होर्मुज प्रस्ताव पर ट्रंप को बड़ा झटका, फ्रांस भी अमेरिका के साथ नहीं

ट्रंप साहब को लगता था कि वे बहरीन जैसे छोटे देशों के कंधे पर बंदूक रखकर होर्मुज में अपनी फौजें घुसा देंगे। लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आज जो हुआ, उसकी उम्मीद अमेरिका के सगे दोस्तों को भी नहीं थी।

4पीएम न्यूज नेटवर्क:  3 अप्रैल 2026 की ये शाम गवाह है कि दुनिया की बिसात पर मोहरे पलट चुके हैं। जो डोनाल्ड ट्रंप कल तक संयुक्त राष्ट्र में होर्मुज पर कब्ज़े का सपना देख रहे थे, आज उन्हें अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है। चीन, रूस और नाटो के सदस्य फ्रांस की तिकड़ी ने मिलकर अमेरिका के अरमानों पर पानी फेर दिया है।

लेकिन बात सिर्फ कूटनीति की नहीं है, मैदान-ए-जंग से जो खबर आ रही है वो अमेरिका के लिए किसी ‘कयामत’ से कम नहीं है। ईरान के उस ‘पाताल लोक’ यानी अंडरग्राउंड मिसाइल सिटीज़ के सामने अमेरिका के सबसे घातक बम जीबीयू-72 (GBU-72) और बी2 बॉम्बर (B2 Bomber) भी फेल साबित हुए हैं। और सबसे बड़ी खबर— ईरान ने अमेरिका का एक और एफ-35 (F-35) फाइटर जेट मार गिराया है, जिसका पायलट भी नहीं बच सका! ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति अब ‘अमेरिका अलोन’ में तब्दील हो चुकी है।

ट्रंप साहब को लगता था कि वे बहरीन जैसे छोटे देशों के कंधे पर बंदूक रखकर होर्मुज में अपनी फौजें घुसा देंगे। लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आज जो हुआ, उसकी उम्मीद अमेरिका के सगे दोस्तों को भी नहीं थी। अमेरिका चाहता था कि ‘चैप्टर 7’ के तहत सैन्य कार्रवाई का प्रस्ताव पास हो जाए, लेकिन चीन और रूस ने साफ़ कह दिया कि होर्मुज पर आक्रमण रोकने के लिए वे वीटो (Veto) लाएंगे।

हैरानी की बात यह रही कि फ्रांस ने भी इस बार अमेरिका का साथ छोड़ दिया। फ्रांस ने साफ़ कह दिया कि वह किसी भी ऐसे प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगा जो मिडिल ईस्ट में और ज़्यादा आग भड़काए। ट्रंप के दोस्त और बहरीन जैसे देश सिर्फ मुँह ताकते रह गए। रूस और चीन ने साफ़ लफ़्ज़ों में चेतावनी दी कि होर्मुज की किल्लत की वजह अमेरिका की ‘अवैध बमबारी’ है। यह ट्रंप की विदेश नीति का सबसे बड़ा फेलियर है कि उनका अपना नाटो साथी फ्रांस भी आज उनके खिलाफ खड़ा है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद बहरीन के उस प्रस्ताव पर मतदान करने वाली थी, जिसका उद्देश्य होर्मुज के आसपास व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि वीटो शक्ति रखने वाले चीन ने स्पष्ट कर दिया था कि वह किसी भी ऐसे प्रस्ताव का विरोध करेगा जिसमें बल प्रयोग की अनुमति दी जाए। वहीं रूस ने भी ईरान का साथ देते हुए इस प्रस्ताव का विरोध किया।

इस बीच चौंकाने वाली बात यह रही कि फ्रांस ने भी होर्मुज में सेना तैनात करने पर वीटो लगाया, जबकि वह खुद नाटो में शामिल देश है। फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान पर हमले के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष अब एक महीने से ज़्यादा समय तक चल चुका है। इस वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। इसके चलते वैश्विक तेल कीमतों में तेज़ उछाल देखा गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है।

वैसे तो ट्रंप दावा कर रहे थे कि उन्होंने ईरान की कमर तोड़ दी है, लेकिन हकीकत यह है कि ईरान का ‘पाताल लोक’ आज भी महफूज़ है। ईरान ने ज़मीन से सैकड़ों फीट नीचे ऐसी मिसाइल सिटीज़ बनाई हैं जहाँ अमेरिका का सबसे शक्तिशाली बंकर-बस्टर बम जीबीयू-72 भी नाकाम साबित हो रहा है।

पेंटागन की रिपोर्ट लीक हुई है कि बी2 स्टेल्थ बॉम्बर ने हज़ारों टन बारूद बरसाया, लेकिन ईरान की मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता कम नहीं हुई। यह वह ‘पाताल लोक’ है जहाँ से ईरान की अचूक मिसाइलें निकलती हैं, वार करती हैं और वापस गायब हो जाती हैं। ट्रंप साहब, हॉलीवुड की फिल्मों में पहाड़ तोड़ना आसान है, लेकिन ईरान की हकीकत ने आपकी टेक्नोलॉजी का दम निकाल दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता लगभग नष्ट हो चुकी है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बता रही है। 28 फरवरी से अब तक ईरान ने जॉर्डन, यूएस मिलिट्री बेस वाले खाड़ी देशों और इज़राइल पर 6,770 मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। हमले की रफ्तार लगभग स्थिर बनी हुई है, इसमें कोई बड़ी गिरावट नहीं आई। ईरान ने सबसे ज़्यादा हमले यूएई पर किए हैं।

इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज़ की मानें तो ईरान ने इज़राइल पर अकेले 600 मिसाइलें और 765 ड्रोन दागे। पिछले एक हफ्ते में ही 215 ड्रोन और 200 मिसाइलें लॉन्च की गईं। अगर मिसाइल क्षमता सचमुच 90 प्रतिशत नष्ट हुई होती, तो यह आंकड़ा 25 प्रतिशत से नीचे होता, लेकिन 30 प्रतिशत से ऊपर का यह आंकड़ा साफ़ बताता है कि ईरान की मारक क्षमता अभी भी बरकरार है। ऐसे में अमेरिका के बड़े-बड़े बॉम्बर और फाइटर जेट्स कहीं न कहीं फेल होते दिख रहे हैं।

ट्रंप की ज़िद ने दुनिया को उस मोड़ पर ला दिया है जिसका डर हर इकोनॉमिस्ट को था। ईरान ने अब खाड़ी की लाइफलाइन यानी होर्मुज पर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ईरान ने साफ़ कर दिया है कि जब तक उस पर हमले बंद नहीं होंगे, वह इस रास्ते से एक भी अमेरिकी जहाज़ को गुज़रने नहीं देगा।

ऐसे में दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। पेट्रोल-डीज़ल की किल्लत ने महामंदी की दस्तक दे दी है। ट्रंप और नेतन्याहू की यह जोड़ी अपनी ज़िद के लिए पूरी इंसानियत को भूखा मारने पर तुली है। ईरान अब सिर्फ डिफेंस नहीं कर रहा, बल्कि वह वहां वार कर रहा है जहाँ अमेरिका को सबसे ज़्यादा दर्द होता है—यानी उसकी ‘आर्थिक नब्ज़’ पर।

आज की सबसे सनसनीखेज खबर ईरान के एयरस्पेस से आई है। ईरान के डिफेंस सिस्टम ने अमेरिका के सबसे एडवांस, अरबों डॉलर के एफ-35 फाइटर जेट को धूल चटा दी है। खबर पक्की है कि जेट मार गिराया गया है और पायलट को बचने का मौका तक नहीं मिला। पिछले दिनों से ईरान युद्ध में थोड़ी राहत दिख रही थी, लेकिन अब समझौते की सारी सूरत खत्म हो गई है और दोनों ओर से हमले तेज़ हो चुके हैं।

ईरान की मेहर न्यूज़ एजेंसी ने दावा किया है कि ईरान के मध्य हिस्से में अमेरिका का एक और एफ-35 फाइटर जेट मार गिराया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पायलट के बचने की संभावना कम है, क्योंकि उसे गंभीर चोटें आई थीं। हालांकि यूएस सेंट्रल कमांड ने अभी तक इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अगर ईरान का यह दावा सही साबित होता है, तो यह एक बड़ा जवाबी हमला माना जाएगा, क्योंकि एफ-35 दुनिया के सबसे आधुनिक स्टेल्थ फाइटर जेट्स में से एक है, जो रडार से बचकर दुश्मन के क्षेत्र में काम करने की क्षमता रखता है। ऐसे में इस तरह के जेट को नुकसान पहुँचाना अमेरिका की ‘स्टेल्थ’ ताकत पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।

यूएस सेंट्रल कमांड ने अभी तक ईरान के उस दावे की पुष्टि नहीं की है। करीब दो हफ्ते पहले भी ईरान ने दावा किया था कि उसने एफ-35 लाइटनिंग-2 को निशाना बनाया था। सेंटकॉम के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स के मुताबिक, यह जेट ईरान के ऊपर मिशन पर था, तभी उसे इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि विमान सुरक्षित उतर गया और मामले की जांच चल रही है। हालांकि कुछ सूत्रों ने बताया कि जेट को ईरानी फायरिंग से भारी नुकसान पहुँचा था।

ऐसे में यह दूसरी घटना है, जब अमेरिका के सबसे एडवांस फाइटर जेट को नुकसान पहुँचने की खबरें आई हैं। लेकिन हैरानी की बात देखिए, अमेरिकी सेंट्रल कमांड इस पर ‘साँप सूँघने’ वाली चुप्पी साधे हुए है। वे अपनी जनता को क्या बताएंगे? कि उनका सबसे महंगा खिलौना ईरान की मिसाइल का शिकार हो गया? ट्रंप और नेतन्याहू ने जो ‘अजेय’ होने का भ्रम पाला था, वह अब धुएं में मिल चुका है। सेंट्रल कमांड की यह खामोशी उनकी हार की सबसे बड़ी गवाही है।

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