साईफन टूटा तो डूबने लगे गांव! मिर्जापुर में सैकड़ों बीघा फसल पर मंडराया बड़ा खतरा

मिर्जापुर के जमालपुर में साईफन टूटने से जल निकासी बाधित होने का आरोप है। हसौली-कर्जी समेत कई गांवों में जलभराव से सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद होने की आशंका है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क:  मिर्जापुर के जमालपुर क्षेत्र में बारिश और जल निकासी की समस्या ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। हसौली नहर में वर्षों पहले बनाया गया साईफन सिंचाई विभाग द्वारा तोड़े जाने के बाद ग्रामीणों का दावा है कि पानी की निकासी बाधित हो गई है। हसौली, कर्जी समेत आसपास के कई गांवों में जलभराव से कृत्रिम बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। खेतों में खड़ी फसल डूबने से कई सौ बीघा फसल के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

साईफन टूटने के बाद बिगड़ी जल निकासी

ग्रामीणों के अनुसार गड़ई नदी में बाढ़ के दौरान पानी निकालने के लिए करीब पांच दशक पहले रामपुर, ओड़ी, भदावल और जमालपुर नहर मार्ग पर हसौली के पास साईफन बनाया गया था। यह क्षेत्र में बाढ़ के पानी की निकासी का प्रमुख माध्यम माना जाता था।

आरोप है कि सिंचाई विभाग ने पर्याप्त जांच और वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना साईफन को तोड़ दिया। अब बाढ़ की स्थिति में रामपुर-जमालपुर नहर मार्ग को खोदकर पानी निकालने की कोशिश की जा रही है।

फसल के साथ मकानों और सोसायटी पर भी खतरा

ग्रामीणों का कहना है कि नहर किनारे नाले की जमीन पर कथित अतिक्रमण और मकान बनने से जल निकासी की समस्या और गंभीर हो गई है। खेतों में पानी भरने से खड़ी फसलों को नुकसान हो रहा है। पुराने और जर्जर मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है।

हसौली सोसायटी परिसर में पानी पहुंचने से वहां रखे खाद, बीज, अनाज और अन्य सामग्री के नुकसान की आशंका भी जताई गई है।

स्थायी जल निकासी और मुआवजे की मांग

कृत्रिम बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों और अन्नदाता मंच के संयोजक चौधरी रमेश सिंह ने प्रशासन से तत्काल मौके का सर्वे कराने की मांग की है। उन्होंने साईफन जैसी स्थायी जल निकासी व्यवस्था दोबारा कराने और प्रभावित किसानों की फसल क्षति का आकलन कर पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की है।

फिलहाल क्षेत्र में जल निकासी को लेकर ग्रामीणों की चिंता बनी हुई है। वास्तविक नुकसान और जिम्मेदारी का आकलन प्रशासनिक सर्वे और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

रिपोर्ट – संतोष देव गिरी, मिर्ज़ापुर

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