उन्नाव में नौकरी का खेल! सिफारिश से बना सचिव? DM ने बैठाई जांच

उन्नाव में सचिव भर्ती को लेकर गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। अभ्यर्थी ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता न होने और सिफारिश के आधार पर चयन का आरोप लगाया है। डीएम ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उन्नाव में सचिव भर्ती को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े एक बाबू पर भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी और पक्षपात के गंभीर आरोप लगे हैं। अभ्यर्थी अमित जयसवाल ने पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की है, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आ गया है।

विज्ञापन में नहीं था चयन प्रक्रिया का जिक्र

शिकायत के मुताबिक, जिला पंचायत/बेसिक शिक्षा परिषद कर्मचारी सहकारी समिति की भर्ती के लिए जारी विज्ञापन में चयन प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी। आरोप है कि बिना तय नियमों के सिर्फ इंटरव्यू के आधार पर चयन किया गया।

मनमाने सवाल और ‘अपने’ उम्मीदवार का चयन?

अभ्यर्थी का आरोप है कि इंटरव्यू बोर्ड में मनमाने तरीके से सवाल पूछे गए और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी। सबसे गंभीर आरोप यह है कि दूसरे समिति के अध्यक्ष रामबाबू के करीबी व्यक्ति को सिफारिश के आधार पर चयनित कर लिया गया।

DM ने लिया संज्ञान, जांच के आदेश

मामले की शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी गौरांग राठी ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने समिति के अध्यक्ष को तलब कर जवाब मांगा है और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

एक ही व्यक्ति पर दोहरी जिम्मेदारी पर भी सवाल

शिकायत में यह भी सामने आया है कि समिति के अध्यक्ष रामबाबू लंबे समय से शिक्षा विभाग में लिपिक के पद पर भी तैनात हैं। इसको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक ही व्यक्ति का इतना प्रभाव भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है?

भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल

यह मामला एक बार फिर सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।

  • क्या नियमों का पालन सही तरीके से हुआ?
  • क्या योग्य उम्मीदवारों के साथ न्याय हुआ?
  • क्या सिफारिश का खेल भर्ती पर हावी है?

इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएंगे। उन्नाव का यह मामला सिर्फ एक भर्ती विवाद नहीं, बल्कि सिस्टम में पारदर्शिता और भरोसे की परीक्षा है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह बड़ी लापरवाही और पक्षपात का मामला बन सकता है। अब सबकी नजर प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी है।

रिपोर्ट -रंजन बाजपाई

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