टारेगट पर अल्पसंख्यक… बंगाल में BJP सरकार के एक्शन का विरोध, CPI-ML पहुंची हाई कोर्ट तो सड़कों पर उतरेंगे TMC के नेता

पश्चिम बंगाल में पहली बार सरकार बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक्शन से विपक्षी दल नाखुश हैं. विपक्ष का कहना है कि बीजेपी सरकार अल्पसंख्यकों को टारगेट कर रहा है. बीजेपी के हाथों सत्ता गंवाने वाली टीएमसी अब राज्य में चलाए जा रहे “बुलडोज़र एक्शन” के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगी और सड़क पर उतरेगी तो वाम दल कुछ फैसलों के खिलाफ हाई कोर्ट जाने की तैयारी में है.
ममता बनर्जी की अगुवाई वाली अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) कल गुरुवार (21 मई) को कोलकाता और आस-पास के इलाकों में हॉकरों को कथित तौर पर जबरदस्ती हटाने और राज्य में नई बनी BJP सरकार की ओर से की जा रही “बुलडोज़र एक्शन” के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगी. पार्टी के अनुसार, हावड़ा स्टेशन, सियालदह स्टेशन और बालीगंज के पास विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे. प्रदर्शन के दौरान पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ-साथ हॉकरों और अल्पसंख्यक समुदायों को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने के खिलाफ इसमें शामिल होने की उम्मीद है.
ये विरोध प्रदर्शन पश्चिम बंगाल में पिछले दिनों विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच हो रहे हैं, जिसमें बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत हासिल करते हुए 207 सीटें जीती और राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन को खत्म कर दिया. TMC को 80 सीटों पर जीत हासिल हुई थी.
अल्पसंख्यकों को बनाया जा रहा निशानाः ममता
बीजेपी सरकार के ताबड़तोड़ एक्शन को लेकर कल मंगलवार को कालीघाट में पार्टी विधायकों के साथ एक बैठक में TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि BJP सरकार के तहत अल्पसंख्यक समुदायों और हॉकरों को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा, “यहां अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है. हॉकरों के ठेलों पर बुलडोज़र तक चलाए जा रहे हैं. यह सरकार हमारे संवैधानिक विचारों और मूल्यों के साथ छेड़छाड़ कर रही है. आने वाले दिनों में BJP को दिल्ली की सत्ता से हटा दिया जाएगा.”
ममता के भतीजे और टीमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी जोर देकर कहा कि पार्टी चुनावी हार के बावजूद BJP के खिलाफ अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखेगी. अभिषेक बनर्जी ने राज्य में BJP नेतृत्व की आलोचना की और कहा कि पार्टी डरने वाली नहीं है. “उन्हें जो करना है करने दो… मेरा घर गिरा दो, नोटिस भेजो… मैं इन बातों से झुकने वाला नहीं हूं. चाहे कुछ भी हो जाए, BJP के खिलाफ मेरी लड़ाई जारी रहेगी.”
भड़काऊ बयान के खिलाफ FIR
यह तब हुआ जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव रैलियों के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ टिप्पणी करने के लिए बिधाननगर नॉर्थ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक FIR दर्ज की गई. 15 मई को दर्ज FIR के अनुसार, शिकायतकर्ता राजीव सरकार ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी ने महेशतला, आरामबाग, हरीनाघता और नंदीग्राम में रैलियों के दौरान भड़काऊ और धमकी भरे भाषण दिए, जिससे हिंसा भड़क सकती थी और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ सकती है.
शिकायत में गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई टिप्पणियों और डीजे के संबंध में दिए गए बयानों का भी ज़िक्र किया गया है. FIR में यह भी कहा गया कि ये टिप्पणियां अभिषेक बनर्जी के आधिकारिक फेसबुक हैंडल, ‘Abhishek Banerjee Official’, और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए फैलाई गईं. भारतीय न्याय संहिता और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की संबंधित धाराओं के तहत एक मामला दर्ज किया गया है.
चुनाव बाद हिंसा को लेकर HC पहुंची TMC
विरोध-प्रदर्शन के साथ ही तृणमूल ने चुनाव नतीजों के बाद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में चुनाव बाद हुई हिंसा की कथित घटनाओं पर दखल देने की मांग करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया है. याचिका के अनुसार, कोलकाता और हावड़ा सहित कई जिलों से पार्टी के कार्यकर्ताओं तथा पार्टी कार्यालयों को निशाना बनाकर आगजनी, तोड़फोड़ और हमलों की घटनाएं सामने आई हैं. याचिका में प्रभावित पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए सुरक्षा और कथित हिंसा की उचित जांच की मांग की गई है.
इस बीच 14 मई को, ममता अपनी याचिका के सिलसिले में हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल के सामने पेश होने के लिए वकील का चोगा पहनकर कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंची थीं. हालांकि चुनाव नतीजों के बाद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हुए झड़पों और तोड़फोड़ की घटनाओं को लेकर BJP और TMC की ओर से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए. TMC से जुड़े नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी के कई कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई और हिंसा की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई है.
पशु वध पर रोक के खिलाफ HC में याचिका
दूसरी ओर, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन की पश्चिम बंगाल यूनिट ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया है, जिसमें राज्य की बीजेपी सरकार के पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 को लागू करने के कदम पर तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है. पार्टी का आरोप है कि इस अधिनियम का इस्तेमाल धार्मिक अनुष्ठानों में पशु बलि पर प्रतिबंध लगाने के लिए किया जा रहा है.
माना जा रहा है कि मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई होने सकती है. राज्य सरकार ने 1950 के इस कानून को लागू करने की घोषणा की है, ताकि ऐसे गायों और भैंसों सहित अन्य पशुओं के वध पर रोक लगाई जा सके, जिसे किसी पशु चिकित्सक द्वारा उन्हें वध के लिए प्रमाणित न कर दिया जाए.
अधिसूचना में आगे यह भी कहा गया कि किसी पशु को वध के लिए तभी उपयुक्त माना जाएगा, जब वह स्थायी रूप से अक्षम हो या उसकी आयु 14 साल से अधिक हो. सीपीएम की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया, “प्रस्तावित प्रतिबंध से मुस्लिम समुदाय की धार्मिक आजादी पर असर पड़ेगा. किसानों और पशु व्यापारियों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव असर पड़ेगा, जिनमें से कई लोग हिंदू समुदाय से भी संबंध रखते हैं. पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस PIL में उन “कठोर दंडात्मक प्रतिबंधों” को चुनौती दी गई है, जिन्हें 1950 के एक “पुराने” कानून के आधार पर लागू करने की कोशिश की जा रही है.

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