दो करोड़ की घूस! चुनाव आयोग के मुखिया पर केरल से उठा भ्रष्टाचार का पुराना तूफान

  • इससे पूर्व में भी कई बार हो चुकी इस प्रकरण की जांच मिल चुकी है क्लीन चिट
  • इस बार मामला गंभीर एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं शिकायतकर्ता

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। 17 करोड़ के भुगतान पर अड़ंगा, दो करोड़ की मांग और फिर मलेशियाई इंजीनियर की रहस्यमयी मौत… करीब दो दशक पुरानी कहानी अब फिर जांच के घेरे में है। जिस मामले की फाइल कभी बंद हो चुकी थी। अब उस पर केरल सरकार ने दोबारा नजर डालने का फैसला किया है। सवाल सिर्फ एक पुराने आरोप का नहीं बल्कि उस रहस्य का भी जो एक अबूझ पहली बन चुका है। कहानी करीब बीस साल पुरानी है लेकिन इसके किरदार और सवाल आज भी उतने ही अहम हैं। केरल में लोक निर्माण विभाग के सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे ज्ञानेश कुमार उस समय एक सड़क परियोजना से जुड़े थे।
आज वही ज्ञानेश कुमार देश के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। अब उनके पुराने कार्यकाल से जुड़ा रिश्वत मांगने का आरोप एक बार फिर सरकारी जांच के दरवाजे तक पहुंच गया है। मामला केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट यानी केएसटीपी का है। विश्व बैंक की सहायता से चल रही इस परियोजना में भारत और मलेशिया की संयुक्त कंपनी पीएटीआईबेल को सड़क निर्माण का काम मिला था। आरोप है कि परियोजना के तहत काम पूरा होने के बावजूद कंपनी के करीब 17 करोड़ रुपये के भुगतान से जुड़े बिल और चेक अटके हुए थे। इसी बीच कहानी में प्रवेश होता है मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन का। वह इस परियोजना के मुख्य प्रबंधकों में शामिल थे। कंपनी के लिए काम करने वाले स्थानीय ठेकेदार साजन वी.ओ. का दावा है कि ली ने उन्हें बताया था कि भुगतान जारी कराने के बदले तत्कालीन पीडब्ल्यूडी सचिव ज्ञानेश कुमार ने दो करोड़ रुपये की मांग की थी। कंपनी रिश्वत देने को तैयार नहीं थी और भुगतान का संकट लगातार गहराता जा रहा था। साजन के मुताबिक बकाया भुगतान न मिलने से स्थानीय ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को पैसे देना मुश्किल हो गया था। परियोजना पर आर्थिक दबाव बढ़ता गया। उनका दावा है कि ली ने इस परेशानी के बारे में उनसे बातचीत की थी। बाद में ली की मलेशिया में आत्महत्या की खबर सामने आई। साजन का कहना है कि ली के परिवार ने कंपनी के कर्मचारियों को बताया था कि उनके पीछे छोड़े गए सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का भी उल्लेख था।

विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो को जांच की जिम्मेदारी

केरल के गृह मंत्री ने अब इस शिकायत पर विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो को प्रारंभिक जांच की अनुमति दे दी है। यानी करीब दो दशक पुराने आरोपों की परतें फिर से खंगाली जाएंगी। हालांकि यह अभी प्रारंभिक जांच है किसी आरोप की पुष्टि या दोषसिद्धि नहीं।

इतने पुराने मामले की फाइल दोबारा क्यों हिली?

दरअसल अक्टूबर 2026 में कांग्रेस नेता मलयंकुझु वेणुगोपाल ने केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला को शिकायत देकर इस प्रकरण की जांच पर सवाल उठाए थे। शिकायत में दावा किया गया कि 2006 में हुई विजिलेंस जांच बाहरी दबाव के कारण प्रभावित हुई थी और इंजीनियर के सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का नाम होने की बात भी उठाई गई थी। इसके बाद 23 अक्टूबर को ठेकेदार साजन ने भी गृह मंत्री को अलग शिकायत सौंपी। उन्होंने दो करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप दोहराया और जांच एजेंसी के सामने साक्ष्य उपलब्ध कराने की पेशकश की। उन्होंने यहां तक कहा कि जरूरत पडऩे पर ली के परिवार के सदस्यों को भी जांचकर्ताओं के सामने पेश कराया जा सकता है।

76 परियोजनाओं से जुड़े मामलों में भी आया था ज्ञानेश कुमार का नाम!

वर्ष 2003 से 2006 के बीच बिना निविदा प्रक्रिया के आवंटित 76 परियोजनाओं से जुड़े मामलों में भी ज्ञानेश कुमार का नाम जांच के दायरे में आया था। विजिलेंस विभाग ने इन मामलों में भी अनियमितताओं की पुष्टि नहीं होने की बात कही और कार्रवाई रोक दी। वर्ष 2012 में आठ मामलों को अदालत में तथ्यों की त्रुटि यानी मिस्टेक ऑफ फैक्ट के रूप में प्रस्तुत किया गया था जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था। अब नई शिकायत ने पुराने फैसलों और उस समय की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पहले की जांच में उनसे और कुछ महत्वपूर्ण लोगों से पूछताछ ही नहीं की गई थी। ऐसे में नई जांच में पुराने दस्तावेज भुगतान संबंधी रिकॉर्ड और गवाहों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

साजन ने खोली भुगतान अटकने की पूरी कहानी

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत करने वाले दूसरे व्यक्ति साजन वी.ओ. ने इस पुराने विवाद में कई अहम दावे किए हैं। साजन वर्ष 2000 के दशक की शुरुआत में मलेशियाई कंपनी पीएटीआई बेल को निर्माण सामग्री की आपूर्ति करते थे। उनका दावा है कि कोल्लम में उनके घर के पास ही कंपनी का परियोजना कार्यालय था और मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन के साथ उनके अच्छे संबंध थे। साजन के मुताबिक परियोजना से जुड़े बिलों का भुगतान समय पर नहीं हो रहा था। इसके चलते ली स्थानीय ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को उनका पैसा नहीं दे पा रहे थे। इसी परेशानी के बीच ली ने उन्हें बताया था कि बिल पास कराने के लिए तत्कालीन लोक निर्माण विभाग के सचिव ज्ञानेश कुमार ने दो करोड़ रुपये मांगे हैं। साजन का कहना है कि कंपनी रिश्वत देने के लिए तैयार नहीं थी। साजन के अनुसार ली के परिवार ने पीएटीआई बेल के कर्मचारियों को बताया था कि ली ने अपने सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का नाम लिखा था। 23 अक्टूबर को गृह मंत्री को दी गई शिकायत में साजन ने इन आरोपों को दोहराया। उन्होंने जांचकर्ताओं के सामने साक्ष्य प्रस्तुत करने की इच्छा जताते हुए कहा कि जरूरत पडऩे पर ली के परिवार के सदस्यों को भी सामने लाया जा सकता है।

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