लखीमपुर में बड़ा मेडिकल इवेंट, अंगदान पर मंथन करने जुटेंगे देशभर के टॉप डॉक्टर

लखीमपुर मेडिकल कॉलेज में 25-26 अप्रैल को MEDICALTRUISM कॉन्फ्रेंस आयोजित होगी, जिसमें SGPGI, KGMU, मेदांता और अपोलो के विशेषज्ञ अंगदान, ट्रांसप्लांट और चिकित्सा परोपकारिता पर चर्चा करेंगे।

4पीएम न्यूज नेटवर्क:  भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अंगदान जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अब भी कई भ्रांतियां मौजूद हैं। इन्हीं सवालों और गलतफहमियों को दूर करने के उद्देश्य से लखीमपुर में एक खास पहल की जा रही है, जहां देशभर के विशेषज्ञ एक मंच पर जुटेंगे।

25-26 अप्रैल को होगा ‘MEDICALTRUISM’ कॉन्फ्रेंस का आयोजन

लखीमपुर के मेडिकल कॉलेज में 25 और 26 अप्रैल को ‘MEDICALTRUISM’ कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा परोपकारिता (Medical Altruism) और अंगदान को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना है।

अंगदान को लेकर भ्रांतियां दूर करने पर फोकस

कॉन्फ्रेंस की जानकारी देते हुए प्राचार्य डॉ. वाणी गुप्ता ने बताया कि समाज में अंगदान को लेकर कई तरह की गलतफहमियां फैली हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के जरिए इन मिथकों को दूर करने और लोगों को सही जानकारी देने का प्रयास किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग अंगदान के लिए आगे आएं। इस कॉन्फ्रेंस में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे SGPGI, KGMU, Medanta और Apollo Hospitals के विशेषज्ञ भाग लेंगे। ये विशेषज्ञ अंगदान, ट्रांसप्लांट, वेंटिलेटर सपोर्ट और इससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

चिकित्सा परोपकारिता पर होगी गहन चर्चा

कॉन्फ्रेंस में सिर्फ तकनीकी पहलुओं पर ही नहीं, बल्कि चिकित्सा परोपकारिता जैसे मानवीय विषय पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। विशेषज्ञ बताएंगे कि कैसे डॉक्टर और समाज मिलकर जरूरतमंद मरीजों की मदद कर सकते हैं और अंगदान को एक जन-आंदोलन बना सकते हैं।

अधिक भागीदारी की अपील

डॉ. वाणी गुप्ता ने चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों, छात्रों और आम नागरिकों से इस कॉन्फ्रेंस में अधिक से अधिक भाग लेने की अपील की है। उनका मानना है कि जागरूकता ही वह पहला कदम है, जिससे अंगदान जैसे संवेदनशील विषय पर सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

लखीमपुर में आयोजित होने वाली यह कॉन्फ्रेंस सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में सोच बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अगर इस तरह के प्रयास लगातार होते रहें, तो आने वाले समय में अंगदान को लेकर लोगों का नजरिया जरूर बदलेगा।

रिपोर्ट – अक्षय श्रीवास्तव

Related Articles

Back to top button