केरलम में आपदा का तांडव, कई लापता, सैकड़ों घर बर्बाद
केरल में 31 जुलाई की रात से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने राज्य के पहाड़ी इलाकों में भारी तबाही मचाई.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: केरल में 31 जुलाई की रात से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने राज्य के पहाड़ी इलाकों में भारी तबाही मचाई.
इसके कारण हुए भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ की चपेट में आने से अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है. मुख्यमंत्री ने राज्य के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का प्रशासनिक अधिकारियों से जायजा लिया है.
केरलम में 31 जुलाई रात से 1 अगस्त तक जोरदार बारिश हुई. इस भयंकर बारिश की वजह से जुड़ी घटनाओं में आठ लोगों की मौत हो गई. भारी बारिश से राज्य में भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और बड़े स्तर पर तबाही हुई. खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में ज्यादा नुकसान हुआ.
ये वायनाड में टनल निर्माण स्थल पर सिर्फ एक महीने पहले हुई उस घटना के बाद आई है, जिसमें ज्यादा बारिश से हुए मलबे के फिसलने से आठ लोगों की जान चली गई थी. राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश जारी रहने और भूस्खलन की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने राजस्व मंत्री, मुख्य सचिव और जिलाधिकारियों से संपर्क किया है.
केरलम CMO ने बताया, “ताजा आंकड़ों के मुताबिक, आठ लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि आठ लोग अभी भी लापता हैं. 13 लोग घायल हुए हैं. राज्य भर में कुल 5,792 लोगों को 209 राहत कैंपों में पहुंचाया गया है. 27 घर पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं और 196 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है. सरकार उन लोगों के परिवारों को मदद देगी जिनकी जान गई है, साथ ही उन्हें भी जिनके घर और रोजगार छिन गए हैं.”
बारिश से कब मिलेगी राहत?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अनुमान लगाया है कि रविवार से बारिश की तीव्रता कम हो जाएगी. तिरुवनंतपुरम तथा कोल्लम जैसे दक्षिणी जिले अब खतरे से बाहर हैं क्योंकि बादलों का घेरा उत्तर की ओर बढ़ गया है. हालांकि बारिश की तीव्रता कम होगी, लेकिन त्रिशूर के उत्तर में स्थित ज़िलों में रविवार को भी बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी रहेगी, क्योंकि पिछले दो दिनों में हुई भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं.
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने कहा कि राज्य किसी भी आपातकालीन स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है और आपदा प्रबंधन नेटवर्क किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है. सरकार ने आपदा से निपटने की अपनी तैयारी को और तेज कर दिया है.
मंत्रियों को सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में कैंप करने और राहत व बचाव कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने का निर्देश दिया है. ये फैसला मुख्यमंत्री द्वारा मंत्रियों और जिला कलेक्टरों के साथ बारिश की बदलती स्थिति की समीक्षा करने के बाद लिया गया.



