कुर्सी गयी, सियासत बची : धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

  • सरकार का रणनीतिक दांव या छात्र आंदोलन की पहली बड़ी जीत?

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कई दिनों से जिस सवाल पर देश की राजनीति अटकी हुई थी उसका जवाब आखिरकार आज मिल गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह फैसला ऐसे समय आया जब छात्र आंदोलन, विपक्ष का दबाव और सीजेपी के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन लगातार सरकार को घेर रहा था। इस्तीफा उस निर्धारित दौर की बातचीत से पहले आया जिसमें सीजेपी प्रतिनिधिमंडल की केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात होनी थी। यह केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं है बल्कि पिछले कयी सप्ताह से शिक्षा व्यवस्था परीक्षा प्रणाली और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर चल रहे संघर्ष का निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। हालांकि सरकार की ओर से इसे नैतिक जिम्मेदारी और आगे सुधारों का रास्ता बताया जा रहा है वहीं आंदोलनकारी इसे अपने संघर्ष की पहली बड़ी सफलता बता रहे हैं।

बड़ी जीत, बड़े मायने

सीजेपी का प्रर्दशन के बाद भी सरकार के कान पर जूं नहीं रेंग रही थी। तभी राहुल गांधी ने गेंद को बाउंड्री के बाहर फेंकते हुए पीएम आवास को घेर लिया। बस यही सियासत का टर्निग प्वाइंट बना और राहुल गांधी स्टार बन गये छात्रों के बीच। बॉल बीजेपी के पाले में डालकर राहुल गांधी ने जीत का सीटी बजा दी। धमेन्द्र प्रधान का इस्तीफा तो उसी दिन तय हो गया था जब राहुल ने खुफिया एजेंसियों की आंखों मे धूल झोकते हुए पीएम आवास को घेर लिया था। इस पूरे एपिसोड के बाद पीएम मोदी ने खुद कमान संभाली और वीडियो संदेश के जरिये संवाद का रास्ता खोला। सरकार किसी भी कीमत पर धमेन्द्र प्रधान के इस्तीफे को राहुल के दबाव के तौर पर मैसेज नहीं देना चाहती थी। इसीलिए उनके इस्तीफे में टाइम लगा और सीजेपी से बातचीत के दरवाजे खोले। हालांकि सरकार के लिए एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई वाली स्थिति अभी भी बनी हुई है। परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के बाद देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। दिल्ली का जंतर-मंतर आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार प्रभावित छात्रों के लिए जवाबदेही और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग शामिल थी। सरकार ने बातचीत का रास्ता चुना। केंद्रीय मंत्रियों और सीजेपी प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की चर्चा हुई लेकिन सबसे बड़ा गतिरोध शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर ही बना रहा। सरकार पहले इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रही थी जबकि आंदोलनकारी इसे गैर समझौतावादी मांग बता रहे थे।

झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए : दीपके

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों के भारी प्रदर्शन के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस पर कॉकरोच जनता पार्टी का पहला रिएक्शन सामने आया है। अभिजीत दीपके ने कहा कि झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए। इससे पहले सीजेपी ने साफ तौर पर कह दिया था कि नीट पेपर लीक से जुड़े विवाद के खिलाफ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कोई समझौता नहीं हो सकता है। इसके अलावा सीजेपी ने प्रदर्शनकारी छात्रों को बेरहमी से पीटे जाने पर उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। इसके अलावा नीट परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिए जाने की भी मांग की गई है।

इस्तीफे से पहले बदला पूरा राजनीतिक समीकरण

आज की प्रस्तावित वार्ता से पहले धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया। समाचार एजेंसियों और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने अपने बयान में युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करने की बात कही और परीक्षा प्रणाली में सुधारों की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख किया। इस्तीफे के बाद वार्ता का पूरा स्वरूप बदल गया। अब चर्चा केवल मंत्री के पद पर नहीं बल्कि आगे के शिक्षा सुधारों परीक्षा प्रणाली और आंदोलन की अन्य मांगों पर होगी।

सोनम वांगचुक का टूटा दिल, बोले- अनशन पर सवाल उठाने वालों पर धिक्कार

अनशन खत्म करने के एलान के बाद से एक्टिीविस्ट सोनम वांगचुक ट्रोलर्स के निशाने पर आ गये हैं और उन पर तरह तरह के मीम बन रहे हैं। अपने उपर बनते मीम से वह नाराज है और उन्होंने एक्स पर वीडियो शेयर कर अपनी बात रखी है। वांगचुक ने कहा है कि फिजिकली लड़कर झगड़कर हड़ताल के अंदर एक और हड़ताल करके जमीन पर लेटकर जो ताकत 20वें दिन मुझमें बची थी वह ताकत लगाकर मुझे बाहर निकलना पड़ा। दोस्तों यह वीडियो मैं थोड़ा दुख और हैरानी के साथ बना रहा हूं। अपने भाइयों बहनों और छात्रों के लिए 26 दिन भूखा रहने के बाद जिसमें कि मेरा 11 किलो शरीर खत्म हो गया है मसल्स चले गए हैं बॉडी के ऑर्गन्स और दिमाग लगभग डैमेज हो चुके हैं लद्दाख की कड़कड़ाती ठंड से निकलकर दिल्ली की तपती धरती पर अनशन करने के बाद क्या मुझे किसी से चरित्र प्रमाणपत्र लेना होगा कि मेरा अनशन कितना पवित्र था मैंने अनशन तोड़ा तो क्यों तोड़ा और किसके हाथों तोड़ा और किसके हाथों से नहीं तोड़ा। मुझे लगातार फोन आ रहे हैं कि अनशन तोडऩे के लिए मैंने कोई डील की है। अगर मुझे डील करनी होती तो 26 दिन भूखा रहने की क्या जरूरत थी?

पेपर लीक पर 10 साल जेल और 10 करोड़ जुर्माने वाले बिल को मंजूरी

पीएम मोदी की अध्यक्षता में संसद भवन परिसर में हुई कैबिनेट बैठक में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 24 में संशोधन को मंजूरी दी गई। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि नए प्रावधानों का मकसद उन गलत तौर-तरीकों के खिलाफ सख्त रोक लगाना है जिनकी वजह से बार-बार राष्ट्रीय परीक्षाओं में बाधा आई है और लाखों छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। मंजूर किए गए ड्राफ्ट के अनुसार, पेपर लीक में शामिल लोगों को कम से कम पांच साल की जेल और जुर्माना हो सकता है। पेपर लीक के संगठित मामलों में बिल में 10 साल तक की जेल और अधिकतम 10 करोड़ रुपए के जुर्माने का प्रस्ताव है। यह मौजूदा कानून की तुलना में काफी ज्यादा है। वर्तमान कानून के तहत व्यक्तिगत अपराधियों के लिए तीन से पांच वर्ष तक की सजा, जबकि पेपर लीक और नकल से जुड़े संगठित अपराधों के मामलों में पांच से 10 वर्ष तक के कारावास तथा न्यूनतम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।

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