सीएम योगी के आदेश को केडीए अफसरों ने रखा ताक पर!

लखनऊ अग्निकांड के बाद भी संकरी गलियों में बन रहीं मौत की इमारतें

  • हमराज कॉम्प्लेक्स और प्रेमनगर हादसा अब भी सबक नहीं बना
  • चमनगंज, बेकनगंज, इफ्तिखाराबाद, नई सडक़ और प्रेमनगर जैसी घनी आबादी में मनमानी

प्रांजुल मिश्रा/4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
कानपुर। राजधानी लखनऊ के अग्निकांड के बाद प्रदेश सरकार ने अवैध और मानकविहीन निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कानपुर में हालात बदलते नजर नहीं आ रहे हैं। शहर के चमनगंज, बेकनगंज, इफ्तिखाराबाद, नई सडक़ और प्रेमनगर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में बिना स्वीकृत नक्शे और मानकों के बहुमंजिला इमारतों का निर्माण लगातार जारी है। केडीए के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के चलते ऐसे निर्माण धड़ल्ले से हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन इलाकों में आग लगने या किसी अन्य आपदा की स्थिति में दमकल वाहनों का पहुंचना भी मुश्किल है, वहां बहुमंजिला भवनों के निर्माण पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लगाई जा रही?
5 मई 25 को चमनगंज के प्रेमनगर क्षेत्र स्थित पांच मंजिला भवन में शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई थी। इस हादसे में कारोबारी मोहम्मद दानिश, उनकी पत्नी नाजली सबा तथा उनकी बेटियां सबा, सारा, सिमरा और इनाया की दर्दनाक मौत हो गई थी। आग रात करीब 8.25 बजे लगी थी और उसे बुझाने में दमकल विभाग को लगभग 9 घंटे 1० मिनट तक मशक्कत करनी पड़ी थी। इसके बावजूद शहर में अवैध बहुमंजिला निर्माणों पर प्रभावी अंकुश नहीं लग सका। इसके पहले वर्ष 23 में हमराज शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में लगी भीषण आग को बुझाने में चार दिन लग गए थे और करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ था। इन घटनाओं के बावजूद सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है।

सीलिंग कार्रवाई पर भी खड़े हो रहे सवाल

जो निर्माण अब तक सील हो जाने चाहिए थे, वे आज भी निर्माणाधीन हैं। आपके अपने अख़बार 4पीएम में प्रकाशित हुई खबरो में हमने बताया था कई शॉपिंग कॉम्लेक्स नक्शे के विपरीत बनें हुए हैं जिनका नक्शा पूरी तरह से कमर्शियल तक नहीं है न ही उनसभी ने अबतक अपने निर्माण हो कमर्शियल करवाया है इसके बावजूद जिम्मेदार प्रवर्तन प्रभारी अधिकारी अतुल राय, जेई संतोष गोंड, जेई अर्पण सिंह और सुपरवाइजर पूंजीपतियों के आगे पूरी तरह से नतमस्तक हो चुके हैं मुख्यमंत्री के स्पष्ट आदेशों के बाद रसूखदार शॉपिंग कॉम्प्लेसों के खिलाफ सीलिंग की कार्यवाही करने में उनके हाथ कांप रहे हैं पूरा प्रवर्तन दस्ता इतनी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा कि नोटिस के बाद आगे कोई प्रभावी कार्यवाही कर सकें मजाल है कोई कार्यवाही हो जाए क्योंकि विभागीय सूत्रों की मानें तो नक्शे के विपरीत बनें शॉपिंग कॉम्प्लेकसो को सील न करने के एवज में जिम्मेदारों ने लाखों करोड़ों के वारे न्यारे कर अपनी जेबें जो भर लीं हैं और हो भी क्यों न जहां से सेटिंग हो जाती है वहां कार्यवाही करने में हांथ कांपना लाजमी हैं।

जिम्मेदारों की जवाबदेही पर भी शंका

क्षेत्रीय जेई संतोष गोंड का कहना है कि मौके पर सुपरवाइजर मिश्रा जी निरीक्षण के लिए जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा निरीक्षण किया जा रहा है तो अवैध निर्माणों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं?

