दिल्ली हाईकोर्ट ने 4PM नेशनल चैनल को तुरंत खोलने के दिये आदेश

  • 4PM की वापसी से गूंजा लोकतंत्र जिद सच की जिंदाबाद
  • दिल्ली हाईकोर्ट की दहलीज से उठा संदेश बैन आखिरी हथियार नहीं
  • सच देर से सही लेकिन लौटता जरूर है
  • आदेश के बाद सोशल मीडिया पर समर्थन में उतरे लोग
    संपादक संजय शर्मा की दर्शकों से अपील, वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, फॉरवर्ड करें

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट का आज का फैसला सिर्फ एक फैसला नहीं है। यह फैसला वह पल है जब खामोश स्क्रीन पर एक बार फिर 4PM नेशनल न्यूज चैनल जनता की आवाज बनकर दोबारा से वापसी कर रहा है। जब एक बैन की मोहर अदालत की दहलीज पर आकर सवालों में बदल गई। जब राष्ट्र विरोध के ठप्पे के सामने सच ने सीना तानकर कहा मैं 4PM हूं और मैं मौजूद रहूंगा।
साजिश करके डिजिटल अंधेरे में धकेला गया, 4PM न्यूज चैनल एक बार फिर आखों में आंख डाल कर सवाल पूछने की आजादी के साथ वापस लौट रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट में चली सुनवाई के बाद आज ऐतिहासिक निर्णय आया है और माननीय न्यायधीश ने चैनल को फिर से खोलने के आदेश दिये हैं। 4PM फिर सवाल पूछेगा और खड़ा रहेगा हर उस आवाज के साथ जो सच के लिए उठाई जा रही हो। ध्यान रहे कि आरोपों की आंधी थी नोटिसों की बौछार थी प्रतिबंध की तलवार थी लेकिन इसके बावजूद जो नहीं टूटा वह था जिद का वह धागा जो कहता रहा सवाल पूछना गुनाह नहीं जवाब मांगना हक है। यह कहानी सिर्फ 4PM न्यूज चैनल की नहीं है, यह उस संघर्ष की कहानी है जहां एक तरफ सरकारी ताकत खड़ी थी और दूसरी तरफ एक माइक्रोफोन एक कैमरा और एक आवाज। यह वही आवाज है जिसने हर वार के बाद खुद को समेटा फिर उठी फिर बोली और आज अदालत के दरवाजे पर खड़ी होकर दुनिया से कह रही है देखो सच को रोकना असंभव है। दिल्ली हाईकोर्ट की चौखट पर चल रही यह जंग अब सिर्फ कानून की किताबों तक सीमित नहीं रही। यह लोकतंत्र के उस मूल सवाल तक पहुंच चुकी है जहां पूछा जा रहा है कि क्या असहमति को दबाया जा सकता है? क्या एक प्लेटफार्म को खामोश कर देना विचारों को खत्म कर देता है?

सवाल पूछना देश के खिलाफ नहीं होता

संपादक संजय शर्मा ने एक पत्रकार के भीतर चल रही लड़ाई, दर्द और जज्बे की कहानी को वीडियो के जरिये साझा किया है। संजय शर्मा ने खुलकर बताया कि पिछले कुछ समय में उन्हें किन-किन आरोपों का सामना करना पड़ा। उन्हें एंटी नेशनल तक कहा गया। लेकिन उन्होंने सीधे सवाल खड़े किए कि क्या मणिपुर में हुई हिंसा पर सवाल उठाना देश विरोधी है? क्या उन घटनाओं पर बात करना जहां महिलाओं के साथ अमानवीय व्यवहार हुआ गलत है? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दे पर सरकार को घेरना एंटी नेशनल कहलाता है? उनका कहना था कि एक पत्रकार का काम सत्ता से सवाल करना है न कि केवल उसकी सराहना करना। लेकिन आज के माहौल में सवाल पूछना ही अपराध बना दिया गया है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति पर सवाल उठते हैं तब उन मुद्दों पर चर्चा करना भी कुछ लोगों को देश विरोधी लगता है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि देश और सरकार अलग-अलग होते हैं और सरकार से सवाल करना देश के खिलाफ नहीं होता।

