ईरान-इजराइल टकराव तेज: हाइफा रिफाइनरी निशाने पर, हॉर्मुज में खतरा बढ़ा
ईरान ने न सिर्फ तेहरान पर हुए ऑयल रिफाइनरी हमले का हिसाब 'हाइफा' की ऑयल रिफाइनरी पर हमला करके बराबर किया है, बल्कि हॉर्मुज पर भी बारूदी सुरंग बिछाने का ऐलान कर दिया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कल तक जो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू चार-पांच दिन में ईरान फतह करने का दावा कर रहे थे, अब ईरान ने उन्हें ऐसा ठीक किया है कि वे सुलह-सुलह की गुहार लगाना शुरू कर चुके हैं। एक ओर जहाँ हॉर्मुज पर अमेरिका का सबसे बड़ा झूठ पकड़ा गया है और ट्रंप के खास मंत्री क्रिस राइट को अपना ट्वीट डिलीट कर भागना पड़ा है, तो दूसरी ओर पूरी दुनिया में अमेरिका की भयंकर फजीहत हुई है।
ऐसे में ईरान ने न सिर्फ तेहरान पर हुए ऑयल रिफाइनरी हमले का हिसाब ‘हाइफा’ की ऑयल रिफाइनरी पर हमला करके बराबर किया है, बल्कि हॉर्मुज पर भी बारूदी सुरंग बिछाने का ऐलान कर दिया है। इससे आधी दुनिया में तेल और गैस का संकट पहले से अधिक गहरा गया है। कहाँ से यह दावा सामने आया है कि ट्रंप सुलह की गुहार लगाना शुरू कर चुके हैं और कैसे ट्रंप के करीबी मंत्री का झूठ रंगे हाथों पकड़ा गया है—यह सब कुछ हम आपको आगे अपनी इस आठ मिनट की रिपोर्ट में बताएंगे। साथ ही इस पर भी चर्चा करेंगे कि क्यों अब हॉर्मुज से जहाजों का गुजरना आसान नहीं रह गया है।
अब जंग सिर्फ एक मोर्चे पर नहीं, बल्कि कच्चे तेल का एक नया मोर्चा खुल गया है। चूंकि जंग 12वें दिन में पहुँच गई है, इसलिए एशिया और यूरोप के देशों में तेल, गैस और खाद्य सामग्री को लेकर संकट गहराने लगा है। कई छोटे मुल्कों में इमरजेंसी के हालात पैदा हो गए हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह हॉर्मुज का बंद होना है।
एशिया और यूरोप के समस्त तेल, गैस और खाद्य पदार्थ इसी रास्ते से जाते हैं। हॉर्मुज एक 38 किलोमीटर का संकरा रास्ता है जो ईरान से सटा हुआ है। जंग शुरू होने के साथ ही ईरान ने इस रास्ते को बंद कर दिया था, जो अब तक बंद है। ट्रंप वैसे तो हर दिन यह दावा करते हैं और धमकी देते हैं कि यह रास्ता उन्होंने खुलवा दिया है, लेकिन सच यह है कि यह रास्ता अभी भी पूरी तरह से बंद है।
चूंकि इस रास्ते पर ईरान का कड़ा पहरा है और रास्ता संकरा होने की वजह से यहाँ ईरान को हरा पाना भी कठिन है; क्योंकि एक छोटी सी नाव ही तेल और गैस से भरे जहाजों को तबाह करने के लिए काफी है। ऐसे में कोई भी देश रिस्क लेना बिल्कुल नहीं चाह रहा है।
कल इस मामले को लेकर ट्रंप ने धमकी भी दी थी कि अगर हॉर्मुज को नहीं खोला गया तो 20 गुना तेज हमला करेंगे, लेकिन कल रात का हमला उतना तेज नहीं था जितना दावा किया गया था, क्योंकि ट्रंप कहीं न कहीं हॉर्मुज को लेकर सहम गए हैं। पूरी दुनिया में तेल, गैस और खाद्य पदार्थों के बढ़ते संकट और तेजी से रफ्तार पकड़ती महंगाई से हर कोई परेशान होने लगा है।
हालांकि, कल शाम ट्रंप के एक बेहद खास ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने दावा किया था कि हॉर्मुज खोल दिया गया है और इसके लिए अमेरिकी नेवी ने बड़ा सैन्य अभियान चलाया है, जिससे अब हॉर्मुज के आसपास फंसे जहाजों का निकलना शुरू हो गया है। क्रिस राइट ने बाकायदा एक तेल भरे जहाज के निकलने का वीडियो भी अपलोड किया।
