कानपुर में बड़ा विवाद: ITBP जवान की मां का हाथ काटे जाने के मामले में अस्पताल को क्लीन चिट, जवानों में नाराजगी

कानपुर के कृष्णा हॉस्पिटल में ITBP जवान की मां का हाथ काटे जाने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को क्लीन चिट दे दी, जिससे जवानों में नाराजगी फैल गई। ITBP कर्मियों ने कमिश्नरेट पहुंचकर निष्पक्ष जांच की मांग की।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कानपुर में स्वास्थ्य व्यवस्था और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में इलाज के दौरान आईटीबीपी (ITBP) के एक जवान की मां का हाथ काटे जाने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल को क्लीन चिट दिए जाने के बाद मामला और गरमा गया है। इस फैसले के विरोध में आईटीबीपी के दर्जनों जवान कमिश्नरेट पहुंचे और अपनी नाराजगी जताई। मौके पर आईटीबीपी के अधिकारी भी मौजूद रहे और पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर मामले पर विस्तृत चर्चा की।

इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही का आरोप

परिजनों का आरोप है कि कृष्णा हॉस्पिटल में इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही हुई, जिसके कारण मरीज की हालत बिगड़ती गई और अंततः उसका हाथ काटना पड़ा। परिवार का कहना है कि यह कोई सामान्य मेडिकल जटिलता नहीं थी, बल्कि अस्पताल की गंभीर चूक का परिणाम है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट में अस्पताल को क्लीन चिट दे दी गई, जिससे पीड़ित परिवार और आईटीबीपी जवानों में गहरा आक्रोश है।

जवानों ने जताई नाराजगी, कमिश्नरेट पहुंचे

मामले में कार्रवाई से असंतुष्ट ITBP के कई जवान सीधे कानपुर कमिश्नरेट पहुंचे। जवानों के साथ आईटीबीपी के अधिकारी भी मौजूद थे। उन्होंने पुलिस कमिश्नर के सामने अपनी बात रखते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। जवानों का कहना है कि जब एक सुरक्षा बल के जवान के परिवार के साथ इस तरह की घटना में न्याय नहीं मिल पा रहा है, तो आम जनता को कैसे न्याय मिलेगा।

रिपोर्ट पर उठे सवाल

आईटीबीपी के लाइजनिंग ऑफिसर ने जांच रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिस बीमारी का इलाज ही अस्पताल में नहीं हुआ, उसी का उल्लेख स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में किया गया है। इस बयान के बाद जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। जवानों का आरोप है कि रिपोर्ट में वास्तविक तथ्यों को नजरअंदाज किया गया है।

स्वास्थ्य विभाग पर उठ रहे सवाल

इस पूरे मामले ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किन आधारों पर अस्पताल को क्लीन चिट दी गई। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि क्या जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष थी या फिर इसमें किसी तरह की लापरवाही या दबाव शामिल था। फिलहाल आईटीबीपी जवानों ने साफ कर दिया है कि जब तक मामले में दोबारा निष्पक्ष जांच नहीं होती, वे पीछे नहीं हटेंगे। वहीं प्रशासनिक स्तर पर मामले को शांत करने की कोशिशें जारी हैं।

रिपोर्ट – प्रांजुल मिश्रा

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