टीबी मरीजों की पहचान में निजी डॉक्टरों की होगी बड़ी भूमिका, रेफरल-नोटिफिकेशन पर जोर
गोरखपुर में टीबी उन्मूलन अभियान को मजबूत करने के लिए निजी आयुष, होम्योपैथिक और यूनानी चिकित्सकों से सहयोग मांगा गया है। मरीजों के रेफरल और नोटिफिकेशन पर जोर दिया गया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: गोरखपुर में टीबी के खिलाफ चल रही मुहिम को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब निजी चिकित्सा क्षेत्र का सहयोग बढ़ा रहा है। मंगलवार को सीएमओ कार्यालय के प्रेरणा श्री सभागार में आयोजित बैठक में आयुष, होम्योपैथिक और यूनानी चिकित्सकों से टीबी के लक्षण वाले मरीजों को सरकारी केंद्रों पर जांच के लिए भेजने और उपचाराधीन मरीजों का नोटिफिकेशन कराने की अपील की गई।
लक्षण वाले मरीजों को सरकारी केंद्र भेजने पर जोर
जिला क्षय रोग उन्मूलन अधिकारी डॉ. संतोष श्रीवास्तव ने कहा कि नए मरीजों की पहचान और समय पर उपचार शुरू कराने में निजी चिकित्सकों की भूमिका अहम है। बैठक में चिकित्सकों से कहा गया कि उनके पास आने वाले टीबी के लक्षण वाले मरीजों को जिला क्षय रोग केंद्र या नजदीकी सरकारी अस्पताल भेजा जाए, ताकि जांच और उपचार की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सके।
नोटिफिकेशन से मरीजों तक पहुंचेंगी सरकारी सुविधाएं
बैठक में निजी क्षेत्र में उपचार ले रहे टीबी मरीजों के अनिवार्य नोटिफिकेशन पर भी विशेष जोर दिया गया। विभाग के अनुसार, नोटिफिकेशन से मरीजों को सरकारी सुविधाओं से जोड़ने के साथ उनके संपर्क में आने वाले लोगों की निगरानी और बचाव संबंधी दवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। निजी चिकित्सकों को नए मरीजों की पहचान में सहयोग के लिए प्रोत्साहन राशि के प्रावधान की भी जानकारी दी गई।
निजी क्षेत्र के सहयोग से मजबूत होगी निगरानी
स्वास्थ्य विभाग ने निजी चिकित्सकों से टीबी संदिग्ध मरीजों को जांच के लिए रेफर करने और उपचाराधीन मरीजों की जानकारी दर्ज कराने का आश्वासन लिया। बैठक में नीमा अध्यक्ष डॉ. जय प्रकाश नारायण, सचिव डॉ. ओपी सिंह, संरक्षक डॉ. जेपी श्रीवास्तव, डिप्टी डीटीओ डॉ. विराट स्वरूप श्रीवास्तव समेत अन्य अधिकारी और चिकित्सक मौजूद रहे।
रिपोर्ट – अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर
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