गन्ना मजदूर से लेकर सब्जी विक्रेता तक परेशान
बोले -इस बार भाजपा छोड़ कोई आ जाए

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नकुड़, सहारनपुर। नकुड़ विधानसभा में हमारी टीम ने जमीनी हकीकत जानी। खेत में काम करने वाले मजदूर से लेकर दुकानदार तक ने अपनी पीड़ा बताई।
खनन माफिया के आतंक का खुलासा
तीसरे ग्रामीण ने खनन माफिया पर गंभीर आरोप लगाए -खनन माफिया के इतने हौसले बुलंद हैं कि गांव में किसी की मृत्यु हो जाए या शादी-विवाह हो, तब भी खनन नहीं रुकता। अगर रोकने की कोशिश करो तो मारपीट पर उतर आते हैं और कहते हैं – चौकी-थाने पर पैसा जाता है, क्या कर लोगे। थाने पर शिकायत करने जाओ तो वहां पहले से सेटिंग रहती है, थाने से ही फोन कर दिया जाता है और वो भाग जाते हैं। प्रधान की भी 5 से 6 ट्रॉली खुद खनन में चल रही हैं।
बिजली बिल से त्रस्त सब्जी विक्रेता
मजदूरी और सब्जी की दुकान से परिवार पालने वाले चौथे व्यक्ति ने कहा – मैं मजदूरी करता हूं, सब्जी की दुकान लगाता हूं। हमारा कोई फायदा नहीं हुआ। बिजली बिल पर उसने कहा -पहले मेरा बिल 7०-8० रुपये आता था। पिछले महीने 6600 रुपये का बिल आया, इस महीने 6000 रुपये का और एक बार 66० रुपये का बिल आया। समझ नहीं आता बिल कैसे बन रहा है। मेरी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। आप ही बताइए भाई साहब, मैं बिजली का बिल भरूं या घर का खर्चा चलाऊं?

आकाश आनंद और पीडीए केबारे में जानकारी नहीं
गन्ने के खेत में मजदूरी करने वाले मजदूर ने कहा हम बहुजन समाज से आते हैं। हम दिन भर खेत में मजदूरी करते हैं। पत्रकार द्वारा आकाश आनंद और पीडीए के बारे में पूछने पर मजदूर ने साफ कहा -मैं आकाश आनंद और पीडीए को नहीं जानता। राजनीतिक रुख पर उसने कहा पिछली बार हमने भाजपा को वोट किया था, लेकिन इस बार वोट भाजपा को नहीं, बसपा को देंगे, क्योंकि हमारा वोट किसी और पार्टी में माना ही नहीं जाता।
सडक़ के गड्ढों से परेशान ग्रामीण
दूसरे ग्रामीण ने सडक़ों की बदहाली पर कहा – सडक़ में सिर्फ गड्ढे भरकर खानापूर्ति की जाती है, नई सडक़ बनती ही नहीं। जो पैसा आता है वो बड़े अधिकारी जेब में रख लेते हैं, सिर्फ फोटो खींचकर कागजों में काम पूरा दिखा देते हैं। उसने बताया -खनन की बड़ी-बड़ी गाडिय़ों से सडक़ें टूट जाती हैं, बच्चों को स्कूल जाने में भी बहुत दिक्कत होती है।
घघौंड गांव यमुना नदी के किनारे अवैध खनन जारी
वहीं वहां कु छ गांवों खनन तेजी से हा रहा है। घघौंड गांव यमुना नदी के किनारे है और हरियाणा बॉर्डर जस्ट सटा हुआ है। इस कारण से यहां खनन लगातार हो रहा है । ये अवैध खनन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस बात को मुंह चिढ़ा रहे है जिसमें वो दावे करतें हैं कि कहीं भी खनन नहीं हो रहा है।
योगी सरकार को कोर्ट का करारा झटका
यूपी कोआपरेटिव के48 सहायक प्रबंधकों की सेवा बहाल
भाजपा सरकार ने 2०19 में 5० सहायक प्रबंधकों की सेवाएं समाप्त कर दी थीं,सपा सरकार में हुई थी भर्तियां
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। यूपी को योगी सरकार को करारा झटका लगा है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने हाल ही में बर्खास्तगी के आदेश को रद्द करते हुए 48 सहायक प्रबंधकों को सेवा में वापस लेने का निर्देश दिया है, यह स्पष्ट करते हुए कि बिना स्वतंत्र विवेक के केवल उच्च अधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई नहीं की जा सकती। बता दें योगी सरकार ने इन भर्तियों में धांधली की बात कहकेइन्हे रद कर दिया था। बाद में ये सभी कोर्ट चले गए थे।
यूपी कोऑपरेटिव बैंक (यूपीसीबी) प्रबंध समिति ने 5० सहायक प्रबंधकों की बर्खास्त किया था। सभी को एक माह का वेतन देकर नौकरी से हटा दिया गया था। ये सभी भर्तियां समाजवादी पार्टी की सरकार केदौरान हुई थी। अरोप लगा था कि चयनित सभी सहायक प्रबंधक अफसरों और नेताओं के करीबी थे। इनके लिए भर्ती के लिए जरूरी शैक्षिक योग्यता में भी फेरबदल किया गया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि सक्षम प्राधिकारी स्वतंत्र रूप से अपने विवेक का इस्तेमाल किए बिना केवल प्रमुख सचिव के निर्देश पर उनकी सेवाओं को समाप्त नहीं कर सकता है। न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने मनीष कुमार और 47 अन्य द्वारा दायर अलग-अलग रिट याचिकाओं को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने सात जून, 19 के आदेश सहित बर्खास्तगी से संबंधित आदेशों को रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को अपने संबंधित पदों पर कर्तव्यों को फिर से शुरू करने की अनुमति दी जाए।
