शराब घोटाले में जारी गिरफ्तारियों का सिलसिला

  • अब तक 16 लोगों को किया जा चुका है गिरफ्तार
  • दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों हुए अरेस्ट
  • 2022 में हुई थी पहली गिरफ्तारी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली के कथित शराब घोटाले में आए दिन गिरफ्तारियां हो रही हैं। यह एक ऐसा मामला बन गया है जिसमें अभी तक कुछ साफ भी नहीं हो पा रहा है लेकिन बड़ी-बड़ी गिरफ्तारियां लगातार होती जा रही हैं। इस पूरे मामले में सबसे अधिक मुश्किलों का पहाड़ टूटा है दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी आम आदमी पार्टी पर। आप के कई नेता इस मामले में अब तक सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। बीती रात दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को भी अंतत: प्रवर्तन निदेशालय यानी की ईडी ने गिरफ्तार कर लिया।
केजरीवाल को ईडी अब तक 9 समन जारी कर चुकी थी, लेकिन केजरीवाल इन समनों को नजरअंदाज करते आए थे। इसके बाद केजरीवाल ने कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था, लेकिन कल ही कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था। जिसके कुछ घंटों बाद ही ईडी ने केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया। केजरीवाल की गिरफ्तारी इस मामले में नई और सबसे बड़ी गिरफ्तारी है। जाहिर है कि केजरीवाल की गिरफ्तारी दिल्ली हाई कोर्ट से उत्पाद शुल्क नीति से जुड़े धनशोधन के पहलू की जांच के सिलसिले में किसी भी तरह की सुरक्षा देने से इनकार करने के कुछ घंटों बाद हुई है। सबसे बड़ी बात कि इस कथित शराब घोटाले मामले में यह 16वीं गिरफ्तारी है। बता दें कि कथित शराब घोटाला मामले में पहली गिरफ्तारी 2022 में हुई थी। तब ईडी ने समीर महेंद्रू को 28 सितंबर 2022 को गिरफ्तार किया था। महेंद्रू देश के बड़े शराब कारोबारी हैं। महेंद्रू पर आरोप है कि उसने कथित खराब घोटाला के में दो भुगतान किए थे। इनमें से पहला दिल्ली के तत्कालीन उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के करीबी सहयोगी दिनेश अरोड़ा को एक करोड़ रुपये दिए गए थे जबकि दूसरा भुगतान गुरुग्राम स्थित कथित बिचौलिए अर्जुन पांडे को लगभग 2 से 4 करोड़ रुपये दिए गए थे। एजेंसी का दावा है कि पांडे ने विजय नायर के कहने पर रुपयों की वसूली की थी।

ये लोग किये जा चुके हैं अरेस्ट

कथित दिल्ली शराब घोटाला केस में अब तक समीर महेंद्रू, पी शरत चंद्र रेड्डी, बिनॉय बाबू, विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली, अमित अरोड़ा को गिरफ्तार कर चुकी है। ये गिरफ्तारियां 2022 में हुई हैं। इनके अलावा 2023 में ईडी ने गौतम मल्होत्रा, राजेश जोशी, राघव मगुंटा, अमन धाल, अरुण पिल्लई, मनीष सिसोदिया, दिनेश अरोड़ा और संजय सिंह को गिरफ्तार किया है। 2024 में अब तक केजरीवाल की दूसरी गिरफ्तारी है।

एक सप्ताह पहले ही हुई थी के. कविता की गिरफ्तारी

इससे पूर्व एक सप्ताह पहले ही 15 मार्च को ईडी ने तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी और भारत राष्ट्र समिति की नेता के. कविता को हैदराबाद से गिरफ्तार किया था। उन पर भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। दिल्ली शराब घोटाले में मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को ईडी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। इस मामले में अब चौथी हाई प्रोफाइल गिरफ्तारी की गई है। इन नेताओं को पीएमएलए के सेक्शन 3 और सेक्शन 4 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

के. कविता को जमानत देने से ‘सुप्रीम’ इनकार

नई दिल्ली। दिल्ली आबकारी नीति घोटाले में ईडी द्वारा गिरफ्तार की गईं बीआरएस नेता और तेलंगाना के पूर्व सीएम के चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली नहीं है। अदालत ने कविता को जमानत देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कविता की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर एक नोटिस भी जारी किया है। अदालत का कहना है कि कविता निचली अदालत में जा सकती हैं या जमानत के लिए कोई और उपाय अपना सकती हैं। अगर जमानत याचिका दायर की जाती है तो उस पर तेजी से फैसला किया जा सकता है। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने प्रोटोकॉल की अनदेखी नहीं करने का आदेश दिया। कहा कि सभी के लिए एक समान नीति का पालन करना होगा और जमानत के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट आने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।


उच्च न्यायालय ने आरोपियों को बरी करने के फैसले को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका स्वीकारी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला मामले से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा, कंपनियों और अन्य को बरी करने के फैसले को चुनौती देने वाली सीबीआई की अपील को स्वीकार कर लिया है।
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने कहा कि रिकॉर्ड में लाई गई सामग्री और पक्षकारों के वकीलों की दलीलों के आधार पर सीबीआई की ओर से दृष्टया मामला बनता है। इसके लिए गहन जांच की आवश्यकता है और अपील पर विस्तार से सुनवाई की आवश्यकता है। पीठ ने इसके साथ ही अपील की अनुमति दी और इस मामले को मई में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
सीबीआई ने नीचली अदालत के फैसले पर गुण-दोष के आधार पर विचार करने के लिए 2018 में अपील दायर की थी। इस मामले में जज ने बीते 14 मार्च को अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। विशेष अदालत ने 21 दिसंबर, 2017 को राजा, द्रमुक सांसद कनिमोझी व अन्य को 2जी घोटाले से जुड़े सीबीआई और ईडी के मामलों में बरी कर दिया था।

