बस फ्री पर सफर गायब, रक्षाबंधन पर योगी का ये है तोहफा

- महिलाओं का आरोप बसें रुकी ही नहीं,
- सडक़ किनारे इंतजार करती रह गईं बहनें
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बस फ्री लेकिन बस ही नहीं आई। रक्षाबंधन पर उत्तर प्रदेश की महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुफ्त बस यात्रा का ऐलान किया तो सरकार ने इसे बहनों के लिए बड़ा तोहफा बताया। लेकिन सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो अब इस दावे की चमक पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कहीं महिलाएं बस के इंतजार में सडक़ किनारे खड़ी हैं कहीं हाथ देकर बस रोकने की कोशिश कर रही हैं और कहीं उनका आरोप है कि बस चालक ने बस रोकी ही नहीं। यानी सरकारी ऐलान कागज पर मुफ्त सफर का था लेकिन सडक़ पर सवाल यह खड़ा हो गया कि जब बस ही नहीं रुकेगी तो मुफ्त यात्रा आखिर होगी कैसे?
रक्षाबंधन पर महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा देना उत्तर प्रदेश की राजनीति में कोई पहली पहल नहीं है। पिछली सरकारों के दौर में भी त्योहारों पर महिलाओं को ऐसी सुविधाएं दी जाती रही हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि आज शिकायत दर्ज कराने के लिए अखबार के अगले दिन का इंतजार नहीं करना पड़ता। मोबाइल कैमरा ऑन होता है, वीडियो बनता है और कुछ ही मिनटों में सरकार की घोषणा और जमीन की हकीकत आमने-सामने खड़ी हो जाती है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहें हैं वीडियो
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कई महिलाओं की शिकायत यही है कि वे बस स्टॉप या सडक़ किनारे खड़ी रहीं, लेकिन बसें नहीं रुकीं। कुछ महिलाओं ने दावा किया कि उन्होंने हाथ देकर बस रोकने की कोशिश की, बावजूद इसके बस आगे निकल गई। इस तरह की शिकायतों की मौजूदगी ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या मुफ्त यात्रा की घोषणा के साथ सरकार ने बसों को महिलाओं को बैठाने की स्पष्ट और प्रभावी व्यवस्था भी सुनिश्चित की थी? क्योंकि सरकारी योजना की सफलता सिर्फ घोषणा से तय नहीं होती। सफलता तब मानी जाती है जब जिस महिला के लिए सुविधा घोषित हुई है, वह वास्तव में उसका लाभ उठा सके। अगर सडक़ पर खड़ी महिला बस को हाथ देती रहे और बस उसकी आंखों के सामने निकल जाए तो उसके लिए सरकारी घोषणा और मुफ्त यात्रा में जमीन-आसमान का अंतर रह जाता है। रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार है। सरकार ने इसे महिलाओं के लिए सुविधा देने का अवसर बनाया, अच्छी बात है। लेकिन बहनों को सिर्फ घोषणा नहीं चाहिए—बस चाहिए, जो रुके भी। अब सवाल सीधा है—योगी सरकार ने बस यात्रा तो मुफ्त कर दी, क्या महिलाओं तक बस पहुंचाने की जिम्मेदारी भी पूरी की? बस फ्री थी, लेकिन अगर बस रुकी ही नहीं तो फिर यह सुविधा किसके लिए थी?
अतिरिक्त बसों की पर्याप्त व्यवस्था पर भी सवाल
और यही वह जगह है जहां सरकार से सवाल बनता है। क्या परिवहन विभाग ने रक्षाबंधन के लिए अतिरिक्त बसों की पर्याप्त व्यवस्था की थी? क्या चालक-परिचालकों को महिला यात्रियों को मुफ्त यात्रा सुविधा देने के साथ उन्हें प्राथमिकता से बस में बैठाने के निर्देश दिए गए थे? क्या प्रमुख रूटों और बस स्टॉप पर निगरानी की व्यवस्था थी? और अगर सोशल मीडिया पर इतनी महिलाओं ने अपनी परेशानी दर्ज कराई है तो परिवहन विभाग ने इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई की? सरकार कह सकती है कि लाखों महिलाओं ने इस सुविधा का लाभ उठाया। यह आंकड़ा अपनी जगह सही हो सकता है। लेकिन लोकतंत्र में एक महिला की शिकायत भी सुनना जरूरी है। क्योंकि योजना का आंकड़ा सरकार बताती है, लेकिन उसकी असली कहानी सडक़ बताती है।