जैसे ही यह खबर आई, पूरी दुनिया का शेयर बाजार झूम उठा और तुरंत तेल की कीमतों में 6 प्रतिशत की गिरावट भी दर्ज की गई। लेकिन थोड़ी ही देर में यह झूठ का गुब्बारा फूट गया और पूरी दुनिया ट्रंप सरकार के झूठ पर तंज कसने लगी। यहाँ तक कि ट्रंप के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट को ट्वीट डिलीट करके भागना पड़ा। इसके बाद यह बात पूरी तरह साफ हो गई कि हॉर्मुज पर ईरान का कब्जा बरकरार है।
अब ईरान ने एक नया दावा पेश किया है कि हॉर्मुज पर उसने बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं। यहाँ से जो भी तेल, गैस या खाद्य सामग्री का जहाज जाएगा, वह अपने आप नष्ट हो जाएगा। ऐसे में अचानक ट्रंप भड़के हैं और अब जाकर यह समझ पाए हैं कि हॉर्मुज कितना अहम है। मीडिया के हवाले से कुछ दावे इस तरह के भी सामने आए हैं कि ट्रंप अब अपनी पूरी जंग का फोकस हॉर्मुज पर ही करना चाहते हैं। बड़ा दावा यह है कि वे हॉर्मुज के बगल में स्थित ‘खार्ग आइलैंड’ पर कब्जा चाहते हैं।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रंप सरकार इस आइलैंड पर कब्जे को लेकर सैन्य विकल्पों पर विचार कर रही है, क्योंकि यह ईरान की तेल कमाई का सबसे बड़ा सेंटर माना जाता है। दरअसल, ईरान के करीब 80 से 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात इसी आइलैंड से होता है। यहाँ बड़े तेल टर्मिनल, पाइपलाइन, स्टोरेज टैंक और जहाजों में तेल भरने की फैसिलिटी मौजूद है।
यहाँ से हर दिन करीब 70 लाख बैरल तक तेल जहाजों में भरा जा सकता है। 1960 के दशक में विदेशी निवेश के बाद इस जगह को बड़े ऑयल एक्सपोर्ट सेंटर के तौर पर डेवलप किया गया था और तब से यह ईरान की ऑयल सप्लाई की रीढ़ बन गया। खार्ग आइलैंड स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बेहद करीब है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है; दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर इस इलाके में हमला होता है या जहाजों की आवाजाही रुकती है, तो पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन इस बात पर विचार कर रहा है कि अगर खार्ग आइलैंड के तेल टर्मिनल को तबाह कर दिया जाए या उस पर कब्जा कर लिया जाए, तो ईरान की सबसे बड़ी आय बंद हो सकती है। हालांकि, यह काम इतना आसान नहीं है। ईरान कई बार ऐसे टैंकरों का इस्तेमाल करता है जिन्हें ‘डार्क फ्लीट’ कहा जाता है। ये जहाज अपनी लोकेशन दिखाने वाली ट्रैकिंग मशीन बंद कर देते हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।
खार्ग आइलैंड फारस की खाड़ी में ईरान के तट से करीब 25 से 30 किलोमीटर दूर स्थित है। हाल ही में एक बड़ा तेल टैंकर हॉर्मुज स्ट्रेट पार करते समय कुछ समय के लिए ट्रैकिंग से गायब हो गया था और बाद में फिर दिखाई दिया। रिपोर्ट्स में कहा गया कि वह जहाज एशिया की ओर जा रहा था। हालांकि, यह सब आसान नहीं होगा।
