जामनगर में गरीबों पर बुलडोजर कार्रवाई, सैकड़ों आशियाने उजड़े, सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

जामनगर के जाडेश्वर पार्क के पास प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई के बाद कई गरीब परिवार बेघर हो गए… भीषण गर्मी के बीच बिना... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः जामनगर शहर के जदीश्वर पार्क के पास एक गरीब बस्ती में सरकारी मशीनरी ने बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ अभियान चलाया.. वर्षों से वहां रह रहे गरीब परिवारों के अस्थायी और अर्ध-स्थायी घरों को बिना किसी पूर्व सूचना या वैकल्पिक व्यवस्था के जमींदोज कर दिया गया.. भीषण गर्मी में महिलाएं, बच्चे.. और बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे बेसहारा हो गए। इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश फैला दिया है.. लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या गुजरात में गरीब होना अपराध है..

वहीं इस अभियान में प्रशासन ने भारी मशीनों का इस्तेमाल किया.. कई घर एक पल में ढह गए। परिवारों के पास अपना सामान निकालने का भी समय नहीं मिला.. बुजुर्गों को जबरन खींचकर बाहर निकाला गया.. एक बुजुर्ग महिला के साथ कथित तौर पर जबरदस्ती किए जाने की भी खबर है.. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई अचानक की गई.. और किसी को कोई वैकल्पिक जगह या मुआवजा नहीं दिया गया.. जदीश्वर पार्क के आसपास की बस्ती में दर्जनों परिवार पिछले कई वर्षों से रह रहे थे.. ज्यादातर परिवार मजदूर, छोटे दुकानदार या दिहाड़ी काम करने वाले थे.. और उन्होंने कच्चे-पक्के घर बनाकर अपना जीवन बसा लिया था.. लेकिन एक दिन सुबह प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल के साथ पहुंची.. और बुलडोजर चला दिया..

परिवारों ने रो-रोकर गुहार लगाई.. लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था.. गर्मी के मौसम में छत के बिना रहना मुश्किल हो गया.. बच्चे रो रहे थे, महिलाएं परेशान थी.. और बुजुर्गों की हालत देखकर दिल पिघल जाता था.. कुछ परिवारों ने रात भर खुले में गुजारी.. अगले दिन भी कोई स्थायी व्यवस्था नहीं हुई.. इस घटना के बाद बड़ा सवाल उठ रहा है.. कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए.. फिर सिस्टम का बुलडोजर हमेशा गरीबों.. और असहाय लोगों के घरों को ही क्यों निशाना बनाता है.. लोग पूछ रहे हैं कि भू-माफिया द्वारा किए गए बड़े-बड़े अतिक्रमण क्यों नहीं दिखते.. शक्तिशाली लोगों के फार्महाउस, होटल या अन्य निर्माण क्यों बच जाते हैं? क्या गरीब होना ही अपराध है..

स्थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि भू-माफियाओं के दबाव में प्रशासन गरीब बस्तियों को निशाना बनाता है.. जदीश्वर पार्क क्षेत्र में जमीन की कीमत ज्यादा है.. कुछ लोगों का कहना है कि.. इस जमीन को खाली कराकर बड़े प्रोजेक्ट या शक्तिशाली लोगों को देने की तैयारी हो रही है.. इस बस्ती में रहने वाले मजदूर हैं.. उन्होंने बताया कि 20 साल से यहां रह रहे थे.. बच्चे यहीं बड़े हुए.. एक दिन सुबह बुलडोजर आ गया.. कुछ कपड़े और बर्तन निकाल पाए, बाकी सब ढह गया.. अब कहां जाएं.. एक बुजुर्ग महिला ने आंसू पोंछते हुए कहा कि बेटा, इतनी गर्मी में हम कहां सोए.. कोई सरकारी मदद नहीं मिल रही.. कई परिवारों के पास खाने-पीने का भी इंतजाम नहीं है.. बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे.. महिलाएं खुली जगह पर रसोई बनाने को मजबूर हैं..

प्रशासन का कहना है कि यह अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई है.. जदीश्वर पार्क क्षेत्र सरकारी या सार्वजनिक जमीन पर बनाया गया था.. नोटिस दिए गए थे.. लेकिन लोग नहीं हटे.. लेकिन स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि.. नोटिस देने का तरीका सही नहीं था.. कई परिवार को वास्तविक नोटिस नहीं मिला.. साथ ही, बिना पुनर्वास के तोड़फोड़ करना मानवीय नहीं है.. गुजरात में पिछले कुछ वर्षों से अतिक्रमण हटाने के अभियान तेज हुए हैं.. कई बार बुलडोजर कार्रवाई की खबरें आई हैं.. कुछ मामलों में शक्तिशाली लोगों के निर्माण भी तोड़े गए.. लेकिन ज्यादातर छोटी बस्तियों और गरीब इलाकों पर ही कार्रवाई होती दिखती है..

इससे गरीब वर्ग में आक्रोश बढ़ रहा है.. लोग कहते हैं कि सिस्टम गरीबों पर सख्त है.. लेकिन मनबढ़ों और माफियाओं पर नरम.. जामनगर में भी कई बड़े अतिक्रमण बताए जाते हैं.. जिन पर कार्रवाई नहीं हुई.. मई-जून में गुजरात में भीषण गर्मी पड़ती है.. तापमान 45 डिग्री के पार चला जाता है.. ऐसे में घर तोड़ दिए जाना जानलेवा साबित हो सकता है.. बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है.. कोई तंबू, पानी या खाने की व्यवस्था नहीं की गई.. कुछ सामाजिक संगठनों ने मदद पहुंचाई.. लेकिन सरकारी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं दिख रहा.. स्थानीय NGO और कुछ नेता मदद के लिए आगे आए हैं.. लेकिन लंबे समय का समाधान जरूरी है..

विपक्षी पार्टियां इस घटना पर सरकार को घेर रही हैं.. आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं ने कहा कि गरीबों के साथ यह अन्याय है.. उन्होंने मांग की कि प्रभावित परिवारों को तुरंत वैकल्पिक जगह और मुआवजा दिया जाए.. सत्ताधारी दल का कहना है कि अवैध कब्जे हटाना जरूरी है.. लेकिन मानवीय दृष्टिकोण के साथ किया जाना चाहिए.. कुछ स्थानीय नेता पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे.. और मदद का आश्वासन दिया.. कानून के अनुसार, अतिक्रमण हटाने से पहले उचित नोटिस, सुनवाई.. और पुनर्वास की व्यवस्था होनी चाहिए.. सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने कई फैसलों में गरीबों के अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया है..

 

 

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