हॉर्मुज पर बारूद, दुनिया पर संकट!

- ताजा अमेरिका-ईरान टकराव ने बढ़ाई वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कनें
- स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पूरी तरह से बंद, आने वाले दिनों में बढ़ सकती है किल्लत
- ईरान ने गिराये अमेरिकन अपाचे चॉपर तो बदले में अमेरिका ने मचा दी तबाही
- ईरान में तीन ठिकानों पर सिर्फ धुंआ ही धुआं
- विदेश मंत्री की यूएस को कड़ी चेतावनी हर हमले का मुंहतोड़ जवाब देंगे, हमारे इलाके से दूर रहें
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। जिस बात की आंशका जताई जा रही थी वही हुआ। बीती रात अमेरिका ने ईरान में ऐसी तबाही मचाई है कि पूछिये मत। बदले में ईरान ने भी जार्डन और दूसरे इलाकों में अमेरिकन मिलेट्री बेस पर ताबड़तोड़ हमले कर इतिहास रच दिया। ताजे हमलों के बाद सवाल सिर्फ मिसाइलों का नहीं है। सवाल सिर्फ अमेरिका और ईरान का नहीं है। सवाल उस समुद्री दरवाजे का है जिससे दुनिया की ऊर्जा की नसें होकर गुजरती हैं। और जब स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के ऊपर बारूद का धुआं उठता है तो उसकी गूंज दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और जयपुर की जेब तक सुनाई देना वाजिब है। बीती रात पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर के गिराए जाने के बाद वॉशिंगटन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान से जुड़े सैन्य ठिकानों पर हमले किए। अमेरिकी प्रशासन इसे अनुपातिक जवाब बता रहा है जबकि तेहरान इसे उकसावे की कार्रवाई करार दे रहा है। दोनों पक्षों के बयान संघर्ष में तेजी लाने वाले हैं।
संघर्ष को समाप्त करने की संभावनाओं पर फिर से सवाल
इस ताजा सैन्य टकराव ने उस संघर्ष को समाप्त करने की संभावनाओं पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों से हुई थी। इसके बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल एवं गैस मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई लगभग चार घंटे तक चली। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, करीब 20 ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान के सरकारी मीडिया आईआरआईबी ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित केश्म द्वीप और सीरिक बंदरगाह शहर पर भी हमले हुए। वहीं, बंदर अब्बास और जास्क के आसपास विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। ईरान की रिवोल्यूशनरी गाड्र्स ने दावा किया कि उसने जॉर्डन में लंबी दूरी की मिसाइलों से चार प्रमुख अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें अल-अजराक एयर बेस पर एफ-35 लड़ाकू विमानों के ठिकाने और अमेरिकी कमांड सेंटर शामिल हैं।
जार्डन व कुवैत दोनों की नजर
हालांकि, जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने ईरान की ओर से दागी गई पांच मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया और इस घटना में कोई हताहत या नुकसान नहीं हुआ। उधर, कुवैत की सेना ने बताया कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियां संदिग्ध हवाई लक्ष्यों पर नजर रख रही हैं। यह बयान उस समय आया जब ईरान ने दावा किया कि उसने कुवैत के अली अल-सलेम अमेरिकी सैन्य अड्डे को ड्रोन हमलों से निशाना बनाया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गाड्र्स ने बहरीन में अमेरिकी पांचवें बेड़े पर भी ड्रोन हमले का दावा किया और चेतावनी दी कि यदि सैन्य कार्रवाई जारी रही तो जवाब और अधिक सख्त होगा। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, अमेरिका ने हमारे संकल्प की परीक्षा लेने का फैसला किया है। हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं किसी भी हमले या धमकी का जवाब दिए बिना नहीं छोड़ेंगी।
सबसे बड़ा डर क्या है?
हॉर्मुज दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। यदि इस मार्ग पर सैन्य जोखिम और ज्यादा बढ़ता है और जहाजों की आवाजाही पूरी तहर से प्रभावित हो जाती है या बीमा लागत बढ़ती है तो सबसे पहले असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई देगा। और तेल महंगा हुआ तो पेट्रोल, डीजल, गैस, परिवहन, खाद्य पदार्थ—सब कुछ प्रभावित होगा। भारत के लिए यह सिर्फ विदेश नीति का मामला नहीं है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए पश्चिम एशिया में हर धमाका भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक चेतावनी घंटी जैसा है। तेल महंगा होगा तो महंगाई बढ़ेगी, आयात बिल बढ़ेगा और सरकार पर अतिरिक्त दबाव आएगा। तेहरान कह रहा है कि हर हमले का जवाब दिया जाएगा। वॉशिंगटन कह रहा है कि अपने सैनिकों और हितों की रक्षा करेगा। इस बीच दुनिया के बाजार, तेल कंपनियां और निवेशक सांस रोककर अगली चाल का इंतजार कर रहे हैं। युद्ध सिर्फ मोर्चे पर नहीं लड़ा जाता। उसका असर बाजारों, बंदरगाहों, कारखानों और आम आदमी की जेब तक जाता है। और फिलहाल दुनिया उसी मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है।
अमेरिका ने ईरान के 20 तो बदले में ईरान ने 22 अमेरिकन ठिकानों पर किया जवाबी हमला
ईरान की रिवोल्यूशनरी गाड्र्स आईआरजीसी का दावा है कि उसने जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य अड््डे सहित खाड़ी क्षेत्र के 22 ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई स्ट्रेट ऑफहोर्मुज के आसपास अमेरिकी सैन्य हमलों के जवाब में की गई है। युद्धविराम के बाद यह अमेरिका और ईरान के बीच सबसे गंभीर सैन्य टकरावों में से एक माना जा रहा है। ईरानी हमलों का दायरा जॉर्डन के अलावा कुवैत और बहरीन तक फैला है। आईआरआईबी ने बताया है कि ईरान ने बहरीन स्थित अमेरिका के पांचवें बेड़े को भी निशाना बनाया गया है। बहरीन के गृह मंत्रालय ने एक्स के जरिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिवेट कर दिया गया है। बाद में बहरीन के शाही दरबार के मीडिया सलाहकार ने कहा कि देश की वायु रक्षा प्रणाली ने ईरानी हमलों को विफल कर दिया। अमेरिकी सेना सेंटकॉम ने बयान जारी कर बताया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट ईरान के वायु रक्षा तंत्र, नियंत्रण केंद्रों और निगरानी रडार ठिकानों पर कार्रवाई की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार यह हमला अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के जवाब में किया गया। ट्रंप का कहना है? कि हमारा जवाब बेहद मजबूत और प्रभावशाली होना चाहिए था और यही हमने किया है।




