पिता को खोने के बाद नहीं मानी हार, अनुषा ने हासिल किया IFS का मुकाम
आंध्र प्रदेश की आईएफएस अधिकारी वेन्नम अनुषा की कहानी संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल है. लगातार सात बार यूपीएससी में असफल होने, पारिवारिक दुख और मानसिक दबाव झेलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: आंध्र प्रदेश की आईएफएस अधिकारी वेन्नम अनुषा की कहानी संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल है. लगातार सात बार यूपीएससी में असफल होने, पारिवारिक दुख और मानसिक दबाव झेलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी.
कई बार जिंदगी इंसान को ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है, जहां हर रास्ता बंद नजर आता है, लेकिन जो लोग हार नहीं मानते वही आखिरकार अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं. आंध्र प्रदेश की रहने वाली आईएफएस अधिकारी वेन्नम अनुषा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. लगातार असफलताओं, पारिवारिक दुख और मानसिक दबाव के बावजूद उन्होंने अपने सपनों का पीछा नहीं छोड़ा. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में कई बार नाकाम होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत बनाए रखी. आखिरकार एक नई दिशा ने उनकी जिंदगी बदल दी और वह भारतीय वन सेवा अधिकारी बनने में सफल रहीं.
बचपन से ही झेली कई मुश्किलें
वेन्नम अनुषा बापटला जिला की निवासी हैं. बचपन से ही उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. उनके पिता का निधन उनके जीवन का सबसे बड़ा झटका था. इस घटना ने उन्हें मानसिक रूप से काफी प्रभावित किया, लेकिन उन्होंने खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया.
पढ़ाई में हमेशा रहीं आगे
अनुषा शुरू से ही पढ़ाई में तेज थीं और 12वीं तक लगातार टॉपर रहीं, हालांकि पिता की मौत के बाद वह भावनात्मक रूप से टूट गई थीं, जिसका असर उनकी आगे की पढ़ाई पर भी पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और साल 2014 में बापटला इंजीनियरिंग कॉलेज से आईटी में बीटेक की डिग्री पूरी की.
सात बार असफल होने के बाद भी नहीं मानी हार
बीटेक के बाद उन्होंने करीब डेढ़ साल तक निजी कंपनी में नौकरी की. फिर 2017 में नौकरी छोड़कर पूरी तरह यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी. 2015 से 2021 के बीच उन्होंने सात बार सिविल सेवा परीक्षा दी, लेकिन हर बार किसी न किसी चरण में असफल रहीं. कभी एक नंबर से तो कभी कुछ नंबरों से उनका सपना अधूरा रह गया.
आखिरी मोड़ पर मिली नई उम्मीद
अपने आखिरी प्रयास में भी सेलेक्शन न होने की वजह से अनुषा पूरी तरह निराश हो गई थीं. तभी उनके एक मार्गदर्शक ने उन्हें भारतीय वन सेवा परीक्षा देने की सलाह दी, उन्होंने इस सुझाव को अपनाया और दिल्ली जाकर आईएफएस परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी. साल 2023 में पहली बार आईएफएस परीक्षा देकर उन्होंने ऑल इंडिया 73वीं रैंक हासिल की और अपने संघर्ष को सफलता में बदल दिया.



