मोदी-निर्मला ने इतना बड़ा सच छिपाया भारत की लगा दी वाट!
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यूं कागजों से लेकर केंद्र में बैठे नेताओं के भाषण में ऐसा बयान दिया जाता है की मानों इस सरकार में हर वर्ग के लोग तरक्की की ऊंची सीढ़ी चढ़ रहे हैं। वित्त मंत्री बड़े ही गर्व के साथ बजट को लेकर लंबा चौड़ा भाषण देती हैं। बजट को लेकर दिए गए भाषण और उनमें की गई घोषणाओं का जिक्र न केवल सदन में बल्कि सदन के बाहर में खूब गूंजता है। जिसके लेकर केंद्र में बैठी मोदी सरकार जमकर वाह वही भी लूटती है। लेकिन कब तक, आखिर कब तक बकरे की अम्मा खैर मनाएगी। मोदी सरकार बजट में टैक्स को लेकर दिखावे के लिए दो चार बिंदु ऐसे दे देती है जिससे मीडिल क्लास के लोगों को ऐसा लगे मानों सरकार उनके भले के लिए सोच रही हो लेकिन असल हककीत जब सामे आती है तो पैरों तले जमीन खिसक जाती है।
अभी मोदी सरकार इस बार के बजट को लेकर दूर के ढोल पीट ही रही थी कि Blume Ventures की रिपोर्ट सामने आई जिसने ऐसे दावे किये जिसके बाद न केवल सरकार की पोल खुली बल्कि लोगों को देश के हालात के बारे में भी मालूम चला। दरअसल Blume Ventures की रिपोर्ट के मुताबिक 140 करोड़ जनसंख्या वाले देश में 100 करोड़ ऐसे लोग हैं जिनके पास जरूरी खर्चों के अलावा कुछ भी खरीदने के लिए पैसे नहीं बचते। यानी कि 90 प्रतिशत ऐसे लोग हैं जो इससे झूझ रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ देश के केवल 10 फीसदी यानी लगभग 13 से 14 करोड़ लोग ही जो अर्थव्यवस्था को चला रहे हैं, क्योंकि ये लोग ही सबसे ज्यादा खर्च करते हैं और देश की तरक्की में अहम किरदार निभाते हैं. जरा सोचिए जिस देश को Consumption Based Economy वाला देश कहा जाता है वहां का ये आलम है।
बता दें कि टॉप 10% लोगों के पास देश की आमदनी का 57% हिस्सा है, वहीं, देश के सबसे गरीब 50% लोगों के पास देश की आमदनी का 15% हिस्सा है
जिससे ये मालूम चलता है कि देश में मिडिल क्लास की हालत कितनी ज्यादा खराब है। आपक जानकर हैरानी होगी कि पिछले 10 सालों से Income Tax देने वाले लोगों की आमदनी ही नहीं बढ़ी है। अब आमदनी बढ़े न बढ़े लेकिन इससे सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता दिखाई दे रहा लेकिन महंगाई सातवां आसमान छू रही है। आलम ये है कि आम मिडिल क्लास आदमी महंगाई के बोझ तले दबते जा रहे हैं। अगर मिडिल क्लास की बचत की बात की जाए तो अभी मौजूदा समय में पिछले 50 साल के सबसे निचले स्तर पर है।
ऐसे में ब्लूम वेंचर्स की इंडस वैली एनुअल रिपोर्ट 2025 में ये बातें भी सामने आई हैं. इस रिपोर्ट में बाकायदा बताया गया है कि टॉप 10% लोग देश की 57.7% कमाई कंट्रोल करते हैं जबकि बॉटम 50% की कमाई का हिस्सा 22.2% से घटकर 15% हो गया है. रिपोर्ट में साफ़ तौर पर कहा गया है कि अमीर लोग और अमीर हो रहे हैं, लेकिन उनकी तादाद नहीं बढ़ रही. जिसका मतलब साफ़ है कि जो लोग पहले से अमीर हैं पैसे वाले हैं, वो ज्यादा कमाई कर रहे हैं लेकिन
इस ग्रुप में नए लोग शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इसके अलावा 30 करोड़ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने हाल फिलहाल खर्च करना शुरू किया है. इन्हें ‘उभरते हुए’ या ‘इच्छुक’ ग्राहक कहा जा रहा है लेकिन ये लोग जो खर्च कर भी रहे हैं बड़ी सावधानी से कर रहे हैं।
इसके साथ ही रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि हाल के दिनों में लोगों की खर्च करने की ताकत कम हुई है, उनकी बचत भी तेजी से घट रही है वहीं दूसरी तरफ कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है. इस वजह से बाजार का तरीका भी बदल गया है जिसकी वजह से कंपनियां अब सस्ते सामानों की जगह प्रीमियम प्रॉडक्ट्स पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। वहीं इसके उदाहरणों की बात की जाए तप इसका सबसे बड़ा उदाहरण रियल एस्टेट सेक्टर है, क्योंकि इसमें ये ट्रेंड साफतौर पर नजर आ रहा है. आंकड़ों के मुताबिक 5 साल पहले रियल एस्टेट की कुल बिक्री में अफोर्डेबल हाउसिंग की हिस्सेदारी 40% थी, जो अब घटकर महज 18% रह गई है.