यही वजह है कि ट्रंप सरकार कहीं न कहीं सुलह-समझौते के चक्कर में भी दिखाई दे रही है। आपको बता दें कि कल सुबह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को फोन किया था और एक घंटे तक लंबी वार्ता चली। सुलह-समझौते को लेकर क्या बातचीत फाइनल हुई या क्या फैसला लिया गया, यह बात आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आई है। हाँ, इतना जरूर था कि कल पुतिन ने ट्रंप से बात करने के बाद शाम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशियान से बातचीत की थी। लेकिन इससे पहले ही ट्रंप ने ‘फॉक्स न्यूज’ के एक सवाल के जवाब में यह बात कही थी कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं।
ऐसे में यह बात बहुत हद तक साफ हो गई है कि जो अकड़ अमेरिका और ट्रंप की जंग की शुरुआत में थी, वह कहीं न कहीं ढीली पड़ गई है। एक ओर जहाँ ट्रंप के दूत के रूप में पुतिन दोनों ओर से बातचीत कर रहे हैं और जिस तरीके से बड़े हमले का दावा करने के बाद भी ईरान पर रात में कोई बहुत बड़ा हमला नहीं हुआ है, उससे इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि कहीं न कहीं बातचीत की संभावना बन रही है। कल ही ईरान के विदेश मंत्री ने कहा था कि बातचीत तभी संभव है जब ईरान पर होने वाले हमले तत्काल रोके जाएं। आपको बता दें कि रात में हमले तो हुए हैं, लेकिन इतने बड़े हमले नहीं हुए जितना दावा किया गया था कि “आज की रात ईरान पर सबसे भारी रात होगी”।
हाँ, इतना जरूर है कि ईरान ने कल रात अपनी तेहरान रिफाइनरी पर हुई बमबारी का हिसाब-किताब बराबर किया है। ईरान ने अपने आधिकारिक अकाउंट से वीडियो जारी किया है कि इजराइल की ‘हाइफा ऑयल रिफाइनरी’ पर हमला किया गया है, जिससे इजराइल को काफी नुकसान पहुँचा है और इसके बाद से इजराइल की सड़कों पर सन्नाटा पसर गया है। हालांकि, इस सबके बीच ईरान की ओर से अभी भी ताबड़तोड़ हमले जारी हैं। मिडिल ईस्ट में ईरान लगातार अमेरिकी बेसों और अमेरिकी दूतावासों को निशाना बना रहा है। इस बीच सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रूस और चीन के बाद अब नॉर्थ कोरिया भी ईरान के समर्थन में उतर आया है। नॉर्थ कोरिया ने कहा है कि वह ईरान के नए सुप्रीम लीडर को चुनने के फैसले का सम्मान करता है।
उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि ईरान की जनता को अपने देश के सर्वोच्च नेता को चुनने का पूरा अधिकार है। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के निधन के बाद उनके दूसरे बेटे मुजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। उत्तर कोरिया ने अमेरिका और इजराइल पर आरोप लगाया कि उनके कदमों से क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को नुकसान पहुँच रहा है और दुनिया में अस्थिरता बढ़ रही है।
ऐसे में एक ओर जहाँ हॉर्मुज बंद होने से पूरी दुनिया में खलबली मच गई है और ट्रंप के तेवर लगातार ढीले पड़ रहे हैं। जंग को झूठ से जीतने वाले ट्रंप के मंत्री जी ट्वीट डिलीट कर फरार हो चुके हैं और ईरान की ओर से हॉर्मुज में बारूदी सुरंग बिछाने के दावे से हड़कंप मच चुका है। ट्रंप के पास अब सिर्फ दो रास्ते हैं—या तो वे हॉर्मुज को खुलवाएं या फिर ईरान के आगे नतमस्तक हो जाएं। हालांकि, जो संकेत आ रहे हैं, वे इसी बात के हैं कि जंग में बातचीत के जरिए रास्ता निकाला जा सकता है।