पीएम की औरंगजेब से तुलना राष्ट्र का अपमान: शिंदे

  • संजय राउत के बयान पर सीएम एकनाथ शिंदे ने किया पलटवार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना औरंगजेब से करने पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अब पलटवार करते हुए विपक्ष पर करारा हमला बोला है। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएम शिंदे ने कहा कि उनकी (संजय राउत) ये टिप्पणी राष्ट्र का अपमान है।
एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पीएम मोदी जिन्होंने बालासाहेब ठाकरे की राम मंदिर के सपने को पूरा किया, उनकी तुलना औरंगजेब से की जा रही है। यह राष्ट्र का अपमान है। जनता उन्हें चुनाव में इसका जवाब देगी। शिंदे ने आगे कहा कि पीएम मोदी ने अनुच्छेद 370 हटाकर बाला साहेब ठाकरे का सपना पूरा किया है। इसके बावजूद वे पीएम मोदी की तुलना औरंगजेब से कर रहे हैं।

राउत ने ये कहते हुए की थी तुलना

बता दें कि संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर हमला करने के लिए पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के गुजरात लिंक का सहारा लिया था। उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र को 400 साल पहले औरंगजेब के रूप में संकट का सामना करना पड़ा था। औरंगजेब ने जो भी कुछ किया, वह अब दिल्ली में बैठे दो नेता कर रहे हैं। औरंगजेब का जन्म गुजरात में हुआ था और मोहम्मद अली जिन्ना का भी। संजय राउत ने आगे कहा था कि देश की स्थिति शर्मनाक है। औरंगजेब सभी से बहुत प्यार से बात करता था और इसी तरह से उसने साम्राज्य पर कब्जा कर लिया था। उसने फूट डालो और शासन करो की रणनीति अपनाई थी। गुजरात के दो लोग, जो दिल्ली गए हैं वे भी कुछ ऐसा ही कर रहे हैं। इतिहास अपने आप को दोहरा रहा है।

ईडी के निशाने पर ममता के एक और मंत्री

  • बंगाल सरकार के कैबिनेट मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा के घर पर हुई छापेमारी
  • स्कूल भर्ती घोटाला मामले में हुई कार्रवाई

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
कोलकाता। लोकसभा चुनाव करीब आते ही ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स जैसी सरकारी एजेंसियों की हलचल भी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल के करोड़ों रुपये के स्कूल भर्ती घोटाला मामले में ममता बनर्जी सरकार के एक और मंत्री तक प्रवर्तन निदेशालय की आंच पहुंच गई है। ईडी ने इस सिलसिले में आज राज्यभर में पांच जगहों पर छापेमारी की है। इनमें राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा का घर भी शामिल है।
सिन्हा बीरभूम जिले के बोलपुर से टीएमसी विधायक हैं और ममता बनर्जी की सरकार में एमएसएमई और कपड़ा मंत्री हैं। आज सुबह जब प्रवर्तन निदेशालय की टीम छापेमारी करने उनके घर पहुंची तो वह अपने घर पर मौजूद नहीं थे। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोलकाता, उत्तर 24 परगना और बीरभूम में पांच जगहों पर एक साथ छापेमारी की जा रही है। अधिकारी के मुताबिक, कोलकाता और उत्तर 24 परगना में केंद्रीय एजेंसी के अफसरों ने एक बिजनेसमैन और एक टैक्स कंसल्टेंट के घर पर छापेमारी कर तलाशी ली है।

अभिषेक बनर्जी से भी हो चुकी है पूछताछ

2023 में इसी घोटाले के सिलसिले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे, टीएमसी सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से भी सीबीआई और ईडी ने पूछताछ की थी। पिछले साल अक्टूबर में, अभिषेक बनर्जी के पिता, अमित बनर्जी (ममता बनर्जी के छोटे भाई-बहनों में से एक) और उनकी मां लता बनर्जी स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर एजेंसी के सामने पेश नहीं हो सके थे। हालंकि, अभिषेक की पत्नी रुजिरा बनर्जी को जांच का सामना करना पड़ा था।

2022 में हाईकोर्ट ने दिए थे सीबीआई जांच के आदेश

कलकत्ता हाई कोर्ट ने मई 2022 में इस मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। आरोप है कि पैसे लेकर सरकारी स्कूलों में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की गई थीं। सीबीआई ने जब जांच शुरू की तो इसमें मनी लॉन्ड्रिंग की बात सामने आई। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय अवैध लेन-देन की छानबीन कर रहा है। इसी सिलसिले में ये छापेमारी की गई है। पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी सहित तृणमूल कांग्रेस के तीन विधायकों को घोटाले में उनकी कथित संलिप्तता के आरोप में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। वे अब न्यायिक हिरासत में हैं। बता दें कि इस घोटाले की सीबीआई से जांच का आदेश देने वाले कलकत्ता हाई कोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और वह भाजपा में शामिल हो गए।

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