झारखंड में JPSC विवाद पर CID सख्त, करीब 20 जगहों पर एक साथ छापेमारी

झारखंड JPSC परीक्षा में अनियमितता के मामले में CID ने रांची, बोकारो सहित 15-20 जगहों पर रेड की है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: झारखंड JPSC परीक्षा में अनियमितता के मामले में CID ने रांची, बोकारो सहित 15-20 जगहों पर रेड की है.

14वें JPSC प्रारंभिक परीक्षा रिजल्ट में अनियमितताओं के आरोप की वजह से छात्रों के बीच बहुत गुस्सा है. छात्रों की तरफ से इस परीक्षा को रद्द करने की भी मांग की जा रही है.

झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) परीक्षा में अनियमितता के मामले में CID की तरफ से बड़ी कार्रवाई की गई है. यहां के रांची, बोकारो, पलामू और हजारीबाग में लगभग 15 से 20 जगहों पर सीआईडी की तरफ से रेड की जा रही है.सीआईडी की टीम की तरफ से परीक्षा में आने में हुई गड़बड़ियों में शामिल लोगों के खिलाफ ये जांच की जा रही है. जांच के दौरान जो भी सबूत और गवाल मिले हैं, सीआईडी उन्हीं के आधार पर ये कार्रवाई कर रही है.

दरअसल, 14वें झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को लेकर अभ्यर्थियों में भारी गुस्सा है. इस वजह से राज्य के अलग-अलग जगहों पर तैयारी करने वाले छात्रों का विरोध प्रदर्शन भी दिखाई दिया. विरोध करने वाले लोगों ने परीक्षा रद्द करने के साथ-साथ JPSC में स्ट्रक्चरल सुधार करने की मांग की. अभ्यर्थियों का मानना है कि इस तरह की हुई गड़बड़ियों के लिए जांच केंद्रीय जांच एजेंसियों की तरफ से कराई जाए.

परीक्षा को रद्द करने की मांग

प्रोटेस्ट साइट पर महतो ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की. उन्होंने छात्रों की मांगें सरकार के सामने रखीं. CID जांच का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ जांच शुरू करना काफी नहीं है. उन्होंने परीक्षा को ही रद्द करने की मांग की.

महतो ने कहा कि वे तब तक अपना अनशन जारी रखेंगे जब तक सरकार परीक्षा रद्द नहीं कर देती. वे भर्ती प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बहाल करने के लिए JPSC के कामकाज में बड़े सुधार नहीं करती.

विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों के समूहों ने कहा कि सरकार CBI से निष्पक्ष जांच कराए. उनका कहना है कि केवल बाहरी जांच से ही निष्पक्षता सुनिश्चित हो सकती है. अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सकती है.

कई प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा आयोजित करने वाली प्राइवेट एजेंसी, TSR डेटा प्रोसेसिंग लिमिटेड (TDPL) की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी के पिछले रिकॉर्ड के बावजूद उसे परीक्षा का काम सौंपने से पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं. ये आरोप चल रही जांच का हिस्सा हैं और अभी तक किसी न्यायिक फैसले में कंपनी की कोई गलती साबित नहीं हुई है.

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