बांदा के 15 गांवों में ‘हर घर नल-जल’ का असर, आईआईटी मद्रास के सर्वे में चौंकाने वाले नतीजे

बांदा के 15 गांवों में जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल-जल योजना का असर दिखा। IIT मद्रास के सर्वे में महिलाओं और बच्चों के जीवन में सुधार, स्वच्छ पानी और बेहतर स्वास्थ्य की पुष्टि हुई।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कभी पानी की किल्लत के लिए पहचाने जाने वाले बुंदेलखंड क्षेत्र से अब एक सकारात्मक तस्वीर सामने आ रही है। बांदा जिले के कई गांवों में ‘हर घर नल-जल’ योजना ने लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाया है। हाल ही में किए गए एक स्वतंत्र मूल्यांकन में इस योजना के प्रभाव को जमीनी स्तर पर परखा गया, जिसमें नतीजे उत्साहजनक पाए गए।

आईआईटी मद्रास की टीम ने किया स्थलीय सर्वे

IIT Madras के समाज कार्य विभाग की टीम ने बांदा जिले के 15 गांवों में जल जीवन मिशन के तहत चल रही योजना का विस्तृत सर्वे किया। डॉ. गजल श्रीवास्तव और डॉ. त्रिलोक बलोदी के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि गांवों में नल के जरिए पानी पहुंचने से ग्रामीण जीवन में व्यापक सुधार हुआ है।

महिलाओं और बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव

जल जीवन मिशन के तहत घर-घर पानी पहुंचने से सबसे बड़ा फायदा महिलाओं को हुआ है। पहले जहां उन्हें दूर-दूर से पानी ढोना पड़ता था, अब वही समय वे बच्चों की पढ़ाई और घरेलू कार्यों में लगा पा रही हैं। स्कूलों में साफ पेयजल मिलने से बच्चों के स्वास्थ्य और स्वच्छता में भी सुधार दर्ज किया गया है, जो ग्रामीण विकास के लिए अहम संकेत माना जा रहा है।

गांव-गांव में नियमित संचालन और निगरानी

सर्वे के दौरान अदरी, लसड़ा, डांडामऊ, दोहतरा, सहूरपुर, माटा, जसईपुर, जौरही, ददरिया, बांधापुरवा, मथनाखेड़ा, थरथुवा, अछाह, अनवन और मियांबरौली गांवों में जल टंकियों का संचालन नियमित पाया गया। इन गांवों में 5 सदस्यीय महिला एफटीके (Field Test Kit) टीम द्वारा पानी की गुणवत्ता की जांच और क्लोरीनेशन की प्रक्रिया भी सक्रिय रूप से चल रही है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि ग्रामीणों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल मिले।

ग्राम समितियों की बढ़ी भागीदारी

ग्राम पेयजल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) की सक्रियता भी इस बदलाव की अहम वजह बनी है। ग्रामीण अब न सिर्फ योजना का लाभ ले रहे हैं, बल्कि इसके संचालन और रखरखाव में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। गांवों में शिकायत रजिस्टर और संबंधित अधिकारियों, जूनियर इंजीनियर, पंप ऑपरेटर और कार्यदायी संस्था के इंजीनियरों, के संपर्क नंबर सार्वजनिक रूप से दर्ज किए गए हैं, जिससे समस्याओं का समाधान तेजी से हो रहा है।

10 साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी

योजना के क्रियान्वयन में लगी NCC Limited ने बताया कि वह अगले 10 वर्षों तक इस परियोजना के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निभा रही है। संस्था का दावा है कि किसी भी तकनीकी या संचालन से जुड़ी समस्या का समाधान तत्काल किया जा रहा है। अधिशासी अभियंता विमल कुमार वर्मा और जूनियर इंजीनियर रमेश गुप्ता द्वारा गांवों में नियमित बैठकें कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि नल के पानी का उपयोग सिर्फ पेयजल और घरेलू कार्यों के लिए ही किया जाए। ग्राम प्रधानों के माध्यम से भी यह संदेश लगातार पहुंचाया जा रहा है।

रिपोर्ट -इक़बाल खान

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