारदीय नवरात्रि का समापन 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को विजयादशमी के दिन होगा.द्रिक पंचांग के अनुसार, नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे समाप्त होगी. नवरात्रि व्रत का पारण 20 अक्टूबर को किया जाएगा. यदि आप नवमी तिथि पर व्रत खोलते हैं, तो 19 अक्टूबर की सुबह 10:51 बजे से 20 अक्टूबर की दोपहर 12:50 बजे के बीच कभी भी पारण कर सकते हैं. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस दिन नवरात्रि पारण और दुर्गा विसर्जन का विधान है.
व्रत पारण की विधि
सुबह का स्नान और साफ कपड़े पहनें
पारण वाले दिनसुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें. इसके बाद घर के मंदिर में दीपक जलाकर माता रानी की धूप, अक्षत, रोली और पुष्प अर्पित कर अंतिम दिन की विधिवत पूजा करें.
हवन और सात्विक भोग
यदि आपके घर पर नवमी या पारण के दिन हवन करने की परंपरा है, तो पवित्रता के साथ कपूर और आम की लकड़ी जलाकर दुर्गा सप्तशती के मंत्रों के साथ सात्विक हवन संपन्न करें. इसके बाद माता रानी को हलवा, पूरी और काले चने का सात्विक भोग लगाएं.
कन्या पूजन
शास्त्रों के अनुसार, व्रत का पारण करने से पहले कन्या पूजन करना बहुच आवश्यक माना जाता है. इसके बिना नवरात्रि की पूजा और व्रत अधूरा माना जाता है. कई लोग पूरे नौ दिन का व्रत रखते हैं. वे नवमी के दिन सुबह महानवमी की पूजा, हवन और फिर कन्या पूजन करने के बाद ही अपना व्रत खोलते हैं.
इसलिए 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को अपने घर पर आदरपूर्वक आमंत्रित करें. सबसे पहले उनके चरण धोएं, उन्हें अपने हाथों से कुमकुम का तिलक लगाएं और फिर श्रद्धापूर्वक हलवा-पुरी और चने का भोजन कराएं.
संकल्प छोड़कर पारण करना
कन्या पूजन संपन्न होने के बाद अपने हाथ में थोड़ा सा शुद्ध जल लें. अब भगवान विष्णु और मां दुर्गा का स्मरण करें, अपना नाम और गोत्र बोलें और मन में संकल्प लें कि मैंने जो नवरात्रि का व्रत किया है, उसका पूरा फल मुझे मिले, मैं अब इसका पारण कर रहा/रही हूं. इसके बाद उस जल को पृथ्वी पर छोड़ने के बजाय स्वयं आचमन की तरह ग्रहण कर लें.
सात्विक भोजन से खोलें व्रत
इन सभी धार्मिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद, अंत में माता रानी के चरणों में अर्पित किए गए प्रसाद (जैसे हलवा, पूरी या चना) अथवा घर के मंदिर के चरणामृत को ग्रहण करके अपने व्रत को खोलें. याद रखें कि पारण का पहला भोजन पूरी तरह सात्विक होना चाहिए, जिसमें किसी भी प्रकार के तामसिक पदार्थों (जैसे लहसुन-प्याज) का प्रयोग बिल्कुल न किया गया हो.



