किसके हाथ में है नागरिकता तय करने का अधिकार? जानिए पूरी जानकारी
भारत में किसी की नागरिकता तय करने का अंतिम अधिकार केंद्र सरकार के पास है. नागरिकता से संबंधित किसी भी विवाद का निपटारा 'नागरिकता अधिनियम' के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा ही किया जा सकता है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भारत में किसी की नागरिकता तय करने का अंतिम अधिकार केंद्र सरकार के पास है.
नागरिकता से संबंधित किसी भी विवाद का निपटारा ‘नागरिकता अधिनियम’ के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा ही किया जा सकता है. ये पूरी तरह से केंद्र सरकार का विषय है. राज्यों के पास इस पर कानून बनाने का कोई अधिकार नहीं.
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का अधिकार नहीं है. आयोग की भूमिका केवल मतदाता सूची के प्रबंधन तक सीमित है. मतदाता सूची से नाम हटने पर भी नागरिकता समाप्त नहीं होती है.
भारत में किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करने का अंतिम अधिकार केंद्र सरकार (केंद्रीय गृह मंत्रालय) के पास है. संविधान के अनुच्छेद-11 के तहत संसद को नागरिकता के अधिकार को कानून द्वारा विनियमित करने की संपूर्ण शक्ति प्राप्त है. इसी आधार पर नागरिकता अधिनियम-1955 लागू किया गया है.
कानूनी प्रक्रिया: नागरिकता से संबंधित किसी भी विवाद का निपटारा ‘नागरिकता अधिनियम’ के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा ही किया जा सकता है.
संवैधानिक प्रावधान: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के अर्जन (Acquisition), समाप्ति (Termination) और नागरिकता से संबंधित अन्य सभी मामलों पर कानून बनाने का विशेष अधिकार देता है.
केंद्रीय सूची: नागरिकता पूरी तरह से केंद्र सरकार का विषय है. राज्यों की विधानसभाओं के पास इस पर कानून बनाने का कोई अधिकार नहीं होता.
नागरिकता अधिनियम-1955: संसद ने अपनी इसी शक्ति का उपयोग करके नागरिकता अधिनियम-1955 को लागू किया था.
नागरिकता तय करने के मुख्य आधार
जन्म से
वंशानुगत
पंजीकरण द्वारा
प्राकृतिक रूप से / देशीयकरण
क्षेत्र शामिल होने पर (यदि कोई नया क्षेत्र भारत का हिस्सा बनता है, तो केंद्र सरकार वहां के लोगों की नागरिकता तय करती है)
महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण: सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न सरकारी अधिसूचनाओं ने नागरिकता को लेकर कुछ जरूरी बातें साफ की हैं-
पहचान पत्र नागरिकता का सबूत नहीं: आधार कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट केवल पहचान पत्र या यात्रा दस्तावेज हैं, ये नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं. सक्षम प्राधिकारी: नागरिकता से जुड़े किसी भी विवाद या दावे का निपटारा केवल नागरिकता अधिनियम के तहत गृह मंत्रालय या कानून द्वारा निर्धारित न्यायिक न्यायाधिकरण द्वारा ही किया जा सकता है.



