इबोला वायरस पर वैश्विक चिंता, भारत ने जारी किया ट्रैवल अलर्ट

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने DRC और युगांडा में बढ़ते इबोला के मामलों को देखते हुए PHEIC घोषित किया है. इसके बाद भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की एडवाइजरी जारी की है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने DRC और युगांडा में बढ़ते इबोला के मामलों को देखते हुए PHEIC घोषित किया है. इसके बाद भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की एडवाइजरी जारी की है.

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने यहां पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (PHEIC) घोषित किया है.कांगो और युगांडा में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं.इस बीच भारत ने भी अलर्ट जारी किया है.

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने रविवार (24 मई) को भारतीय नागरिकों को इबोला प्रभावित देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह जारी की है. यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब WHO ने इबोला वायरस के बढ़ते प्रकोप को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (PHEIC) घोषित किया है.

इन जगहों पर यात्रा से बचने की सलाह
कांगो
युगांडा
दक्षिण सूडान

यात्रा संबंधी दिशा-निर्देश जारी
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (IHR) 2005 के तहत 17 मई 2026 को WHO ने इस स्थिति को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल माना. इसके बाद भारत सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए नागरिकों के लिए यात्रा संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

अफ्रीका CDC ने भी जताई चिंता
अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) ने भी कांगो और युगांडा में फैल रहे बुंडीबुग्यो स्ट्रेन (Bundibugyo strain) के इबोला संक्रमण को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ कॉन्टिनेंटल सिक्योरिटी घोषित किया है.

WHO की आपातकालीन समिति ने 22 मई को सदस्य देशों को सलाह दी कि प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी बढ़ाई जाए ताकि प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले बुखार या संदिग्ध लक्षण वाले यात्रियों की पहचान की जा सके. इसके साथ ही लोगों को उन इलाकों की यात्रा से बचने की भी सलाह दी गई है जहां वायरस की पुष्टि हुई है.

अब तक 176 संदिग्ध मौतें
WHO के आंकड़ों के मुताबिक, 21 मई तक कांगों में 746 संदिग्ध मामले और 176 संदिग्ध मौतें दर्ज की गई हैं. वहीं दोनों देशों में अब तक 85 मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें युगांडा के दो मामले भी शामिल हैं. इन मामलों में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है. विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण सूडान समेत पड़ोसी देशों में संक्रमण फैलने का खतरा काफी अधिक है. यही वजह है कि भारत ने इन देशों की यात्रा न करने को कहा है.

घनी आबादी और अस्पताल में जद में
WHO के डायरेक्टर-जनरल डॉ टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस इबोला के मुताबिक इबोला के मामले अब केवल दूरदराज के इलाकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी सामने आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि घनी आबादी वाले शहरों में संक्रमण फैलना चिंता का बड़ा कारण है. इसके साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों में भी संक्रमण और मौतों के मामले सामने आ रहें है जो कि यह संकेत कर कहा है कि अस्पतालों में भी वायरस का प्रकोप फैलने लगा है. WHO के अनुसार, यदि स्वास्थ्य व्यवस्था के भीतर संक्रमण बढ़ता है तो हालात और ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं.

क्या है इबोला वायरस ?
इबोला एक गंभीर वायरल हेमरेजिक फीवर है, जो बुंडीबुग्यो वायरस स्ट्रेन से फैलता है. यह बीमारी बेहद घातक मानी जाती है और इसकी मृत्यु दर काफी ज्यादा होती है. फिलहाल इस स्ट्रेन के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है.

हालात पर सरकार की नजर
हालांकि भारत में अब तक इस स्ट्रेन का कोई मामला सामने नहीं आया है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सभी जरूरी एहतियाती उपाय अपनाए जा रहे हैं. सरकार ने कहा है कि जो भारतीय नागरिक फिलहाल प्रभावित देशों में रह रहे हैं या यात्रा कर रहे हैं, वो स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें और अतिरिक्त सतर्कता बरतें. मंत्रालय ने साफ किया कि अगली सूचना तक इन देशों की गैर-जरूरी यात्रा टालना ही सबसे सुरक्षित विकल्प होगा.

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