बलूचिस्तान मुद्दा: चीन-पाक गठजोड़ पर सवाल, मीर यार बलूच बोले– 2025 में आज़ादी, 2026 में ‘ग्लोबल डिप्लोमेटिक वीक’
मीर यार बलूच ने बीजिंग-इस्लामाबाद गठबंधन और बलूचिस्तान में चीन की संभावित सैन्य तैनाती पर गंभीर चिंता जाहिर की है. उन्होंने पाकिस्तान की दशकों से चलाई जा रही दमन और मानवाधिकार की कड़ी आलोचना की.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मीर यार बलूच ने बीजिंग-इस्लामाबाद गठबंधन और बलूचिस्तान में चीन की संभावित सैन्य तैनाती पर गंभीर चिंता जाहिर की है. उन्होंने पाकिस्तान की दशकों से चलाई जा रही दमन और मानवाधिकार की कड़ी आलोचना की. बलूच नेताओं ने 2025 में आजादी घोषित की है. उन्होंने कहा कि 2026 में ‘ग्लोबल डिप्लोमेटिक वीक’ मनाएंगे.
मीर यार बलूच एक जाने-माने बलूच नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं. उन्होंने बीजिंग-इस्लामाबाद गठबंधन
के गहराने पर चिंता जताई है. उन्होंने दावा किया है कि चीन अगले कुछ महीनों में पाकिस्तान के बलूचिस्तान
इलाके में अपनी सेना तैनात कर सकता है. विदेश मंत्री एस जयशंकर को लिखे एक खत में, उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान ने पाकिस्तान के कंट्रोल में दशकों तक दमन झेला है. इसमें उनके मुताबिक, सरकार ने प्रायोजित
हिंसा और मानवाधिकारों का उल्लंघन शामिल है.
बलूच राष्ट्रवादी नेताओं ने मई 2025 में पाकिस्तान से आज़ादी की घोषणा की है. मीर बलूच ने अब घोषणा की
है कि रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान 2026 के पहले हफ्ते में 2026 बलूचिस्तान ग्लोबल डिप्लोमेटिक वीक मनाएगा.
यहां बलूचिस्तान दुनिया भर के देशों के साथ सीधे जुड़ सकेगा.
ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ
जयशंकर को भेजे गए नए साल के संदेश में बलूच नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2025 में भारतीय सरकार की ओर से ऑपरेशन सिंदूर के ज़रिए उठाए गए साहसिक और दृढ़ कदमों की तारीफ की. ये पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के अड्डों को खत्म कर दिया था. मीर बलूच ने इन कदमों को भारत की हिम्मत और क्षेत्रीय सुरक्षा और न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रदर्शन बताया.
उन्होंने न्यू ईयर विश करते हुए कहा कि बलूचिस्तान गणराज्य के छह करोड़ देशभक्त नागरिकों की ओर से हम भारत के एक सौ चालीस करोड़ लोगों, संसद के दोनों सदनों, मीडिया, सिविल सोसाइटी और सभी सम्मानित व्यक्तियों को नए साल 2026 की हार्दिक बधाई देते हैं.
हिंगलाज माता मंदिर हमारी साझा विरासत
मीर यार बलूच ने लिखा कि यह शुभ अवसर भारत और बलूचिस्तान को सदियों से जोड़ने वाले गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, वाणिज्यिक, आर्थिक, राजनयिक, रक्षा और बहुआयामी संबंधों पर विचार करने और उनका जश्न मनाने का मौका देता है. उन्होंने कहा कि इन स्थायी संबंधों का उदाहरण हिंगलाज माता मंदिर (नानी मंदिर) जैसे पवित्र स्थल हैं, जो हमारी साझा विरासत और आध्यात्मिक संबंधों का एक कालातीत प्रतीक है.