हर उस आवाज की जीत है जो सवाल पूछती है

आज अदालत का फैसला 4PM के पक्ष में आया और चैनल की एक बार फिर वापसी हुई। यह दूर तक गूंजने वाला वह साफ संदेश है जो बताने के लिए काफी है कि प्रतिबंध अंतिम रास्ता नहीं हो सकता। यह बताता है कि हर कार्रवाई से पहले जवाबदेही की कसौटी पर खुद को तौलना होगा। आज की जीत सिर्फ 4PM की जीत नहीं है बल्कि हर उस आवाज की जीत है जो सवाल पूछती है। हर उस पत्रकार की जीत है जो जोखिम लेकर भी सच्चाई के करीब जाना चाहता है। और हर उस दर्शक की जीत है जिसने इंतजार किया इस यकीन के साथ कि सच देर से सही लेकिन लौटता जरूर है।

डरे नहीं, डंटे रहे संजय शर्मा

संजय शर्मा ने बताया कि इन आरोपों ने उन्हें अंदर से तोड़ा, उन्हें गहरी तकलीफ हुई। उन्होंने कहा कि मुझ पर ऐसे आरोप लगाए गए जिनके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था। यह कहते हुए उनका दर्द साफ झलकता है। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने खुद को संभाले रखा। उन्होंने अपनी टीम का जिक्र करते हुए कहा कि उनके साथ करीब 80 लोगों की टीम काम करती है। यह सिर्फ एक चैनल नहीं बल्कि एक परिवार है। उन्होंने कहा कि उनकी टीम हमेशा उन्हें मुस्कुराते हुए देखना चाहती है और यही वजह थी कि उन्होंने अपने दर्द को छुपाकर रखा। मैं अंदर से टूट रहा था लेकिन बाहर से मुस्कुराता रहा ताकि मेरी टीम का मनोबल बना रहे। यह बात उनके नेतृत्व और जिम्मेदारी को भी दिखाती है। एक तरफ व्यक्तिगत पीड़ा दूसरी तरफ टीम की उम्मीदें इन दोनों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता। लेकिन संजय शर्मा ने यह जिम्मेदारी निभाने की कोशिश की। अपने संदेश के अंत में उन्होंने दर्शकों से भावुक अपील भी की। उन्होंने कहा कि अगर लोगों को उनकी पत्रकारिता पर भरोसा है तो वे एक बार फिर उनका साथ दें। चैनल को शेयर करें, उसे आगे बढ़ाएं, ताकि वह फिर से उसी ऊंचाई तक पहुंच सके जहां से उसने अपनी पहचान बनाई थी।

सोशल मीडिया पर ईद दीवाली की खुशियां

जैसे ही कोर्ट का आदेश सामने आया सोशल मीडिया पर खुशी की लहर दौड़ गई। मानो ईद और दीवाली एक साथ उतर आई हो। समर्थकों ने इसे सत्य की जीत बताया तो आलोचकों के मुंह पर भी यह फैसला एक सख्त जवाब बनकर सामने आया। पिछले कुछ समय से 4PM और उसके संपादक संजय शर्मा पर जिस तरह का दबाव बनाया गया वह किसी से छिपा नहीं है। आरोप, जांच, नोटिस- हर हथियार आजमाया गया। लेकिन आज अदालत ने साफ कर दिया कि कानून के दायरे में रहकर किसी की आवाज को यूं दबाया नहीं जा सकता। संजय शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स हो या फिर यूटयूब, हर जगह हर कोई उनके जज्बे को सलाम करता हुआ दिखाई दे रहा है। कोई उनके सब्र के बारे में बात कर रहा है तो कोई उनकी लड़ाई लडऩे के स्टाइल के बारे में। जाहिर सी बात है जो दर्द, जो तकलीफ उन्होंने झेली है हर कोई नहीं झेल सकता और हर कोई इसतरह के दबाव से उभर कर ऊपर नहीं आ सकता। संजय शर्मा एक महान योद्धा की तरह सोशल मीडिया पर उभर कर सामने आये हैं और हर कोई उनकी तारीफ करता हुआ दिखाई दे रहा है। पिछला समय उनके और चैनल के लिए ठीक नहीं रहा। लेकिन तमाम बड़े मीडिया हाउस जिसमें द हिंदू जैसा अंग्रेजी का अखबार भी शामिल है ने उनका साथ दिया और उनके पक्ष में पूरा फुल पेज का आर्टिकल छापा।

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