पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त? गाइडलाइंस तय करने की मांग
याचिका में हिंसा भड़काने वालों की जवाबदेही तय करने और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए एक समान गाइडलाइन बनाने की मांग की गई है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ड्यूटी के दौरान पुलिस बल के लिए मजबूत कानूनी सुरक्षा और स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग की है. याचिका में हिंसा भड़काने वालों की जवाबदेही तय करने और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए एक समान गाइडलाइन बनाने की मांग की गई है.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में नीट पेपर लीक को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान जमकर हिंसा हुई थी, जिसमें न सिर्फ प्रदर्शनकारी बल्कि कई पुलिसकर्मी भी गंभीर रूप से जख्मी हुए थे. वहीं अब पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है.
जानकारी के मुताबिक घायल हुए पुलिस अधिकारियों के परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. याचिका में ड्यूटी के दौरान हिंसा का सामना करने वाले पुलिसकर्मियों के लिए मजबूत कानूनी सुरक्षा और स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई है.
यह याचिका ACP कैलाश सिंह बिष्ट, ASI संदीप, कांस्टेबल धीरज और ASI हेमेन्दर राठी के परिजनों की तरफ से दायर की गई है. ये सभी सभी जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर घायल हो गए थे.
गाइडलाइंस तय करने की मांग
याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि पुलिसकर्मियों को भी जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का समान संरक्षण मिले और पुलिस के खिलाफ हिंसा भड़काने या उकसाने वाले लोगों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए जाएं. इसके साथ ही ये भी कहा गया है कि ड्यूटी पर तैनात पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट गाइडलाइन बनाई जाए.
अधिकारों की रक्षा के लिए दिशा-निर्देश जरूरी’
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिसकर्मी अक्सर हिंसा का सामना करते हैं. ऐसे में उनकी सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी हैं. याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
सुप्रीम कोर्ट पुलिस कार्रवाई पर कर रहा सुनवाई
यह याचिका ऐसे समय में दायर की गई है, जब सुप्रीम कोर्ट सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित ज्यादती से जुड़े मामलों की भी सुनवाई कर रहा है. हाल ही में अदालत ने कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और इसे छीना नहीं जा सकता. कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके विरोध का अधिकार संविधान द्वारा सुरक्षित किया गया है और सिर्फ विरोध-प्रदर्शन के आधार पर लाठीचार्ज को सही नहीं ठहराया जा सकता.
हालांकि कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि पूरे देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए एक समान प्रोटोकॉल तैयार करने पर विचार किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि जहां नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, वहीं प्रशासन के पास ऐसे असामाजिक तत्वों से निपटने के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए, जो प्रदर्शन के दौरान हिंसा फैलाने की कोशिश करते हैं.



