मोबाइल से खेत तक… न्यूरल नेटवर्क बदल रहा रोजमर्रा की जिंदगी, जानिए AI के ये कमाल

न्यूरल नेटवर्क अब भाषा अनुवाद, मेडिकल इमेज, डिजिटल पेमेंट सुरक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में रोजमर्रा की जिंदगी आसान बना रहे हैं। तिलक राज मिश्र ने AI के उपयोग बताए।

4पीएम न्यूज नेटवर्क:  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब सिर्फ बड़ी तकनीकी कंपनियों या प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है। मोबाइल में रियल-टाइम ट्रांसलेशन से लेकर मेडिकल इमेज की जांच और डिजिटल पेमेंट में संदिग्ध ट्रांजेक्शन पकड़ने तक, न्यूरल नेटवर्क रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है। एमएमएमयूटी के एल्युमनी इंजीनियर तिलक राज मिश्र ने इसके बढ़ते उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी।

डेटा से पैटर्न सीखता है न्यूरल नेटवर्क

तिलक राज मिश्र ने बताया कि सरल भाषा में न्यूरल नेटवर्क ऐसी कंप्यूटिंग तकनीक है, जो बड़ी मात्रा में डेटा से पैटर्न पहचानकर सीख सकती है और उसके आधार पर अनुमान लगा सकती है। मोबाइल में रियल-टाइम भाषा अनुवाद इसका एक उदाहरण है। इससे अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले लोगों के बीच संवाद आसान हुआ है और शिक्षा व व्यापार में भी इसका उपयोग बढ़ा है।

मेडिकल इमेज से डिजिटल पेमेंट तक इस्तेमाल

चिकित्सा क्षेत्र में AI आधारित सिस्टम एक्स-रे और एमआरआई जैसी मेडिकल इमेज के विश्लेषण में चिकित्सकों की सहायता कर सकते हैं। वहीं बैंकिंग और डिजिटल भुगतान में न्यूरल नेटवर्क सामान्य लेनदेन से अलग गतिविधियों को पहचानकर संदिग्ध ट्रांजेक्शन को चिन्हित करने में मदद कर सकता है।

किसानों के लिए भी उपयोगी तकनीक

कृषि में फसलों की तस्वीरों का विश्लेषण कर कुछ AI आधारित एप्लीकेशन संभावित रोग या कीट की पहचान में सहायता करते हैं। मौसम और कृषि से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। तिलक राज मिश्र ने कहा कि AI का उद्देश्य इंसानों की जगह लेना नहीं, बल्कि उनकी क्षमता बढ़ाना है। उन्होंने तकनीक के लाभ के साथ उसकी सीमाओं और संभावित जोखिमों को समझने पर भी जोर दिया।

रिपोर्ट – अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर

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