इलाज नहीं, दलालों का खेल! मिर्ज़ापुर मंडलीय अस्पताल की हकीकत आई सामने
मिर्ज़ापुर मंडलीय अस्पताल में दलालों के नेटवर्क और डॉक्टर के दुर्व्यवहार के आरोप सामने आए हैं। मरीजों और तीमारदारों के शोषण की शिकायतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सरकारी अस्पतालों को आम लोगों के इलाज का सबसे भरोसेमंद सहारा माना जाता है, लेकिन जब यही व्यवस्था सवालों के घेरे में आ जाए, तो भरोसा डगमगाने लगता है। उत्तर प्रदेश के मीरजापुर से सामने आई एक घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है, जहां मरीजों और तीमारदारों को कथित तौर पर दलालों, अव्यवस्था और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला मिर्ज़ापुर के मंडलीय अस्पताल का है। आरोप है कि यहां मरीजों के इलाज से ज्यादा दलालों का नेटवर्क सक्रिय है, जो दवा और इलाज के नाम पर मरीजों को परेशान कर रहा है। 20 अप्रैल 2026 को स्थानीय समाचार पत्र के संपादक विष्णुकांत पांडेय अपनी 82 वर्षीय मां को इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे। उनका आरोप है कि डॉक्टर के कक्ष के बाहर पहले से मौजूद दलालों ने उन्हें अंदर जाने से रोकने की कोशिश की और धक्का-मुक्की तक की।
डॉक्टर पर दुर्व्यवहार का आरोप
आरोप के अनुसार, जब वह किसी तरह डॉक्टर डॉ. आनन्द कुमार सिंह के कक्ष (कमरा नंबर 102) तक पहुंचे, तो उन्हें मरीज दिखाने में टालमटोल की गई। आरोप है कि डॉक्टर ने कथित तौर पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि “लाइन से आओ, कोई गवर्नर नहीं हो”, और पुलिस बुलाने की धमकी भी दी। पीड़ित के मुताबिक, वह अपनी बीमार मां को दिखाने के लिए काफी देर तक इधर-उधर भटकते रहे, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई।
दलालों का सिंडिकेट और दवा कारोबार
अस्पताल में दलालों की सक्रियता को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं के पर्चे को मेडिकल स्टोर से जुड़े दलाल छीनने तक की कोशिश करते हैं, ताकि मरीज को तय दुकानों से ही दवा खरीदने के लिए मजबूर किया जा सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी मरीजों और पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मेडिकल कॉलेज बनने के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
मंडलीय अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के अधीन लाने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के बड़े दावे किए गए थे। कहा गया था कि इससे मरीजों को बेहतर इलाज और सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि यहां व्यवस्था पर दलालों और चुनिंदा दवा दुकानदारों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, जिससे आम मरीज आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं। इस पूरे मामले ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित पत्रकार ने कहा है कि वह इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री और बृजेश पाठक से करेंगे।
रिपोर्ट – संतोष देव गिरी
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