योगी-केशव के बीच फिर हुई अनबन! 2017 के चुनाव का किया जिक्र
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यूपी में हाल ही में हुए उपचुनाव में भले ही भाजपा को सफलता मिली हो लेकिन अब आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दल एक्टिव मोड में नजर आ रहे हैं। ऐसे में भाजपा के सामने कांग्रेस और सपा जैसी बड़ी चुनौतियाँ हैं। लेकिन वहीं दूसरी तरफ सीएम योगी और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के बीच अनबन की खबरें भी जनता के सामने समय-समय पर आती रहती हैं। लेकिन इन खबरों को एक तरफ जहां भाजपा नेता खारिज करते फिरते हैं तो वहीँ दूसरी तरफ केशव प्रसाद मौर्या ऐसे बयान दे देते हैं जिसे लेकर अटकलों का बाजर गर्म हो जाता है। वहीं इसी बीच एक बार फिर केशव प्रसाद मौर्य ने ऐसा बयान दिया जिसे लेकर सियासी गलियारों में जमकर चर्चा हो रही है। दरअसल उन्होंने 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा दावा कर दिया है. उन्होंने साफ कहा कि यूपी में अगली बार भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ बनेगी. डिप्टी सीएम ने समाजवादी पार्टी निशाना साधते हुए उसे डूबता जहाज बताया और कहा कि अब ये पार्टी समाप्तवादी पार्टी बन जाएगी.
उन्होंने यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव फिर बीजेपी की जीत का दावा किया और कहा कि “2027 में तीसरी बार 2017 की तरह भाजपा सरकार की सरकार बड़े बहुमत से बनने जा रही है. समाजवादी पार्टी का भविष्य अंधकार में है. अब इस बयान के आने के बाद सियासी गलियारों में ये चर्चा होने लगी है कि ऐसी क्या वजह है जो केशव प्रसाद मौर्य 2022 के विधानसभा चुनाव में हुई जीत का जिक्र न करके 2017 के चुनावी जीत का जिक्र कर रहे हैं। हालांकि यह कोई पहली बार नहीं है जब उन्होंने ऐसा बयान दिया हुआ। बता दें कि पिछली साल जुलाई में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यूपी के डिप्टी सीएम मौर्य ने अखिलेश पर कटाक्ष करते हुए उन्हें एसपी का ‘बहादुर’ कहा और कहा था कि देश और प्रदेश दोनों जगह बीजेपी का मजबूत संगठन और सरकार है। उन्होंने सपा के पीडीए फॉर्मूले पर निशाना साधा और इसे धोखा बताया था। इस बीच, मौर्य ने यह भी दावा किया था कि भाजपा 2027 में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों में 2017 के परिणामों को दोहराएगी। “यूपी में सपा की गुंडागर्दी की वापसी असंभव है, भाजपा 2027 के विधानसभा चुनावों में 2017 को दोहराएगी।”
इसके साथ ही बता दें कि मौर्य का यह बयान ऐसे समय में आया था जब उनके और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच मतभेद की अफवाहें चल रही थीं । 15 जुलाई को भाजपा की एक दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान दिए गए बयान के बाद यह अफवाहें शुरू हुईं थी। बैठक में मौर्य ने कहा कि वह खुद को पहले भाजपा कार्यकर्ता मानते हैं फिर उपमुख्यमंत्री। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संगठन हमेशा सर्वोच्च था, है और रहेगा।
खैर 2017 के इस पहेली की अगर बात की जाए तो उत्तर प्रदेश बीजेपी में पिछड़ों का चेहरा माने जाने वाले केशव प्रसाद मौर्य मौजूदा योगी सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं. 2017 में यूपी बीजेपी की कमान मौर्य के हाथों में ही थी. पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जीत दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही. चुनाव नतीजों के बाद मुख्यमंत्री की रेस में उनका नाम सबसे आगे माना जा रहा था. हालांकि, पार्टी हाईकमान ने योगी आदित्यनाथ को देश के सबसे बड़े सूबे की कमान सौंपी.
वहीं अब से तकरीबन चार साल पहले की बात की जाए तो ऐसी खबरें चल रही थी कि भाजपा सीएम योगी को हटाना चाहती है। चर्चा हुई कि सीएम योगी आदित्यनाथ को बीजेपी आलाकमान पद से हटाना चाहता है। यह टाइम 2022 के विधानसभा चुनाव के करीब 9 महीने पहले का था। हालांकि, उन्हें पद से नहीं हटाया गया था। जिसके बाद जुलाई 2024 में अब फिर से यहीं खबरें चली कि यूपी बीजेपी में सबकुछ सहीं नहीं चल रहा है। केशव प्रसाद मौर्य के कार्यसमिति की बैठक में दिए गए बयान ने इन सबको और हवा दे दी थी। मौर्य ने कहा कि संगठन सरकार से बड़ा है। संगठन से बड़ा कोई नहीं होता है। संगठन सरकार से बड़ा था, बड़ा है और हमेशा बड़ा रहेगा। जिससे ये साबित होता है की सीएम योगी और केशव प्रसाद मौर्य के बीच सबकुछ बेहतर नहीं रहा पाता।
वहीं अगर केशव प्रसाद मौर्य की बात की जाए तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में केशव मौर्य के कद का दूसरा ओबीसी नेता नहीं है। वह पिछड़ों के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे हैं। इसी वजह से पार्टी उन पर भरोसा करती है। केशव प्रसाद मौर्य को राज्य में मौर्य और कुशवाहा वोटर्स को साधने के लिए भी पार्टी ने उन्हें ही जिम्मेदारी दी। गैर यादव वोटर्स को एकजुट करने में भी केशव मौर्य का योगदान काफी अहम माना जाता है। उत्तर प्रदेश के कुल वोटर्स में ओबीसी वोटर्स की हिस्सेदारी करीब 45 फीसदी के आसपास है। ऐसा कहा जाता है कि यादव वोटरों का एक बड़ा हिस्सा समाजवादी पार्टी का समर्थक है। बीते चुनाव की बात की जाए तो उन्हें लगभग 14 साल से प्रदेश की सत्ता से बाहर रही भारतीय जनता पार्टी ने साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बहुत बढ़िया प्रदर्शन किया। भारतीय जनता पार्टी को करीब 325 सीटें मिलीं थीं। इसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद का बड़ा दावेदार माना जा रहा था। हालांकि, उन्हें डिप्टी सीएम पद से ही संतोष करना पड़ा और योगी आदित्यनाथ को सीएम पद की कुर्सी मिली। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने साल 2022 में फिर से सिराथू से चुनाव लड़ा और इस बार वह समाजवादी पार्टी की पल्लवी पटेल से हार गए। चुनाव में हार के बाद भी पार्टी ने उन्हें फिर से डिप्टी सीएम बना दिया। जिससे ये साबित होता है कि केशव प्रसाद मौर्य की भाजपा में क्या अहमियत है। ऐसे में यूपी उपचुनाव में मिली जीत के बाद भी केशव प्रसाद मौर्य ऐसा बयान दे रहे हैं जिसे लेकर सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है। ऐसा माना जा रहा कि आगामी 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए भी आसान नहीं होने वाला है।