अधिकारियों का दावा और जमीनी हकीकत में अंतर

केडीए सचिव अभय कुमार पाण्डेय ने पूर्व में कहा था कि उपाध्यक्ष अंकुर कौशिक के निर्देश पर मानकविहीन निर्माणों के विरुद्ध सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है। लेकिन जिन क्षेत्रों में लगातार अवैध निर्माण हो रहे हैं, धड़ल्ले से एक्स्ट्रा फ्लोर बनाए जा रहे हैं, बिना नक्शा पास हुए नक्शे के विपरीत बिल्डिंगे बनकर तैयार हो जा रहीं हैं कई बेसमेंट में अवैध गतिविधियां संचालित हो रही है सकरी गलियों में बहु मंजिला इमारतें बन रही है लेकिन कार्रवाई जीरो/सन्नाटा है। जबकि मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बावजूद अवैध बहुमंजिला निर्माण क्यों नहीं रुक रहे? संकरी गलियों में बिना सुरक्षा मानकों के निर्माण की अनुमति कैसे मिल रही है? नोटिस जारी होने के बाद भी कई मामलों में सीलिंग कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या सभी निर्माणकर्ताओं के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई की जा रही है, या चयनात्मक कार्रवाई हो रही है? यदि इन सवालों का समय रहते जवाब और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे की स्थिति में इसकी जिम्मेदारी तय करना भी उतना ही आवश्यक होगा।?

जहां कार्रवाई आसान, वहां दिखती है सख्ती?

स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि कुछ मामलों में त्वरित कार्रवाई हुई, जबकि अन्य मामलों में लंबे समय तक नोटिस के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी असमानता को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या कार्रवाई के मापदण्ड सभी के लिए समान हैं?

कांग्रेस का एकबार फिर भाजपा व मोदी पर वार

  • वीबीरामजी असल में रोजगार के अधिकार की चोरी : जयराम रमेश
  • इंडानेशिया के दौरे पर भी उठाए सवाल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कांग्रेस ने एकबार फिर भाजपा व पीएम मोदी पर वार किया है। जहां कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बुधवार को विकसित भारत गारंटी फॉर रोजग़ार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट की आलोचना करते हुए इसे रोजग़ार अधिकार की चोरी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसने मनरेगा की जगह एक ऐसी अत्यधिक केंद्रीकृत योजना ले ली है, जिससे राज्य सरकारों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री हसीब द्राबू का एक लेख शेयर करते हुए रमेश ने कहा कि इस नए कानून ने उस योजना की जगह ले ली है, जो ग्रामीण परिवारों को काम का कानूनी अधिकार देती थी।
कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार द्वारा शुरू किए गए दो दशक पुराने मनरेगा की जगह, 1 जुलाई को पूरे देश में वीबीरामजी अधिनियम लागू हो गया। एक्स पर एक पोस्ट में रमेश ने कहा कि भारत के बेहतरीन अर्थशास्त्रियों में से एक और पूर्व वित्त मंत्री हसीब द्राबू ने की सच्चाई को उजागर करते हुए एक बहुत ही तीखा लेख लिखा है। इस नए कानून को क्रांतिकारी वीबीरामजी की जगह जबरदस्ती लागू किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि वीबीरामजी असल में रोजगार के अधिकार की चोरी है। यह काम करने के संवैधानिक अधिकार की जगह एक ऐसी बहुत ज़्यादा सेंट्रलाइज़्ड स्कीम ले आती है, जिससे राज्य सरकारों पर बहुत ज़्यादा वित्तीय बोझ पड़ता है। रमेश ने यह भी दावा किया कि नया कानून टेक्नोलॉजी को इसलिए लाता है ताकि लोगों को सुविधा न मिले, बल्कि उन्हें बाहर रखा जा सके।

