भाजपा में सब ठीक नहीं है : गहलोत

- वसुंधरा राजे के बयान पर सियासत गरमाई, भाजपा के अंदरखाने भी बयानबाजी तेज
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के हालिया बयान को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। बयान पर विवाद बढऩे के बाद खुद राजे को सामने आकर सफाई देनी पड़ी, लेकिन मामला शांत होने के बजाय और तूल पकड़ता नजर आ रहा है। वसुंधरा राजे ने स्पष्ट किया कि उनके बयान को तोड़-मरोडक़र पेश किया गया है और गलत संदर्भ में प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी किसी पद की इच्छा या मांग की बात नहीं की, बल्कि उनके लिए जनता का स्नेह और समर्थन ही सबसे बड़ा है। उधर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने उनका साथ दिया है।
राजे साथ यह भी आरोप लगाया कि कुछ षड्यंत्रकारी तत्व उनकी बातों को गलत तरीके से पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल, बारां जिले में सडक़ निर्माण से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा था कि जब धौलपुर में उनके निवास के सामने सडक़ निकाली गई, तब उन्हें भी अपनी बाउंड्री पीछे करनी पड़ी थी। इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं और विपक्ष ने भी इसे मुद्दा बना लिया। बीजेपी के भीतर भी इस बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने मारवाड़ी अंदाज में एक दोहा सुनाते हुए परोक्ष रूप से जवाब दिया, जिसे राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। इससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि पार्टी के अंदर भी मतभेद मौजूद हैं।
वसुंधरा राजे को सफाई देने की जरूरत ही नहीं थी
कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि वसुंधरा राजे को सफाई देने की जरूरत ही नहीं थी, लेकिन बीजेपी के भीतर ही कौन क्या कह रहा है, यह सबके सामने है। उन्होंने तंज कसा कि भाजपा कांग्रेस पर आरोप लगाती है, जबकि उनकी अपनी स्थिति ही अस्थिर नजर आ रही है। कांग्रेस ने दावा किया कि उनकी पार्टी पूरी तरह एकजुट है और आगामी चुनाव में सत्ता में वापसी करेगी। इधर, बीजेपी के भीतर जारी बयानबाजी ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी की चर्चाओं को हवा दे दी है।