यूपीसीबी इम्पलाइज एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री जय सिंह ने की थी शिकायत
यूपीसीबी इम्पलाइज एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री जय सिंह ने इन भर्तियों में हुई गड़बड़ी की शिकायत की थी। उनका आरोप था कि भर्ती के दौरान नियम-कानून को ताक पर रख रसूखदारों के परिवार के सदस्यों को नौकरियां बांटी गई।
2०18 में भर्ती प्रक्रिया की एसआईटी जांच के आदेश दिए गए थे
2०17 के बाद सीएम योगी आदित्य नाथ ने अप्रैल 2०18 में भर्ती प्रक्रिया की एसआईटी जांच के आदेश दिए थे। तत्कालीन कृषि उत्पादन आयुक्त प्रभात कुमार ने आईएएस अधिकारी पीके उपाध्याय से इस मामले की जांच कराई। जिसमें सभी शिकायतें सही पाई गई। इसके बाद भर्ती घोटाले और अन्य अनियमितताओं के आरोप में यूपीसीबी के तत्कालीन एमडी को निलंबित कर दिया गया था। इस मामले में जांच के बाद सरकार ने विधिक राय ली। कुल 53 पदों के लिए भर्ती हुई थी। जिसमें से सहायक प्रबंधक कम्प्यूटर के दो पदों की नियुक्तियां सही पाई गई। जबकि एक अभ्यर्थी ने चयन के बाद नियुक्ति नहीं ली थी। वर्ष 012 से 17 के बीच सहकारिता विभाग में हुई नियुक्तियों में भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी जांच के आदेश दिए थे। जांच में यह सामने आया कि मनचाहे उम्मीदवारों को लाभ पहुँचाने के लिए बिना पात्रता नियमों का पालन किए नियुक्तियाँ की गईं और ऐन मौके पर नियमों में बदलाव किए गए। एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन प्रबंध निदेशकों (हीरालाल यादव और रविकांत सिंह) सहित कई अधिकारियों और सेवा मंडल के पदाधिकारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे।अनियमितताओं के पाए जाने के बाद कई नियुक्तियों और सेवाओं को समाप्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी।
पाकिस्तान में के शीर्ष अस्पताल में लगी आग 15 नवजातों की मौत
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बुधवार को एक सरकारी अस्पताल के स्त्री रोग वार्ड में आग लगी। इसके कारण 15 नवजात शिशुओं की मौत हो गई। यह जानकारी डॉन की रिपोर्ट के अनुसार है। यह घटना राजधानी के सबसे बड़े और अच्छी सुविधाओं वाले सरकारी अस्पताल, पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में हुई।
जियो न्यूज ने बताया कि आग लगने की घटना में 15 बच्चों की मौत हो गई। हालांकि, हताहतों की संख्या के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पीआईएमएस की प्रवक्ता डॉ. अनीजा जलील ने डॉन अखबार को बताया कि जिस वार्ड में आग लगी, वहां 15 बच्चे थे। उन्होंने कहा, हो सकता है कि रात में कुछ बच्चों को छुट्टी दे दी गई हो, इसलिए अभी हताहतों की सही संख्या नहीं बताई जा सकती।
घटना के कारण के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी मालूम होती है। उन्होंने बताया कि आग सुबह करीब 7 बजे लगी थी। उन्होंने कहा कि आग बुझा दी गई है, लेकिन कूलिंग प्रोसेस में कुछ समय लगेगा। वहीं, रेस्क्यू अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल की नर्सरी के अंदर एयर कंडीशनर का कंप्रेसर फटने के बाद की वजह से आग लगी। इसके बाद आग तेजी से फैल गई और वार्ड में धुआं भर गया।
तिब्बत की बाढ़ से नेपाल में तबाही, कई गांव और हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट बहे, 28 पुलिसकर्मी लापता
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