न सिर्फ रियल एस्टेट बल्कि कई ऐसे सेक्टर हैं जो की इससे प्रभावित हुए हैं। इसे में एक माइक्रोफाइनेंस सेक्टर भी है। इसकी बात की जाए तो इस सेक्टर में भी हाताल कुछ ठीक नहीं चल रहे हैं। बता दें कि दिसंबर 2024 तक इस सेक्टर में नॉन-परफॉर्मिंग असेट्स 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. ये अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है और कुल लोन का 13% है. NPA के बारे में विस्तार से बात की जाए तो इसका मतलब है वो लोन जो लोग वापस नहीं कर पा रहे. गरीब लोग माइक्रोफाइनेंस से छोटे-छोटे लोन लेते हैं, क्योंकि उन्हें बैंक से आसानी से लोन नहीं मिलता. लेकिन अब उनकी लोन चुकाने की ताकत कम हो रही है. आंकड़ों के मुताबिक 91 से 180 दिन का बकाया लोन कुल आउटस्टैंडिंग का 3.3 फीसदी है, जबकि 180 दिन से ज्यादा बकाया लोन 9.7% है. माइक्रोफाइनेंस को लेकर अब संस्थान भी सतर्कता बरत रहे हैं, क्योंकि उन्हें NPA अभी और बढ़ने की आशंका है.
इसी रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि लोग कंपनियां अब सस्ते प्रोडक्ट्स बनाने की जगह महंगे और प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर ज़ोर दे रही हैं. उदाहरण के तौर पर जैसे- लक्ज़री अपार्टमेंट्स की डिमांड बढ़ रही है, जबकि अफोर्डेबल घरों की हिस्सेदारी पांच साल में 40 फीसदी से गिरकर सिर्फ 18 फीसदी रह गई है. महंगे स्मार्टफोन धड़ाधड़ बिक रहे हैं, लेकिन सस्ते मॉडल्स के खरीदार कम हो गए हैं. Coldplay और Ed Sheeran जैसे इंटरनेशनल स्टार्स के महंगे कॉन्सर्ट टिकट पलक झपकते ही बिक जाते हैं, जबकि आम जनता के लिए मनोरंजन महंगा होता जा रहा है. ये कोई पहली रिपोर्ट नहीं है जिसमें देश की अर्थवस्था को लेकर इतना बड़ा खुलासा हुआ हो बल्कि इसे लेकर बीबीसी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि कोविड के बाद भारत की अर्थव्यवस्था की रिकवरी “K-शेप्ड” की रही है. यानी अमीरों के लिए अच्छे दिन आ गए, लेकिन गरीबों की हालत और खराब हो गई. इसे ऐसे देखिए, 1990 में, भारत के टॉप 10 फीसदी लोग 34 फीसदी राष्ट्रीय आय के मालिक थे. आज वही 10 फीसदी लोग 57.7 फीसदी राष्ट्रीय आय के मालिक हो गए हैं. जबकि, देश के सबसे गरीब 50 फीसदी लोगों की आमदनी 22.2 फीसदी से घटकर सिर्फ 15 फीसदी रह गई है. यानी, अमीरों के लिए दुनिया और चमकदार हो गई है, जबकि गरीबों के लिए चीजें पहले से ज़्यादा मुश्किल हो गईं.
इसके साथ ही मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के आंकड़ों के मुताबिक, भारत का मिडिल क्लास भी मुश्किलों में फंसता जा रहा है. महंगाई के साथ उनकी सैलरी में कोई खास इज़ाफा नहीं हुआ. पिछले दस सालों में, टैक्स देने वाले मिडिल क्लास की इनकम असल में स्थिर ही रही है, यानी महंगाई के हिसाब से देखें तो उनकी सैलरी आधी हो चुकी है. आज की बात करें तो मध्यम वर्ग की सेविंग्स 50 साल के सबसे निचले स्तर पर हैं. लोगों की ज़रूरतें बढ़ रही हैं, लेकिन आमदनी वैसी की वैसी बनी हुई है.
वहीं इस Blume Ventures को लेकर राजनीतिक दल भी लगातार भाजपा पर हमलावर हैं। इसी बीच कांग्रेस ने Blume Ventures का हवाला देते हुए देश की मोदी सरकार पर हल्ला बोला है. आरोप लगाया कि मोदी सरकार में सारी नीतियां सिर्फ पूंजीपतियों के लिए बनाई जा रही हैं. ये सरकार गरीबों की जेब काटकर, अमीरों की तिजोरियां भर रही है. कहा कि यह साफ हो गया है कि नरेंद्र मोदी सिर्फ अमीरों के लिए काम करते हैं, उन्हें गरीबों की परेशानी से कोई मतलब नहीं है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इसे लेकर केंद्र में बैठी मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने Blume Ventures की रिपोर्ट को कोट करते हुए एक्स पर पोस्ट किया. देश के 140 करोड़ लोगों में से 100 करोड़ लोगों के पास जरूरी खर्चों के अलावा कुछ भी खरीदने के लिए पैसे नहीं बचते. ये लोग आर्थिक तंगी और जैसे-तैसे घर चलाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं. ये चौंकाने वाला आंकड़ा देश में बढ़ती तंगहाली और बदहाली की कहानी बयां कर रहा है.
गौरतलब है कि बजट और अन्य मुद्दों को लेकर भाजपा पहले ही घिर रही थी वहीं अब Blume Ventures की रिपोर्ट आने के बाद सरकार पूरी तरह से एक्सपोज हो चुकी है। देश की अर्थवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं और भाजपा को विपक्षी दलों के नेता जमकर रहे रहे हैं।