क्या हर शिक्षक की लग सकती है चुनाव ड्यूटी? जानिए नियम और जरूरी प्रावधान

दिल्ली हाई कोर्ट में चुनाव आयोग ने हलफनामा दाखिल किया है. आयोग ने इसमें साफ कर दिया है कि शिक्षकों की ड्यूटी पढ़ाई के दौरान नहीं लगाई जा सकती है. वहीं हाई कोर्ट ने कहा कि आप यह भी देखिए कि पढ़ाई से आने के बाद टीचर कैसे ड्यूटी कर सकते हैं?

4पीएम न्यूज नेटवर्क: दिल्ली हाई कोर्ट में चुनाव आयोग ने हलफनामा दाखिल किया है. आयोग ने इसमें साफ कर दिया है कि शिक्षकों की ड्यूटी पढ़ाई के दौरान नहीं लगाई जा सकती है. वहीं हाई कोर्ट ने कहा कि आप यह भी देखिए कि पढ़ाई से आने के बाद टीचर कैसे ड्यूटी कर सकते हैं?

चुनाव के कामों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाने का मुद्दा आए दिन सुर्खियों में रहता है. वोटर लिस्ट के एसआईआर के दौरान कई राज्यों में इसे लेकर विवाद भी हुआ. अब इस मामले में तस्वीर साफ हो गई है. दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने हलफनामा दाखिल किया है. आयोग ने इस हलफनामे के जरिए स्थिति स्पष्ट कर दी है.

आयोग के मुताबिक, स्कूल में पढ़ाई के दौरान किसी भी शिक्षक की ड्यूटी चुनावी कार्यों में नहीं लगाई जाती और न ही आगे लगाई जाएगी. इतना ही नहीं, एक स्कूल से सिर्फ 10-14 प्रतिशत टीचर की ड्यूटी ही चुनावी कार्यों में लगाई जा सकती है.

चुनाव आयोग के पास संवैधानिक अधिकार
संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को मतदान कराने, मतदाता सूची तैयार करने और मतगणना कराने का अधिकार मिला है. चुनाव आयोग इस अधिकार का इस्तेमाल कर सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाता है. इसी अधिकार के तहत शिक्षकों की ड्यूटी भी लगाई जाती है. हालांकि, समय-समय पर इसको लेकर विरोध भी देखने को मिलता है.

हाल ही में दिल्ली में एसआईआर कार्यों को लेकर शिक्षकों ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा, जहां पर तस्वीरें पहले की तुलना में काफी ज्यादा साफ हो गई है.

कब और कैसे ड्यूटी लगाई जा सकती है?
1. सैंट मैरी बनाम चुनाव आयोग के मामले में 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला दिया था, जिसका जिक्र हाई कोर्ट ने किया. इसमें कहा गया था कि चुनाव आयोग को सभी शिक्षकों को चुनावी ड्यूटी पर लगाने का अधिकार है. हालांकि, चुनाव आयोग को यह ध्यान रखना होगा कि इससे पढ़ाई पर असर न हो.

2. दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि एक स्कूल से सिर्फ 10-14 प्रतिशत टीचर की ही ड्यूटी चुनाव कार्यों में लगाई जा सकती है. चुनाव आयोग ने भी इसे स्वीकार किया. यानी अगर किसी स्कूल में 10 शिक्षक हैं तो वहां के सिर्फ 2 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जा सकती है.

3. दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह साफ कर दिया कि इससे बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर न हो. कोर्ट ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई भी जरूरी है. 2009 में बच्चों की पढ़ाई को लेकर राइट टू एजुकेशन कानून बनाया गया था. हाई कोर्ट ने कहा कि इसलिए स्कूल के समय में शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी नहीं लगाई जा सकती है.

4. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि आप किसी शिक्षक से यह उम्मीद नहीं कर सकते हैं कि स्कूल में पढ़ाने के बाद वे चुनाव का काम भी कर सकें. कोर्ट ने सुझाव दिया कि छुट्टी के दिन टीचरों की ड्यूटी लगाई जा सकती है. कोर्ट ने साफ लहजों में कहा कि शिक्षकों के तनाव का ख्याल रखना जरूरी है.

5. चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में कहा कि हम मानदेय दे रहे हैं. इसके अलावा ड्यूटी के दौरान जलपान की भी व्यवस्था रहती है. हमारी कोशिश चीजों को सही से व्यवस्थित करने की है.

Related Articles

Back to top button