काठमांडू। नेपाल में तिब्बत की सीमा से लगे इलाके में अचानक आई जबरदस्त बाढ़ ने कई गांवों और प्रोजेक्ट साइट्स को तबाह दिया और 28 पुलिसकर्मी तापता हैं। अधिकारियों ने भारी जान-माल के नुकसान की आशंका जताते हुए नदी के किनारे रहने वाले लोगों से ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि रसुवा के पहाड़ी जिले में स्याप्रु बेसी और तिमुरे इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। साथ ही उन्होंने भोटे कोशी नदी के किनारे रहने वाले लोगों से ज्यादा सावधानी बरतने को कहा है।जिला प्रशासक नरेंद्र परियार ने रॉयटर्स को बताया, हमें गांवों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट साइट्स के बह जाने की खबरें मिली हैं। उन्होंने आगे कहा कि अभी जान-माल के नुकसान का कोई पक्का अनुमान उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा, काफी जान-माल का नुकसान हो सकता है लेकिन अभी मैं पक्के तौर पर कुछ नहीं कह सकता। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा कि बचाव और राहत टीमों के साथ-साथ पुलिस और सेना को भी मदद के काम में लगाया गया है। उन्होंने कहा, निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने अपने बयान में कहा, नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि वे ज्यादा सावधानी बरतें और सतर्क रहें। इस बाढ़ के कारण सुरक्षा बल के 28 जवान लापता हो गए हैं। जिन 28 सुरक्षाकर्मियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, उनमें से 19 नेपाल पुलिस के हैं और नौ आम्र्ड पुलिस फोर्स के हैं।
पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की गिरफ्तारी पर सुप्रीम रोक
यूपी पुलिस की कार्रवाई पर अंतरिम रोक
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के मामले में उन्हें अंतरिम राहत देते हुए किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अंतरिम सुरक्षा उनके खिलाफ भविष्य में दर्ज की जाने वाली किसी एफआईआर पर भी लागू होगी।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं। जस्टिस संदीप मेहता ने राजस्थान हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस को संदिग्ध गतिविधियों के कारण बदलने की अपील की पीठ ने अभिषेक उपाध्याय की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया कि उन्हें संबंधित एफआईआर की प्रति उपलब्ध कराई जाए।
याचिकाकर्ता पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी : सीजेआई
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि बार-बार एफआईआर दर्ज होने से आपकी आशंका को हम समझते हैं। हमें सच्चाई का पता नहीं है, लेकिन आपकी आशंका समझ में आती है। आप हाईकोर्ट जाइए और अगर मामला बनता है तो एफआईआर रद्द कराने की मांग कर सकते हैं। तब तक हम आपको अंतरिम सुरक्षा दे सकते हैं। इसके बाद पीठ ने आदेश जारी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ पहले से दर्ज एफआईआर या भविष्य में दर्ज की जाने वाली किसी एफआईआर के संबंध में फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
एफआईआर की कॉपी दिए जाने आदेश
गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त को अगली सुनवाई तक एफआईआर की कॉपी दिए जाने के संबंध में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी। सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट प्रदीप राय ने अभिषेक उपाध्याय की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल ने अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चंदे में कथित गड़बड़ी का मामला सामने लाया था और अन्य मामलों पर भी खोजी रिपोर्टिंग की है।
एफआईआर झूठे और मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित : वकील
सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट प्रदीप राय ने अभिषेक उपाध्याय की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल ने अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चंदे में कथित गड़बड़ी का मामला सामने लाया था और अन्य मामलों पर भी खोजी रिपोर्टिंग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर झूठे और मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है तथा उन्हें स्वतंत्र पत्रकारिता के कारण परेशान किया जा रहा है। प्रदीप राय ने यह भी कहा कि घटना के समय की सीसीटीव फुटेज से आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकती है और इन रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाना चाहिए। उन्होंने निष्पक्ष जांच के लिए किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग भी की।



