चिल्लूपार के बदलाव का संकल्प लेकर राजनीति में आए दुर्गेश मदन यादव, बोले- जनता ने मौका दिया तो इतिहास बदल देंगे

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

इसी क्रम में समाजसेवी दुर्गेश मदन यादव ने रविवार को बड़हलगंज स्थित एक मैरेज हॉल में पत्रकार वार्ता कर अपने राजनीतिक इरादों और क्षेत्र के विकास को लेकर अपना विजन साझा किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का फैसला उनका निजी निर्णय नहीं है, बल्कि क्षेत्र की जनता, समर्थकों और शुभचिंतकों के आग्रह का परिणाम है। यदि जनता उन्हें प्रतिनिधित्व करने का मौका देती है तो वह चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र की तस्वीर बदलने के लिए पूरी ताकत से काम करेंगे।

जनता की मांग पर चुनावी मैदान में उतरने का दावा

पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए दुर्गेश मदन यादव ने कहा कि लंबे समय से वह क्षेत्र में सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि देश और विदेश में रहने वाले उनके समर्थकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया है।

उन्होंने कहा कि जनता का आशीर्वाद मिलने पर वह विधानसभा में चिल्लूपार क्षेत्र की समस्याओं को मजबूती से उठाएंगे और विकास कार्यों को अपनी प्राथमिकता बनाएंगे। उनका उद्देश्य राजनीति को सेवा का माध्यम बनाना है।

निर्दलीय चुनाव लड़ने का किया ऐलान

दुर्गेश मदन यादव ने बताया कि उनके पिता समाजवादी विचारधारा से जुड़े रहे हैं, लेकिन उन्होंने आगामी चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरने का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा कि सामाजिक क्षेत्र में लगातार काम करने के बावजूद उन्हें किसी राजनीतिक दल से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने बिना किसी राजनीतिक पद के कई ऐसे कार्य किए हैं, जिनसे आम लोगों को सीधा लाभ मिला है।

सामूहिक विवाह और सामाजिक कार्यों का किया जिक्र

उन्होंने अपने सामाजिक कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए उन्होंने सामूहिक विवाह कार्यक्रमों का आयोजन कराया। इन आयोजनों में कई गरीब परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय कई राजनीतिक दलों और नेताओं ने सहयोग नहीं किया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य हमेशा समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों की मदद करना रहा है।

विकास के एजेंडे पर रखी अपनी बात

दुर्गेश मदन यादव ने कहा कि यदि उन्हें जनता का समर्थन मिला तो चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, बेहतर विद्यालयों की स्थापना, गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग, किसानों की समस्याओं के समाधान और बेरोजगार युवाओं को अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में विकास की कई संभावनाएं हैं, लेकिन उन्हें धरातल पर उतारने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत है।

सामाजिक न्याय को लेकर भी उठाए सवाल

पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने सामाजिक न्याय के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के नाम पर राजनीति करने के बजाय उनके विचारों और सिद्धांतों को जीवन में लागू करने की जरूरत है।

उन्होंने दावा किया कि उनके द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह समारोहों में बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति वर्ग की बेटियों का विवाह कराया गया, लेकिन उस समय उनके नाम पर राजनीति करने वाले कई लोग सहयोग के लिए आगे नहीं आए।

सरयू नदी कटान की समस्या को बताया बड़ी चुनौती

चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं में शामिल सरयू नदी के कटान का मुद्दा उठाते हुए दुर्गेश मदन यादव ने कहा कि उरुवा से लेकर बड़हलगंज और विधानसभा क्षेत्र के अंतिम छोर तक कई गांव वर्षों से इस समस्या का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यदि जनता उन्हें मौका देती है तो वह सबसे पहले कटान प्रभावित गांवों का दौरा करेंगे और स्थायी समाधान के लिए शासन-प्रशासन के स्तर पर प्रभावी प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को विधानसभा में भी मजबूती से उठाया जाएगा।

पत्रकार वार्ता में मौजूद रहे कई लोग

पत्रकार वार्ता की शुरुआत बिरहा गायक दीपक यादव ने पत्रकारों का स्वागत करते हुए की। उन्होंने कहा कि दुर्गेश मदन यादव क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने और विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं।

इस अवसर पर ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख छोटेलाल यादव, संगम उर्फ गुड्डू यादव, नित्या सिंह, समाजसेवी अमरनाथ यादव, क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेश यादव, हरीलाल, सर्वजीत उर्फ निक्कू समेत बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग मौजूद रहे।
रिपोर्ट- अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर

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