मिडिल ईस्ट तनाव के बीच एक्टिव हुआ भारत, ऊर्जा और सुरक्षा के लिए यूरोप से बढ़ा रहा तालमेल
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत ने ऊर्जा और सुरक्षा को लेकर कूटनीतिक पहल तेज कर दी है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी फ्रांस और जर्मनी दौरे पर हैं, जबकि विदेश मंत्री एस जयशंकर यूएई में ऊर्जा साझेदारी पर चर्चा कर रहे हैं।

4 पीएम न्यूज नेटवर्कः मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच भारत ने अपनी कूटनीति की रफ्तार तेज कर दी है। तेल, गैस और सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों को लेकर अब भारत एक साथ कई देशों के साथ बातचीत कर रहा है। इसी कड़ी में विदेश सचिव विक्रम मिसरी यूरोप के दौरे पर निकल रहे हैं, जबकि विदेश मंत्री एस जयशंकर यूएई पहुंच चुके हैं।
मिडिल ईस्ट संकट: भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का सीधा असर भारत पर पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा करता है। अगर यहां हालात और बिगड़ते हैं या युद्ध लंबा खिंचता है, तो भारत को महंगे दामों पर तेल और गैस खरीदनी पड़ सकती है। यही वजह है कि भारत अब पहले से ही विकल्प तैयार करने में जुट गया है।
A pleasure to address the inaugural session of the 9th Indian Ocean Conference alongside Prime Minister @Ramgoolam_Dr of Mauritius and @rammadhav_, President @indfoundation.
Made the following key points :
➡️ The Indian Ocean is not just a framework but an ecosystem, a resource… pic.twitter.com/fEKnwdXD1P
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) April 10, 2026
अमेरिका के बाद अब यूरोप पर फोकस
विदेश सचिव विक्रम मिसरी हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका का दौरा कर चुके हैं, जहां उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों से मुलाकात की। अब वह फ्रांस और जर्मनी की तीन दिवसीय यात्रा पर जा रहे हैं, जहां भारत के हितों को मजबूत करने पर फोकस रहेगा।
फ्रांस में क्या होगा एजेंडा?
फ्रांस में विदेश सचिव, फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के महासचिव मार्टिन ब्रियेंस के साथ ‘भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय परामर्श’ की सह-अध्यक्षता करेंगे। इस दौरान रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल टेक्नोलॉजी और AI जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। साथ ही वैश्विक और क्षेत्रीय हालात पर भी बातचीत होगी।
जर्मनी में व्यापार और टेक्नोलॉजी पर जोर
जर्मनी में मिसरी, जर्मन विदेश कार्यालय के राज्य सचिव गेजा एंड्रियास वॉन गेयर के साथ बैठक करेंगे। यहां मुख्य फोकस व्यापार और निवेश, रक्षा सहयोग, ग्रीन एनर्जी, टेक्नोलॉजी, शिक्षा और विकास साझेदारी पर रहेगा। साथ ही दुनिया के मौजूदा हालात पर भी चर्चा की जाएगी।
सीजफायर के बीच कूटनीति तेज
इस बीच ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर का ऐलान हुआ है, और इस्लामाबाद में युद्धविराम को लेकर बातचीत जारी है। इन बदलते हालात के बीच भारत हर स्तर पर अपनी रणनीति मजबूत कर रहा है, ताकि किसी भी स्थिति में देश की ऊर्जा और सुरक्षा प्रभावित न हो।
यूएई में जयशंकर, ऊर्जा पर बड़ी बातचीत
दूसरी ओर, विदेश मंत्री एस जयशंकर संयुक्त अरब अमीरात पहुंचे हैं। यहां वह ऊर्जा सप्लाई, रणनीतिक साझेदारी और निवेश को लेकर अहम बातचीत कर रहे हैं। इसे भारत के बड़े “एनर्जी मिशन” का हिस्सा माना जा रहा है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह पूरा मिशन?
हाल ही में इमैनुएल मैक्रों और फ्रेडरिक मेर्ज भारत का दौरा कर चुके हैं। ऐसे में विदेश सचिव का यह यूरोप दौरा दोनों देशों के साथ रिश्तों को और मजबूत करने का मौका है। भारत इस मौके का इस्तेमाल करते हुए:
- ऊर्जा के नए स्रोत तलाशना चाहता है
- रक्षा सौदों को आगे बढ़ाना चाहता है
- नई टेक्नोलॉजी साझेदारी मजबूत करना चाहता है
दुनिया तेजी से बदल रही है और हर संकट नए मौके भी लेकर आता है। मिडिल ईस्ट के तनाव के बीच भारत जिस तरह से एक्टिव कूटनीति कर रहा है, वह दिखाता है कि अब देश सिर्फ हालात का इंतजार नहीं कर रहा, बल्कि पहले से तैयारी कर रहा है। आने वाले दिनों में यह रणनीति भारत की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों के लिए अहम साबित हो सकती है।
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