दोषसिद्धि से पहले जमानत मिलनी ही चाहिए : चंद्रचूड़

- बोले- लंबी जेल की सजा संवैधानिक न्याय को कमजोर करती है
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद की जमानत सुप्रीम कोर्ट से नामंजूर किए जाने के बाद अब इस पर पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ का बड़ा बयान सामने आया है। पूर्व सीजेआई ने उमर खालिद जैसे मामलों का हवाला देते हुए कहा कि बिना मुकदमे के लंबी जेल की सजा संवैधानिक न्याय को कमजोर करती है और जमानत की मांग करती है। जयपुर में एक कार्यक्रम में पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि दोष सिद्धि से पहले जमानत प्राप्त करना एक नागरिक का अधिकार है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जिन मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल हों, उनमें इस प्रकार की राहत देने से पूर्व मामले की गहराई पड़ताल की जानी चाहिए।
पूर्व न्यायमूर्ति ने विभिन्न मामलों का उदाहरण देते हुए कहा, अगर आरोपी के समाज में लौट कर फिर से अपराध को अंजाम देने, सबूतों से छेड़छाड़ करने या जमानत का फायदा कानून के शिकंजे से भाग निकलने के लिए किए जाने की आशंका है तो आरोपी को जमानत देने से इंकार किया जा सकता है। उमर खालिद के मामले में डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, वे पांच साल से जेल में हैं। मैं अपने न्यायालय की आलोचना नहीं कर रहा हूं, जमानत की शर्तों का दुरुपयोग रोकने के लिए आप शर्तें लगा सकते हैं, लेकिन आपको यह अवश्य ध्यान में रखना चाहिए कि उन्हें शीघ्र सुनवाई का अधिकार है। यदि वर्तमान परिस्थितियों में शीघ्र सुनवाई संभव नहीं है, तो जमानत अपवाद नहीं बल्कि नियम होना चाहिए। उन्होंने कहा, कि मैंने अपने 24 महीनों के कार्यकाल में, हमने 21,000 जमानत याचिकाओं का निपटारा किया है। ऐसे कई मामले होते हैं जिनके बारे में लोग सुप्रीम कोर्ट की किसी विशेष मामले में जमानत न देने के लिए आलोचना करते समय नहीं सोचते।