ये आदमी नेहरू बनना चाहते हैं : श्रीनेत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय तीन देशों के दौरे पर है, इस यात्रा के पहले चरण में वो सबसे पहले इंडोनेशिया पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भारत और इंडोनेशिया के बीच गहरी दोस्ती का जिक्र किया। पीएम मोदी ने अपनी बात रखते हुए नंबर गणित का जिक्र किया। उन्होंने 8 नंबर का कनेक्शन इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के जन्म दिन और भारत के गणतंत्र दिवस से जोड़ा। जैसे ही पीएम मोदी ने ये बात कही वहां मौजूद सभी लोग मुस्कुरा उठे। हालांकि, पीएम मोदी के इस नंबर गणित पर कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने सवाल उठा दिए। उन्होंने आईक्यू वाली टिप्पणी करते हुए पीएम मोदी को लेकर कहा कि फिर भी ये आदमी नेहरू बनना चाहते हैं। सुप्रिया श्रीनेत ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का जिक्र किया। उन्होंने दो टूक कहा कि जिस तरह से पीएम मोदी ने 8 नंबर का जिक्र किया, इसे गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के जन्मतिथि (17) से जोड़ा, इस आइक्यू पर वार किया। सुप्रिया श्रीनेत ने लिखा- इतने आईक्यू के साथ, ये आदमी नेहरू बनना चाहते हैं!

कोलकाता से दबोचा गया इंटरनेशनल साइबर ठगी का मास्टरमाइंड

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी लखनऊ से संचालित इंटरनेशनल साइबर ठगी के नेटवर्क पर पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। 119 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस ने इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड और 25 हजार रुपये के इनामी आरोपी विनीत वशिष्ट को कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया है।
उसके साथ नायकर जयराज और रिंकी दास गुप्ता भी पुलिस के हत्थे चढ़े हैं। जांच में सामने आया है कि यह कोई साधारण कॉल सेंटर नहीं, बल्कि विदेशों में बैठे लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाला संगठित गिरोह था। इंटरनेट कॉलिंग प्लेटफॉर्म के जरिए अमेरिका के नागरिकों को फंसाया जाता था और ठगी की रकम हवाला नेटवर्क के जरिए देश-विदेश में पहुंचाई जाती थी।

छोटी मछली पकड़ाई लेकिन मगरमच्छ नहीं : दिग्विजय

  • राम मंदिर चंदा चोरी पर कांग्रेस नेता बोले- आखिरी सांस तक लडूंगा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
भोपाल। राम मंदिर चंदा घोटाले के मामले पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने फिर से बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत में सनातन धर्म में भगवान राम का बहुत महत्व है, वे हमारे लिए आदर्श हैं। मैं भगवान राम का भक्त हूं, मेरा परिवार लंबे समय से भगवान राघवजी के राघोगढ़ मंदिर से जुड़ा रहा है। हमने शिला पूजन के लिए आयोजित रथ यात्रा में भी योगदान दिया था। हालांकि मैं कांग्रेस का सदस्य हूं, लेकिन मैं राम जी का भक्त हूं।
हमें खुशी है कि गोरखनाथ मठ के प्रमुख—जिन्होंने निर्मोही अखाड़े के साथ मिलकर एक सदी से भी ज़्यादा समय तक राम जन्मभूमि के लिए लड़ाई लड़ी-अब वहां के मुख्यमंत्री हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए कौन जि़म्मेदार था? नृपेंद्र मिश्र जी। और नृपेंद्र मिश्र जी कौन हैं? वे प्रधानमंत्री के सबसे भरोसेमंद प्रधान सचिव थे। उन्होंने खुद भारी लूट और डकैती की बात कही है। एसआईटी में भी ऐसा लग रहा छोटी मछली पकड़ी गई है जबकि मगरमच्छों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

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