सलाखें रोक नहीं सकतीं नागरिक अधिकार, MP हाई कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश; कैदियों को मिलेगा आधार-राशन कार्ड
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कैदियों के लिए बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने कैदियों और उनके परिवारों की परेशानियों को गंभीरता से लिया है. कोर्ट ने इन कैदियों के डॉक्यूमेंट्स बनवाने का निर्देश दिया है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कैदियों के लिए बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने कैदियों और उनके परिवारों की परेशानियों को गंभीरता से लिया है. कोर्ट ने इन कैदियों के डॉक्यूमेंट्स बनवाने का निर्देश दिया है.
अपराध से नफरत करो, अपराधी से नहीं…कानून की ये बुनियादी कसौटी अक्सर अदालती बहसों तक सीमित रह जाती है. लेकिन मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस विचार को जमीनी धरातल पर उतारने का काम किया है. जेल की चारदीवारी में बंद कैदियों के मानवीय अधिकारों और उनके परिवारों की आर्थिक लाचारी को देखते हुए हाईकोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है. अदालत ने कहा जेल में बंद विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदियों के लिए विशेष शिविर लगाकर उनके आधार कार्ड, राशन कार्ड और बैंक खातों की KYC प्रक्रिया पूरी कराई जाए.
कोर्ट ने अभियान को लगातार जारी रखने के निर्देश देते हुए कलेक्टरों से इसकी प्रगति की नियमित रिपोर्ट मांगी है. पहली रिपोर्ट 16 सितंबर 2026 को पेश करनी होगी. मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक अग्रवाल की अदालत में हुई. कोर्ट ने निर्देश दिया कि अभियान की निगरानी और प्रगति रिपोर्ट मुख्य सचिव के माध्यम से नियमित रूप से प्रस्तुत की जाए. इसके बाद हर महीने की 16 तारीख को प्रगति रिपोर्ट अदालत के सामने रखनी होगी. अगर 16 तारीख को अवकाश रहता है, तो रिपोर्ट अगले कार्यदिवस पर पेश की जाएगी.
कैदी ने दायर की थी याचिका
इस पूरे मामले की शुरुआत प्रहलाद प्रसाद विश्वकर्मा नाम के कैदी की याचिका से हुई. प्रहलाद ने अपनी सजा के निलंबन के लिए याचिका लगाई थी. उसने अदालत को बताया कि उसका बेटा बेहद गंभीर बीमारी ब्लड कैंसर से पीड़ित है और AIIMS भोपाल में उसका इलाज चल रहा है. अपीलकर्ता का दूसरा सबसे बड़ा दर्द यह था कि बायोमीट्रिक अपडेट और KYC न होने की वजह से उसका बैंक खाता बंद पड़ा है, जिससे उसका परिवार इलाज के लिए पैसे तक नहीं निकाल पा रहा है.
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने दो बड़े कदम उठाए है. अदालत ने अपीलकर्ता के बेटे की बीमारी और AIIMS में चल रहे इलाज की पूरी मेडिकल रिपोर्ट तलब की है. इस मामले को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है. अदालत ने माना कि ये सिर्फ एक व्यक्ति की परेशानी नहीं है, बल्कि देश की जेलों में बंद हजारों कैदियों के परिवार बायोमीट्रिक और KYC डिटेल्स न होने के कारण न तो बैंक खाते चला पा रहे हैं और न ही सरकारी राशन या कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले पा रहे हैं.
कोर्ट ने प्रशासन पर लगाया ढिलाई का आरोप
अदालत ने इस प्रशासनिक ढिलाई पर सख्त रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश जारी किए हैं कि राज्य के सभी जिलों के कलेक्टरों के माध्यम से एक विशेष अभियान चलाया जाए. ये अभियान केवल सेंट्रल, डिस्ट्रिक्ट या सब-जेलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बाल सुधार गृह, बालिका सुधार गृह, रिमांड होम और वृद्ध आश्रमों में भी आयोजित किया जाएगा.
इन शिविरों में आधार कार्ड बनाने या सुधारने, राशन कार्ड जारी करने और विभिन्न बैंक खातों में KYC अपडेट करने का काम प्राथमिकता पर किया जाएगा. हाईकोर्ट ने अपेक्षा जताई है कि यह प्रक्रिया अगले 15 दिनों के भीतर शुरू कर दी जाए, ताकि देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस को हर नागरिक के सम्मान की रक्षा के संकल्प के साथ मनाया जा सके. सभी कलेक्टर मुख्य सचिव के जरिए अदालत को अपनी मासिक प्रगति रिपोर्ट भेजेंगे. पहला प्रगति प्रतिवेदन 16 सितंबर 2026 को प्रस्तुत किया जाएगा. इसके बाद हर महीने की 16 तारीख को रिपोर्ट देनी होगी. यदि 16 तारीख को अवकाश रहता है, तो रिपोर्ट अगले कार्यदिवस पर पेश की जाएगी.
आदेश की फोटो कॉपी भेजने के निर्देश
जस्टिस विवेक अग्रवाल की पीठ ने फैसले की व्यापकता गंभीरता से लिया है. कोर्ट ने आदेश की प्रति नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी यानी NALSA और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सचिवों को भेजने के निर्देश दिए हैं. अदालत ने कहा कि यदि NALSA के सचिव उचित समझें, तो इस फैसले की भावना को देश के अन्य राज्यों की जेलों में भी लागू करने के लिए सर्कुलेट कर सकते हैं. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह कदम जेल सुधारों और कैदियों के मानवाधिकारों की दिशा में एक नया मील का पत्थर साबित होगा.



