बिहार बांकीपुर उपचुनाव: वोटिंग के बीच फर्जी मतदान का आरोप, बीजेपी ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र

बिहार के बांकीपुर में उपचुनाव के लिए सुबह सात बजे से वोटिंग जारी है. वहीं, इस बीच बीजेपी ने फर्जी मतदान का आरोप लगाया है. इसके लिए उसने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है. बीजेपी नेता नितिन अभिषेक ने रिटर्निंग ऑफिसर को पत्र लिखकर वोटर वेरिफिकेशन (EPIC ID और नाम का मिलान) को सख्ती से लागू करने की मांग की है.
रिटर्निंग ऑफिसर को लिखे पत्र में नितिन अभिषेक ने लिखा, ‘हमारे ध्यान में आया है कि जन सुराज पार्टी से जुड़े प्रतिनिधि और कार्यकर्ता फर्जी वोट डालकर मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसी हरकतें लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों को कमजोर करती हैं और स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता के खिलाफ हैं.
वोटर वेरिफिकेशन को सख्ती से लागू करने की मांग
पत्र में आगे कहा गया है कि चुनाव में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने और मतदान प्रक्रिया को सुरक्षित रखने के लिए, हम चुनाव आयोग और मतदान अधिकारियों से सख्ती से वेरिफिकेशन नियमों को लागू करने का पुरजोर अनुरोध करते हैं.
खास तौर पर, हर वोटर के लिए अपना असली इलेक्टोरल फोटो आइडेंटिटी कार्ड (EPIC ID) दिखाना और वोट डालने से पहले आधिकारिक वोटर लिस्ट से अपनी पहचान का बारीकी से मिलान करवाना अनिवार्य किया जाना चाहिए.
भाजपा- जनसुराज के कार्यकर्ताओं में झड़प
बांकीपुर उपचुनाव में जारी वोटिंग के बीच भाजपा और जनसुराज कार्यकर्ताओं में झड़प हो गई. किदवईपुरी के एक मतदान केंद्र के बाहर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में तीखी नोंकझोंक देखने को मिली. पुलिस ने बीच बचाव किया. घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है.
बांकीपुर बिहार की हाई-प्रोफाइल सीट
बता दें कि बांकीपुर बिहार की हाई-प्रोफाइल सीट है. यह सीट भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है. यहां पर बीजेपी के नीरज सिन्हा और जनसुराज के प्रशांत किशोर के बीच कड़ी टक्कर है. अग यहां के सियासी इतिहास की बात करें तो पिछले तीन दशक से यह सीट बीजेपी के पास है.
साल 1995 में इस सीट पर नवीन किशोर सिन्हा ने पहली बार जीत दर्ज की थी. इसके बाद बीजेपी को यहां कभी हार नहीं मिली है. नितिन नबीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा लगातार चार बार यहां से विधायक रहे थे. दिसंबर 2005 में उनके निधन के बाद अप्रैल 2006 में हुए उपचुनाव में उनके बेटे नितिन नबीन इस सीट से जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे. इसके बाद से लगातार यहां से नितिन नबीन जीतते रहे हैं.



