CM की सुरक्षा के आगे हार गई इंसानियत? सड़क पर एक घंटे तक रुकी रही अंतिम यात्रा

बांदा में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्मशान जा रही शव वाहन को करीब एक घंटे तक रोके जाने का आरोप है। घटना के बाद वीआईपी सुरक्षा और मानवीय संवेदनाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था और आम नागरिकों की परेशानियों को लेकर बहस अक्सर होती रही है। गुरुवार को उत्तर प्रदेश के बांदा में सामने आई एक घटना ने इसी बहस को फिर से चर्चा में ला दिया। आरोप है कि मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के चलते श्मशान घाट जा रही एक शव वाहन को करीब एक घंटे तक रोक दिया गया। इस दौरान परिजन अंतिम संस्कार के लिए रास्ता देने की गुहार लगाते रहे, लेकिन उन्हें काफी देर तक अनुमति नहीं मिली।

श्मशान जा रही शव वाहन को कालू कुआं चौराहे पर रोका गया

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कालू कुआं चौराहे पर पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए शव वाहन को रोक दिया। वाहन में मृतक का पार्थिव शरीर था और परिवार अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट जा रहा था। परिजनों ने पुलिस से हाथ जोड़कर रास्ता देने की अपील की, लेकिन आरोप है कि उनकी बात पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया। मौके पर मौजूद लोगों ने भी मानवीय आधार पर वाहन को जाने देने की मांग की।

विरोध बढ़ने पर शव वाहन को मिली अनुमति

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब मौके पर भीड़ बढ़ी, भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी आपत्ति जताई और मीडिया पहुंची, तब पुलिस ने केवल शव वाहन को आगे जाने दिया। हालांकि, अंतिम यात्रा में शामिल कई अन्य लोगों को चौराहे पर ही रोक दिया गया। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे।

CM निर्धारित समय से देर से पहुंचे, उठे मानवीय संवेदनाओं पर सवाल

बताया जा रहा है कि जिस कार्यक्रम के लिए इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी, मुख्यमंत्री स्वयं निर्धारित समय से लगभग एक घंटे बाद बांदा पहुंचे। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था के दौरान अंतिम यात्रा जैसी मानवीय परिस्थितियों के लिए विशेष व्यवस्था या अपवाद नहीं होना चाहिए था। हालांकि, इस मामले में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

रिपोर्ट – इक़बाल खान

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