मोदी के रिकॉर्ड कार्यकाल का ढिंढोरा पीट रहे भाजपाइयों को कांग्रेस नेताओं ने दिखाया आईना, जमकर घेरा
मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले कैसे-कैसे वादे किये गए थे कि सत्ता में आने के बाद विदेशों से कालाधन वापस लाया जाएगा। सभी के खाते में 15-15 लाख जमा किये जाएंगे, देश से गरीबी मिटा दी जाएगी। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: आपने वो कहावत तो सुनी ही होगी अपने मुँह मियां मिट्ठू होना’ आज कल ये काम कर रही है भाजपा और नरेंद्र मोदी की सरकार।
मोदी के रिकॉर्ड कार्यकाल को भाजपा ऐसे ढिंढोरा पीट रही है जैसे मानों बड़ा कद्दू पर तीर मार लिया हो। आपको याद होगा मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले कैसे-कैसे वादे किये गए थे कि सत्ता में आने के बाद विदेशों से कालाधन वापस लाया जाएगा।
सभी के खाते में 15-15 लाख जमा किये जाएंगे, देश से गरीबी मिटा दी जाएगी। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। और भी न जाने क्या क्या वादे किये गए थे लेकिन अब ये सारे दावे और वादे धरे के धरे रह गए हैं। लेकिन अब ढिंढोरा पीटा जा रहा है कि मोदी ने नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
बीजेपी नेता पीएम नरेंद्र मोदी के रिकॉर्ड कार्यकाल की बहुत प्रशंसा कर रहे हैं। आज मोदी ने जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को पार कर लिया। लगातार चुने गए प्रधानमंत्री के रूप में 4399 दिन पूरे हो गए। बीजेपी इसे बड़ी उपलब्धि बता रही है। भाजपाइयों का यह कहना है कि मोदी ने गरीबों का जीवन बदला, विकास किया, इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया और भारत को दुनिया में मजबूत बनाया। लेकिन कांग्रेस नेता इस तारीफ को खोखला बता रहे हैं।
कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि सरकार “अमृतकाल” और विकास के दावे कर रही है, लेकिन जमीन पर आम आदमी महंगाई से परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रोल, डीजल, गैस और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों की कीमतों ने गरीब और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है। कांग्रेस ने कहा कि सरकार विज्ञापनों में अर्थव्यवस्था चमका रही है, जबकि जनता महंगाई की मार झेल रही है।
सुरजेवाला ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि पिछले कुछ महीनों में जरूरी सामान की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। उन्होंने दावा किया कि अरहर दाल 110 रुपये से बढ़कर 165 रुपये किलो तक पहुंच गई है। सरसों तेल 200 रुपये लीटर के करीब बिक रहा है। चावल और आटे की कीमतों में भी बड़ा उछाल आया है।
सुरजेवाला ने कहा कि पेट्रोल 105 रुपये लीटर और घरेलू गैस सिलेंडर 942 रुपये तक पहुंच गया है। उनका आरोप है कि इससे आम परिवार का मासिक बजट बिगड़ गया है। उन्होंने कहा कहा कि डबल इंजन सरकार की वजह से जनता पर डबल मार पड़ रही है।
इसके साथ ही कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी पीएम मोदी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने भले ही स्वघोषित और संदिग्ध उपलब्धि हासिल कर ली हो, लेकिन वह देश की गर्दन पर चक्की का पाट बन गए हैं।
उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि- जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त, 1947 को भारत के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने एक ऐसी असाधारण कैबिनेट का नेतृत्व किया, जैसी मिसालें दुनिया में बहुत कम देखने को मिलती हैं। अगले पांच वर्षों में आधुनिक भारत आकार लेने लगा।
560 से अधिक रियासतों का शांतिपूर्ण तरीके से भारतीय संघ में विलय किया गया। भारत के संविधान पर बहस हुई और उसे अपनाया गया। जमींदारी प्रथा समाप्त की गई। अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई। सिंचाई और बिजली से जुड़ी कई बहुउद्देशीय परियोजनाएं शुरू की गईं।
विज्ञान और तकनीकी क्षमता के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया गया, जिसमें परमाणु ऊर्जा भी शामिल थी। भारत वैश्विक मामलों में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरा।सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार सुनिश्चित करने के लिए 17 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं वाली मतदाता सूचियां तैयार की गईं और स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनाव अक्टूबर 1951 से फरवरी 1952 के बीच कराए गए।
1947 से 1952 के बीच भारत की उपलब्धियों का यह रिकॉर्ड, जब नेहरू प्रधानमंत्री थे और जिसमें सरदार पटेल, डॉ. अंबेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सी. राजगोपालाचारी और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे दिग्गजों ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, अब पीएम मोदी द्वारा मिटाने की कोशिश की जा रही है। पीएम मोदी की नेहरू के प्रति एक अस्वाभाविक जुनून एवं सनक है। हो सकता है कि उन्होंने आज खुद घोषित और संदिग्ध रूप से गढ़े गए किसी मील के पत्थर को पार कर लिया हो, लेकिन वे भारत के गले का पत्थर हैं, क्योंकि MODI के अगुवाई में Murder of Democracy in India हो रहा है।
लोकतंत्र की वही मूल संस्थाएं-एक स्वतंत्र चुनाव आयोग और विश्वसनीय मतदाता सूची -आज खतरे में हैं। हमारी शैक्षणिक संस्थाओं के विनाश के जरिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मिटाया गया है, जैसा कि हाल ही में NEET-CBSE घोटालों से उजागर हुआ। अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण को निजीकरण और ‘Not Found Suitable’ जैसे दुर्भावनापूर्ण औजारों के जरिए कमजोर किया गया है।
और जहां पंडित नेहरू ने 1952, 1957 और 1962 में भारी और निर्णायक बहुमत से जीत हासिल की, वहीं पीएम मोदी 2024 में काफी अंतर से साधारण बहुमत भी हासिल नहीं कर पाए। उन्हें भाजपा संसदीय दल को दरकिनार कर जल्दबाजी में NDA की बैठक बुलानी पड़ी, ताकि खुद को प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार कराया जा सके। 2024 निश्चित रूप से उनके लिए जनादेश नहीं था।
कई ऐसे मुद्दे हैं जिसपर भाजपा सरकार लगातार घिर रही है। महंगाई और बेरोजगारी के साथ साथ किसानों के मुद्दे भी लंबे समय तक चर्चा का विषय रहे हैं। कृषि कानूनों के खिलाफ हुए बड़े आंदोलन को सरकार के लिए एक चुनौती माना गया था।
हालांकि बाद में सरकार ने उन कानूनों को वापस ले लिया, लेकिन आलोचकों का कहना है कि किसानों की आय और कृषि क्षेत्र की समस्याओं का स्थायी समाधान अभी भी नहीं निकल पाया है। अब विपक्ष कितना भी आरोप लगाता रहे और गरीब जनता मरती रहे लेकिन मोदी जी के कान में जूं तक नहीं रेंगती।



